Tax Alert: विदेश में है सीक्रेट बैंक खाता या प्रॉपर्टी? अब AIS खोल देगा आपकी विदेशी कमाई की पूरी पोल!
ITR Foreign Assets Disclosure: CBDT ने 8 जुलाई को एक ऐसा आदेश जारी किया है, जो विदेशों में संपत्ति या बैंक खाता रखने वालों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब तक जो विदेशी कमाई सिर्फ इनकम टैक्स विभाग की फाइलों में छुपी रहती थी, वह अब सीधे आपके AIS और Form 26AS में दिखाई देगी
अब टैक्स डिपार्टमेंट विदेशों से भी आपकी कुंडली खंगाल रहा है
Foreign Assets In AIS Form 26AS Rule: अगर कोई शख्स ये सोचता है कि उसने चुपके से विदेश के किसी बैंक में अपना अकाउंट खुलवा लिया, वहां निवेश कर दिया या कोई प्रॉपर्टी खरीद ली और भारत सरकार को कानोंकान खबर नहीं होगी... तो अब यह उसकी सबसे बड़ी भूल साबित होने वाली है।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने 8 जुलाई को एक ऐसा आदेश जारी किया है, जो विदेशों में संपत्ति या बैंक खाता रखने वालों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब तक जो विदेशी कमाई सिर्फ इनकम टैक्स विभाग की फाइलों में छुपी रहती थी, वह अब सीधे आपके AIS और Form 26AS में दिखाई देगी। आइए, इस नए नियम को समझते हैं कि कैसे अब टैक्स डिपार्टमेंट विदेशों से भी आपकी कुंडली निकाल रहा है।
टैक्स डिपार्टमेंट को आपके हर एसेट की है खबर!
इसे ऐसे समझिए कि दुनिया के तमाम बड़े देश आपस में एक दोस्ती के धागे से बंधे हैं, जिसे AEOI (Automatic Exchange of Information) यानी सूचनाओं का ऑटोमैटिक आदान-प्रदान कहा जाता है। इसके तहत CRS (Common Reporting Standard) और अमेरिका का FATCA जैसे कड़े इंटरनेशनल नियम काम करते हैं। इस दोस्ती का सीधा नियम यह है, 'तुम हमारे नागरिकों की बैंक डिटेल्स हमें दो, हम तुम्हारे नागरिकों की बैंक डिटेल्स तुम्हें देंगे।'
अब तक क्या होता था?
विदेशी सरकारें हर साल भारतीय नागरिकों के विदेशी बैंक खातों, वहां हुए निवेश और मोटी ट्रांजैक्शंस का पूरा डेटा भारत के इनकम टैक्स विभाग को चुपचाप सौंप देती थीं। यह जानकारी टैक्स अधिकारियों के पास तो होती थी, लेकिन आम टैक्सपेयर को खुद यह नहीं पता होता था कि सरकार उसके बारे में कितना जानती है।
अब क्या बदल गया?
अब सीबीडीटी ने दिल्ली के सिस्टम डायरेक्टर जनरल को आदेश दिया है कि विदेशों से मिलने वाले इस सारे कच्चे-चिट्ठे को सीधे उठाकर टैक्सपेयर के पर्सनल AIS और Form 26AS पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाए। यानी अब सरकार टैक्सपेयर को साफ कह रही है कि, 'देखिए, हमारे पास आपकी विदेश की यह कुंडली है, अब चुपचाप इसे अपने रिटर्न में दिखा दीजिए!'
कब तक अपलोड होगा आपका विदेशी डेटा?
टैक्स डिपार्टमेंट ने इस काम को पूरा करने के लिए एक सख्त टाइमलाइन तय कर दी है:
साल 2022, 2023 और 2024 का डेटा: इस आदेश के जारी होने, यानी 8 जुलाई के 90 दिनों के भीतर आपके पोर्टल पर दिखने लगेगा।
साल 2025 का डेटा: विदेशी सरकारों से यह डेटा जिस भी महीने में भारत सरकार को मिलेगा, उसके 90 दिनों के भीतर इसे आपके एआईएस (AIS) में अपडेट कर दिया जाएगा।
टैक्सपेयर्स के लिए क्या है इसका मतलब? एक्सपर्ट्स की चेतावनी
बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी (BCAS) के ट्रेजरर सीए मृणाल मेहता और जॉइंट सेक्रेटरी सीए किंजल भूता ने इस बदलाव पर टैक्सपेयर्स को कुछ बेहद जरूरी सलाह और चेतावनियां दी हैं:
फाइलिंग से पहले AIS डाउनलोड करना अनिवार्य: अब जब भी आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करें, तो सबसे पहले अपना AIS फॉर्म डाउनलोड करें। विदेश में मौजूद किसी भी खाते या कमाई को ITR के Schedule FA, Schedule FSI और Schedule TR के साथ अच्छे से मैच कर लें।
यह पूरी तरह टैक्स नहीं है: विदेशी डेटा आमतौर पर कैलेंडर ईयर (जनवरी से दिसंबर) के हिसाब से अकाउंट बैलेंस और कुल जमा-निकासी दिखाता है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह पूरी रकम आपकी टैक्सेबल इनकम है, लेकिन उसकी जानकारी देना कानूनी रूप से जरूरी है।
एआईएस खाली होने का मतलब क्लीन चिट नहीं: अगर किसी तकनीकी वजह से आपके AIS में विदेशी संपत्ति नहीं दिख रही है, तो इसका यह मतलब नहीं कि आप उसे ITR में छुपा लें। कुछ देशों से डेटा देरी से आता है। अगर आपने जानकारी छुपाई, तो बाद में पकड़े जाने पर भारी खामियाजा भुगतना होगा।
लापरवाही की तो 'ब्लैक मनी एक्ट' में नपेंगे!
टैक्स एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी। अगर किसी टैक्सपेयर ने विदेश में रखे बैंक खाते, विदेशी शेयरों जैसे- अमेरिकी शेयर बाजार में निवेश या किसी अन्य संपत्ति को अपने ITR में सही-सही नहीं दिखाया, तो इसे बहुत गंभीर अपराध माना जाएगा। ऐसी लापरवाही या चोरी पकड़े जाने पर इनकम टैक्स एक्ट के साथ-साथ खतरनाक ब्लैक मनी एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई, भारी-भरकम जुर्माना और जेल तक की नौबत आ सकती है।