Gold-Silver ETF: गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में 19 फरवरी को तेजी दिखी। इसकी वजह सोने और चांदी की की कीमतों में उछाल है। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में करीब 11 बजे गोल्ड फ्यूचर्स (अप्रैल एक्सपायरी) 272 रुपये यानी 0.17 फीसदी की तेजी के साथ 1,56,033 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स (मार्च एक्सपायरी) 400 रुपये यानी 0.16 फीसदी की मजबूती के साथ 1,44,668 रुपये प्रति किलो चल रहा था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में स्थिरता दिखी। स्पॉट गोल्ड बगैर किसी खास उतार-चढ़ाव के 4,980 डॉलर प्रति औंस था। 18 फरवरी को गोल्ड 2 फीसदी चढ़ा था।
सिल्वर ईटीएफ में 4 फीसदी तक उछाल
Groww Silver ETF में 4 फीसदी से ज्यादा तेजी आई। UTI Silver ETF, Axis Silver ETF, HDFC Silver ETF, 360 ONE Silver ETF, Motilal Oswal Silver ETF, DSP Silver ETF, Mirae Asset Silver ETF, SBI Silver ETF, Aditya Birla Sun Life Silver ETF और ICICI Prudential Silver ETF में सुबह 9:40 बजे करीब 4 फीसदी का उछाल था।
गोल्ड ईटीएफ में 2 फीसदी का उछाल
गोल्ड ईटीएफ में मोतीलाल ओसवाल गोल्ड ईटीएफ और Groww Gold ETF में 2-2 फीसदी की तेजी देखने को मिली। Birla Sun Life Gold ETF, SBI Gold ETF, Zerodha Gold ETF, UTI MF Gold ETF, HDFC Gold ETF, Nippon India Gold ETF और ICICI Prudential Gold ETF में भी करीब 2 फीसदी की तेजी थी। सिल्वर और गोल्ड ईटीएफ में तेजी से निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।
फिलहाल गोल्ड में दिख सकती है कमजोरी
एलकेपी सिक्योरिटीज में वीपी रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी एंड करेंसी) जतिन त्रिवेदी ने कहा कि ओवरऑल स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर दिख रहा है, क्योंकि गोल्ड में लोअर हाई और लोअर लो का ट्रेंड है। उन्होंने कहा, "शॉर्ट टर्म में कमजोरी से बाहर निकलने के लिए CME पर गोल्ड का 5,000 डॉलर से ऊपर निर्णायक रूप से बंद होना जरूरी है। इसके बाद गोल्ड में तेजी दिख सकती है।" उन्होंने कहा कि फेडरल रिजर्व के मिनट्स जारी होने वाले हैं। इसका असर गोल्ड पर दिख सकता है। गोल्ड पर 1,48,000 रुपये पर सपोर्ट है। 1,55,000 रुपये पर रेसिस्टेंस है।
कीमतों में उतार-चढ़ाव की सबसे बड़ी वजह
चॉइस ब्रोकिंग में कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर माकडा ने कहा कि नए चंद्र वर्ष (Lunar New Year) के मौके पर शंघाई गोल्ड एक्सचेंज (SGE) जैसे बड़े हब में हफ्ते भर की छुट्टी है। इससे ग्लोबल बुलियन मार्केट में 'लिक्विडिटी वैकुम' यानी लिक्विडिटी की कमी की स्थिति बनी है। दुनिया में सबसे बड़े फिजिकल बायर्स के ऑफलाइन हो जाने से ट्रेडिंग वॉल्यूम में कमी आई है। इस वजह से कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव दिख रहा है।
अभी बुलियन में ट्रेडिंग से बचने की सलाह
उन्होंने कहा कि आम तौर पर हॉलिडे से पहले चीन की तरफ से खरीदारी का दबाव कम होने से प्राइस करेक्शन दिखता है। पहले पोजीशन लेने वाले ट्रेडर्स प्रॉफिट-बुकिंग करते हैं। इससे कीमतों में नरमी आती है। इस दौरान सोने के मुकाबले सिल्वर में ज्यादा कमजोरी दिखती है। छुट्टियों के दौरान चीन में सिल्वर की मैन्युफैक्चरिंग डिमांड घट जाती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जो स्थिति है, उसे देखते हुए ट्रेडर्स को बुलियन में ट्रेडिंग से बचना चाहिए।