Budget 2026: वित्त वर्ष 2027 के केंद्रीय बजट में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें की जाएंगी शामिल

Budget 2026: 16वें वित्त आयोग का गठन 31 दिसंबर 2023 को किया गया था। 17 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इसने अपनी रिपोर्ट सौंपी। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन केंद्र सरकार हमेशा आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करती रही है

अपडेटेड Jan 28, 2026 पर 12:15 PM
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वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच टैक्सेज के बंटवारे का फॉर्मूला प्रदान करता है।

आगामी बजट में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें शामिल होंगी। यह आयोग पहले ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप चुका है। संविधान के तहत गठित वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच टैक्सेज के बंटवारे का फॉर्मूला प्रदान करता है। केंद्र द्वारा लगाए गए सेस और सरचार्ज, बांटी जाने वाली निधि का हिस्सा नहीं हैं।वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जो केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर सुझाव देता है और समय-समय पर गठित किया जाता है।

नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में 16वें वित्त आयोग का गठन 31 दिसंबर 2023 को किया गया था। पनगढ़िया के नेतृत्व में वित्त आयोग के सदस्यों- रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट एनी जॉर्ज मैथ्यू, अर्थशास्त्री मनोज पांडा, एसबीआई समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्या कांति घोष, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर और आयोग के सचिव ऋत्विक पांडे ने 17 नवंबर 2025 को मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी। आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी रिपोर्ट की एक कॉपी सौंपी थी।

हालांकि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन केंद्र सरकार हमेशा आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करती रही है। संबंधित शर्तों (टीओआर) के अनुसार, 16वें आयोग को 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली 5 साल की अवधि को शामिल करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था।


15वें वित्त आयोग की क्या थी सिफारिश

एन. के. सिंह के नेतृत्व में गठित 15वें वित्त आयोग ने सिफारिश की थी कि राज्यों को 6 साल की अवधि यानि 2020-21 से 2025-26 के दौरान केंद्र के बंट सकने वाले टैक्स पूल का 41 प्रतिशत हिस्सा दिया जाए। यह 14वें वित्त आयोग द्वारा सुझाए गए स्तर के बराबर था। ऐतिहासिक रूप से वित्त आयोग राज्यों की केंद्रीय करों में हिस्सेदारी का निर्धारण जनसंख्या, क्षेत्रफल, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन, राजकोषीय प्रयास, आय अंतर और वन क्षेत्र के वेटेड सम के आधार पर करते रहे हैं।

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यह मुद्दा लंबे समय से केंद्र और राज्यों, खासकर विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के बीच विवाद का विषय रहा है। उनका कहना है कि उन्हें उनका उचित हिस्सा नहीं मिला है। 15वें वित्त आयोग ने जनसंख्या को 15 प्रतिशत, क्षेत्रफल को 15 प्रतिशत, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन को 12.5 प्रतिशत, फॉरेस्ट कवर और इकोलॉजी को 10 प्रतिशत, टैक्स एवं राजकोषीय प्रयासों को 2.5 प्रतिशत वेट दिया था।

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