Gold Price: सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कभी दाम अचानक बढ़ जाते हैं, तो कभी तेजी से गिर जाते हैं। इस वजह से आम खरीदार और निवेशक दोनों ही असमंजस में हैं। अब इस पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुलकर बात की है और बताया है कि आखिर सोने के भाव इतने अस्थिर क्यों हो गए हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि इसकी सबसे बड़ी वजह ग्लोबल अनिश्चितता है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हालात लगातार बदल रहे हैं। इससे निवेशकों का भरोसा अलग-अलग देशों की करेंसी पर कमजोर हो रहा है। जब निवेशकों को करेंसी पर भरोसा नहीं रहता, तो वे सोने को सुरक्षित विकल्प मानकर उसकी तरफ रुख करते हैं। इसी वजह से सोने की मांग अचानक बढ़ती है और फिर मुनाफावसूली के चलते दाम गिर भी जाते हैं।
MCX और घरेलू बाजार का हाल
घरेलू बाजार में भी यही असर देखने को मिला है। MCX के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार को सोने के भाव में हल्की गिरावट दर्ज की गई। 10 ग्राम सोना करीब 280 रुपये सस्ता हुआ। यह गिरावट भले ही 1 फीसदी से कम रही, लेकिन इससे बाजार की अस्थिरता साफ दिखती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रोजाना के भाव अब ज्यादातर इंटरनेशनल ट्रेंड्स पर निर्भर कर गए हैं। इसी वजह से आम खरीदार फिलहाल वेट एंड वॉच की रणनीति अपना रहे हैं।
5 दिनों में 13% से ज्यादा गिरावट
बीते पांच दिनों में सोने के दामों में बड़ी गिरावट आई है। 29 जनवरी को जहां 10 ग्राम सोने का भाव 1.70 लाख रुपये से ऊपर था, वहीं अब यह करीब 1.40 लाख रुपये के आसपास आ गया है। यानी सिर्फ पांच दिन में सोना 13 फीसदी से ज्यादा सस्ता हो गया। जो लोग ऊंचे दाम पर खरीदारी कर चुके थे, उनके लिए यह झटका है। वहीं शादी या गहनों की खरीदारी करने वालों को अब कुछ राहत जरूर महसूस हो रही है।
बजट से जुड़े सवालों पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का फोकस लंबे पीरियड के निवेश पर है। उनका कहना है कि मजबूत निवेश से ही रोजगार पैदा होते हैं और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। सरकार उन सेक्टर्स को प्राथमिकता दे रही है, जो ज्यादा नौकरियां देते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि पब्लिक इन्वेस्टमेंट बढ़ाने के साथ-साथ सरकार राजकोषीय अनुशासन भी बनाए रखेगी। टारगेट यह है कि विकास सबको साथ लेकर हो और हर नागरिक देश की ग्रोथ का हिस्सा बने।
डेरिवेटिव मार्केट में STT बढ़ाने को लेकर भी वित्त मंत्री ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह कदम बिना समझे ट्रेडिंग करने वालों को रोकने के लिए है। सरकार नहीं चाहती कि छोटे निवेशक जुए जैसी ट्रेडिंग में फंसकर नुकसान उठाएं। इस फैसले का मकसद बाजार में स्थिरता बनाए रखना है।
डिसइन्वेस्टमेंट और आगे की राह
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि सरकारी कंपनियों में डिसइन्वेस्टमेंट प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे आम लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। सरकार का मानना है कि पारदर्शी नीतियों से लंबे समय में देश को फायदा मिलेगा।
आम कंज्यूमर के लिए क्या सीख
वित्त मंत्री ने साफ संकेत दिया कि सोने के दामों में उतार-चढ़ाव आगे भी रह सकता है। ग्लोबल हालात इसका बड़ा कारण हैं। ऐसे में आम निवेशकों और खरीदारों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। बाजार को समझकर, जरूरत और बजट के हिसाब से ही फैसला लेना बेहतर होगा।