29 जून को सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव है। घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमत लुढ़की है। हाल ही में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच ताजा हमलों से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। हालांकि ताजा अपडेट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान नए हमलों को रोकने और होर्मुज स्ट्रेट पर बातचीत करने पर राजी हो गए हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने के अनुमानों ने भी सोने और चांदी पर दबाव डाला है। ब्याज दरें बढ़ने से ट्रेजरी यील्ड को सहारा मिलता है और डॉलर मजबूत होता है। इससे सोने और चांदी जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो जाता है।
डॉलर में इस वक्त मजबूती है। डॉलर इंडेक्स एक साल के हाई के करीब बना हुआ है, जिससे अन्य करेंसी रखने वालों के लिए सोना और चांदी महंगे हो गए। रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.6 प्रतिशत गिरकर 4,062.89 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। अगस्त में डिलीवरी वाला US गोल्ड फ्यूचर्स 0.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,077.50 डॉलर प्रति औंस पर है।
चांदी की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह हाजिर भाव 1.2 प्रतिशत गिरकर 58.47 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। दूसरी ओर प्लेटिनम में तेजी है और भाव 0.2 प्रतिशत घटकर 1,617.15 डॉलर प्रति औंस पर है।
देश में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने और चांदी की कीमत में गिरावट है। सोने का वायदा भाव पिछली क्लोजिंग से 1 प्रतिशत टूटकर 142690 रुपये प्रति 10 ग्राम के लो तक गया। इसी तरह चांदी का भाव भी 1 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 218620 रुपये प्रति किलोग्राम के लो तक गया।
भूराजनीतिक तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.85 प्रतिशत बढ़कर 72.6 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। एनर्जी की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बरकरार रखा है।
आगे के लिए क्या मानते हैं एक्सपर्ट
कमोडिटी एनालिस्ट्स का कहना है कि सोने-चांदी की कीमतों पर पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका में आने वाले आर्थिक आंकड़ों- जैसे नॉनफार्म पेरोल, बेरोजगारी दर और मैन्युफैक्चरिंग डेटा का असर पड़ सकता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि डॉलर की लगातार मजबूती, औद्योगिक मांग में सुस्ती की वजह से कीमती धातुओं, खासकर चांदी पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, कम कीमत पर खरीदारी, केंद्रीय बैंकों की ओर से खरीद और भू-राजनीतिक अनिश्चितता से निकट भविष्य में सोने की कीमतों को बीच-बीच में सहारा मिल सकता है। ट्रेडर्स अब ग्लोबल बुलियन मार्केट में स्पष्ट दिशा के लिए नए आर्थिक संकेतों और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों का इंतजार कर रहे हैं।