ETF or EGR : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से गैर जरूरी सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की है। इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार सोने को खराब निवेश मान रही है। असल चिंता भारत के ट्रेड डेफिसिट और रुपये पर बढ़ते दबाव को लेकर है।
ETF or EGR : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से गैर जरूरी सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की है। इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार सोने को खराब निवेश मान रही है। असल चिंता भारत के ट्रेड डेफिसिट और रुपये पर बढ़ते दबाव को लेकर है।
भारत अपना ज्यादातर सोना डॉलर में आयात करता है। ऐसे में जब सोने का आयात बहुत बढ़ता है, तो देश से ज्यादा डॉलर बाहर जाते हैं और रुपये पर दबाव बढ़ जाता है, खासकर तब जब कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंची हों। सीआर फॉरेक्स के फाउंडर और CEO अमित पाबरी का कहना है कि इस अपील से भारत में सोने की कुल मांग पर ज्यादा असर पड़ने वाला नहीं है।
भारत के घरों में पहले से बहुत सोना मौजूद
ऑगमोंट की रिसर्च हेड डॉ. रेणिशा चैनानी के मुताबिक भारत के घरों में करीब 30,000 टन सोना मौजूद है, जो दुनिया का सबसे बड़ा निजी गोल्ड स्टॉक माना जाता है। उनका कहना है कि अगर इसमें से सिर्फ 1 प्रतिशत सोना भी रीसायकल हो जाए, तो करीब 300 टन सालाना आयात की जरूरत कम हो सकती है। इससे भारत अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तरीके से सोने में निवेश करने पर निवेशकों को सोने की कीमत बढ़ने का फायदा भी मिलता है और देश पर अतिरिक्त आयात का दबाव भी नहीं पड़ता।
डिजिटल गोल्ड की तरफ बढ़ रहे निवेशक
अब निवेशकों का रुझान धीरे धीरे फिजिकल गोल्ड से हटकर फाइनेंशियल गोल्ड की तरफ जा रहा है। लोग गोल्ड ETF और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी EGR जैसे विकल्पों में निवेश बढ़ा रहे हैं। इन दोनों में निवेशक को सोने की कीमत का फायदा मिलता है, बस सोना रखने का तरीका अलग होता है।
वेंचुरा के कमोडिटी और CRM हेड एनएस रामास्वामी का कहना है कि गोल्ड ETF और EGR जैसे डिजिटल विकल्प आगे भी लोकप्रिय रहेंगे। उनके मुताबिक EGR को फिजिकल गोल्ड में बदलना गोल्ड ETF की तुलना में ज्यादा आकर्षक माना जा रहा है, क्योंकि EGR सीधे वॉल्ट में रखे असली सोने से जुड़ा होता है। इसमें GST सिर्फ तब लगता है, जब निवेशक फिजिकल डिलीवरी लेते हैं।
उन्होंने कहा कि ETF और EGR दोनों ही 'फाइनेंशियलाइज्ड गोल्ड' हैं। इससे लोगों को घर में ज्यादा सोना जमा करने की जरूरत कम पड़ती है। साथ ही दोनों SEBI रेगुलेटेड हैं, इसलिए इन्हें अनरेगुलेटेड डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म्स की तुलना में ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
RBI भी लगातार बढ़ा रहा है गोल्ड रिजर्व
अमित पाबरी का कहना है कि लंबे समय के नजरिए से सोने में तेजी का ट्रेंड अभी भी बना हुआ है। दुनियाभर के सेंट्रल बैंक, जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI भी शामिल है, डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार सोना खरीद रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच RBI ने 104 मीट्रिक टन से ज्यादा सोना भारत वापस मंगवाया। यह दिखाता है कि RBI अब भी सोने को रणनीतिक रूप से अहम मानता है। पाबरी के मुताबिक भारतीय निवेशकों के लिए सोना अभी भी एक मजबूत हेज बना हुआ है। जब भी रुपये में कमजोरी आती है या वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो घरेलू बाजार में सोने की कीमतें अक्सर ऊपर चली जाती हैं।
UPI से गोल्ड खरीद तेजी से बढ़ी
2026 की पहली तिमाही में UPI के जरिए गोल्ड ट्रांजैक्शन सालाना आधार पर लगभग चार गुना बढ़कर 70 अरब रुपये पहुंच गए। वहीं रीसायकल स्क्रैप सप्लाई में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
डॉ. रेणिशा चैनानी का कहना है कि भारत की गोल्ड समस्या का समाधान लोगों को सोना खरीदने से रोकना नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद सोने को रीसायकल करना और ऐसे विकल्पों में निवेश बढ़ाना है, जिनसे नए आयात की जरूरत कम हो।
निवेशकों के लिए क्या बेहतर है
रामास्वामी के मुताबिक अगर किसी निवेशक को फिजिकल गोल्ड की जरूरत नहीं है, तो गोल्ड ETF सोने की कीमतों से फायदा कमाने का आसान और लिक्विड तरीका है। उनका कहना है कि घरेलू रिटेल मांग में बड़ी गिरावट आने की संभावना नहीं है, क्योंकि निवेशक हर गिरावट पर सोना खरीदने का मौका तलाशते रहते हैं।
अमित पाबरी का कहना है कि निवेशकों को गोल्ड ETF और EGR के बीच चुनाव करते समय सिर्फ मांग पर नहीं, बल्कि लिक्विडिटी, टैक्सेशन, ट्रेडिंग में आसानी और निवेश की सुविधा जैसे पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए।
क्या सोना खरीदना कम कर देंगे लोग?
पीएल कैपिटल के रिटेल ब्रोकिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन CEO और डायरेक्टर संदीप रायचुरा के मुताबिक गोल्ड ETF अभी भी सोने में निवेश का सबसे आसान और निवेशक फ्रेंडली तरीका है। इसमें लिक्विडिटी, पारदर्शिता और आसान टैक्स व्यवस्था मिलती है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को फिजिकल गोल्ड की जरूरत नहीं है, उनके लिए ETF कम झंझट वाला और सुविधाजनक विकल्प है। जरूरत पड़ने पर इसे फिजिकल गोल्ड में भी बदला जा सकता है। अमित पाबरी के मुताबिक लोग सोना खरीदना बंद नहीं करेंगे, लेकिन अब उसका तरीका तेजी से डिजिटल और फाइनेंशियल रूप लेता जाएगा।
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