Gold Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में बढ़त, आगे क्या हो सकता है असर?
Gold Silver Price: जियोपॉलिटिकल टेंशन और यूएस महंगाई के आंकड़ों से पहले अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं की मांग में बढ़ोतरी के कारण सोने-चांदी की कीमतों में 12 अगस्त को शुरुआती कारोबार में बढ़त देखने को मिल रही है
आमतौर पर सोने को कम ब्याज दरों की उम्मीदों से फायदा होता है क्योंकि इससे बिना रिटर्न देने वाली संपत्ति (non-yielding asset) को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) कम हो जाती है।
Gold Silver Price: जियोपॉलिटिकल टेंशन और यूएस महंगाई के आंकड़ों से पहले अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं की मांग में बढ़ोतरी के कारण सोने-चांदी की कीमतों में 12 अगस्त को शुरुआती कारोबार में बढ़त देखने को मिल रही है। COMEX पर, 12 अगस्त को सोने के वायदा भाव 0.35% बढ़कर $4,456.70 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी की कीमत 0.49% बढ़कर $65.25 प्रति औंस हो गई। सोने ने दिन के कारोबार में $4,457 प्रति औंस का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि चांदी $65.37 प्रति औंस तक पहुंच गई।
यह बढ़त ईरान, अमेरिका और यमन के हूथी विद्रोहियों से जुड़ी नई भू-राजनीतिक घटनाओं और उत्तर कोरिया द्वारा मिसाइल लॉन्च किए जाने के बीच बाजारों की प्रतिक्रिया के कारण हुई। इन घटनाओं ने सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग को बनाए रखा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं।
तेल की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी रहीं। अमेरिकी क्रूड 0.89% बढ़कर $83.94 प्रति बैरल हो गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 0.78% बढ़कर $89.60 प्रति बैरल हो गया। मंगलवार को दोनों बेंचमार्क $1 से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए थे और उन्होंने अपनी हालिया बढ़त को जारी रखा।
अमेरिकी CPI आंकड़ों पर नजर
निवेशक बुधवार (12 अगस्त) को आने वाले अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आंकड़ों का भी इंतजार कर रहे हैं। यह रिपोर्ट फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की दिशा के बारे में उम्मीदों को प्रभावित कर सकती है।
रॉयटर्स के एक सर्वेक्षण के अनुसार, जून में 0.4% की गिरावट के बाद जुलाई में अमेरिकी उपभोक्ता कीमतों में 0.1% की वृद्धि होने की उम्मीद है। सालाना महंगाई दर के 3.5% से घटकर 3.4% होने का अनुमान है।
महंगाई के ये आंकड़े अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच आ रहे हैं। उम्मीद से कम महंगाई दर आसान वित्तीय स्थितियों की उम्मीदों को बल दे सकती है, जबकि अधिक महंगाई दर सख्त नीति की चिंताओं को बढ़ा सकती है।
आमतौर पर सोने को कम ब्याज दरों की उम्मीदों से फायदा होता है क्योंकि इससे बिना रिटर्न देने वाली संपत्ति (non-yielding asset) को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) कम हो जाती है।
जियोपॉलिटिकल जोखिमों से मिला समर्थन
कीमती धातुओं को फिर से बढ़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितता से भी समर्थन मिला है। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर गतिरोध बना हुआ है, जबकि अमेरिका और यमन के ईरान-समर्थित हूतियों ने शिपिंग से जुड़े अलग-अलग हमलों की सूचना दी है। इन ताजा घटनाओं ने तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है और निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर किया है। हाल के दिनों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी आई है।
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, घरेलू बाज़ार में मंगलवार (11 अगस्त) को सोने की कीमतों में लगातार छठे दिन बढ़ोतरी हुई । सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। मंगलवार को घरेलू बाज़ार में चांदी की कीमत ₹2,000 बढ़कर ₹2.42 लाख प्रति किलोग्राम हो गई।
बाजार में पॉजिटिव माहौल के बावजूद, सोने की हालिया तेज़ी तकनीकी रूप से अब हद से ज़्यादा (stretched) बढ़ती हुई लग रही है।
बेस्पोक इन्वेस्टमेंट ग्रुप के अनुसार, अगस्त में गोल्ड फ़्यूचर्स में लगभग 8% की बढ़त हुई है। पिछले हफ़्ते सोने में 7.1% की साप्ताहिक बढ़त दर्ज की गई, जो जनवरी के बाद से सबसे ज़्यादा है।
बेस्पोक ने कहा कि सोना हाल ही में अपने 50-दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर चला गया है और 10 मार्च के बाद पहली बार 'ओवरबॉट' (ज़रूरत से ज़्यादा खरीद) वाले दायरे में आ गया है। शुक्रवार (7 अगस्त) को यह मेटल अपने 50-दिन के मूविंग एवरेज से एक पूरा स्टैंडर्ड डेविएशन ऊपर बंद हुआ, जिससे ऐसी रीडिंग के बिना चल रहा 103-ट्रेडिंग-दिनों का दौर खत्म हो गया।
बेस्पोक के ऐतिहासिक डेटा से पता चलता है कि 'ओवरबॉट' रीडिंग के बिना ऐसे लंबे दौर के बाद, सोने में अगले हफ़्ते, महीने और तीन महीनों में मामूली औसत गिरावट देखी गई है।इसका मतलब यह नहीं है कि सोने की कीमत गिरेगी ही, लेकिन यह अगस्त में आई जबरदस्त तेज़ी के बाद ज़्यादा उतार-चढ़ाव की संभावना की ओर इशारा करता है।
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