Gold Price: सोना रिकॉर्ड हाई पर, अभी और बढ़ेगी चमक या आएगी बिकवाली की आंधी?

Gold Price: गोल्ड की चमक लगातार चटख होती जा रही है और यह रिकॉर्ड हाई लेवल पर बना हुआ है। जानिए गोल्ड की इस ताबड़तोड़ रैली की वजह क्या है और क्या यह नए मुकाम छुएगा? मार्केट एक्सपर्ट ने एक अहम लेवल बताया है जिसके नीचे आने पर मुनाफावसूली का दबाव दिख सकता है, चेक करें यह लेवल

अपडेटेड Dec 23, 2025 पर 9:30 AM
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Gold Price: बाजार के जानकारों का मानना है कि मैक्रोइकनॉमिक और टेक्निकल फैक्टर्स मिलकर गोल्ड को सपोर्ट कर रहे हैं और इसकी चमक बनी हुई है।

Gold Price: गोल्ड अपने रिकॉर्ड हाई के आस-पास लगातार बना हुआ है। मौद्रिक नीतियों में ढील यानी ब्याज दरों के नीचे आने की उम्मीदों, लगातार बनी जियो-पॉलिटिल अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों की स्थिर खरीदारी से गोल्ड को सपोर्ट मिल रहा है। आज की बात करें तो शुरुआती एशियाई कारोबार में स्पॉट गोल्ड प्रति औंस उछलकर $4,445.69 के भाव पर पहुंच गया जो इसके लिए रिकॉर्ड हाई लेवल है। यह चमक सेफ-हेवन एसेट्स को लेकर वैश्विक मांग बने रहने का संकेत है। वहीं घरेलू मार्केट में बात करें तो यहां भी सोना चढ़ा हुआ है। मार्केट के आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरट गोल्ड फिलहाल प्रति 10 ग्राम ₹1,36,160, 22 कैरट वाला गोल्ड ₹1,24,810 और 18 कैरट वाला गोल्ड 1,02,120 के भाव में बिक रहा है।

गोल्ड में क्यों बनी हुई है तेजी?

बाजार के जानकारों का मानना है कि मैक्रोइकनॉमिक और टेक्निकल फैक्टर्स मिलकर गोल्ड को सपोर्ट कर रहे हैं और इसकी चमक बनी हुई है। IBJA (इंडिया बूलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन) के वाइस प्रेसिडेंट अक्ष कंबोज का कहना है कि वैश्विक स्तर पर फैली अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बनी हुई है, इसके चलते गोल्ड को तगड़ा सपोर्ट मिल रहा है। गोल्ड रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया लेकिन फिर भी इसकी निवेश की मांग मजबूत बनी हुई है। फंड मैनेजरों का कहना है कि अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी से सोने के भाव को सपोर्ट मिल रहा है।


आगे क्या है रुझान?

घरेलू ब्रोकरेज फर्म कोटक म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति (Satish Dondapati) का कहना है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच मजबूत निवेश की मांग बनी हुई है जिसके चलते सोने के भाव रिकॉर्ड हाई लेवल के पास स्थिर बने हुए हैं। उनका कहना है कि महंगाई और करेंसी में उतार-चढ़ाव से हेज यानी बचाव के लिए गोल्ड एक अहम साधन बना हुआ है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि अगर जियो-पॉलिटिकल रिस्क कम होते हैं या अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है तो कुछ समय तक गोल्ड में मामूली उठा-पटक रह सकती है यानी यह कंसालिडेट फेज में जा सकता है।

टेक्निकल लेवल पर देखें तो ताबड़तोड़ तेजी के बाद अब एनालिस्ट्स को नियर टर्म में अब इसमें वोलैटिलिटी के आसार दिख रहे हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतिन त्रिवेदी (Jateen Trivedi) का कहना है कि अब गोल्ड ओवरबॉट जोन में जा चुका है और प्रति 10 ग्राम ₹1.34 लाख के नीचे जाने पर मुनाफावसूली दिख सकती है। जतिन के मुताबिक अपसाइड ₹1.37 लाख का लेवल रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल नए घरों की बिक्री, कोर पीसीई प्राइस इंडेक्स और वीकली जॉबलेस क्लेम जैसे अमेरिकी आंकड़े आने वाले हैं, जिस पर इस हफ्ते नजर रहेगी और ये गोल्ड की चाल तय करेंगे।

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