गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, अब रिसाइकल सोना खरीदने में ज्यादा फायदा; समझ लीजिए पूरा हिसाब

गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी 15 फीसदी होने के बाद नया सोना खरीदना काफी महंगा हो सकता है। ऐसे में पुराने गहनों को एक्सचेंज कर नई ज्वेलरी लेना ज्यादा किफायती विकल्प बन रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इससे ग्राहकों की हजारों रुपये तक की बचत हो सकती है। समझिए पूरा कैलकुलेशन।

अपडेटेड May 13, 2026 पर 5:11 PM
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सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी है।

सरकार ने सोना, चांदी और दूसरे कीमती धातुओं पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी है। इसका असर ज्वेलरी बाजार में दिखने लगा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे गोल्ड ज्वेलरी और गोल्ड कॉइन की बिक्री में तेज गिरावट आ सकती है। लेकिन, पुराने सोने को एक्सचेंज करने का ट्रेंड तेजी से बढ़ सकता है।

दिल्ली के पुराने ज्वेलरी बाजार दरीबा कलां में इसका असर भी दिखने लगा है। मार्केट एसोसिएशन के ट्रेजरर और Radhey Kishan Gopal Kishan Jewellers के मालिक गौरव गुप्ता ने कहा कि पिछले दो दिनों में ज्वेलरी और गोल्ड कॉइन की मांग करीब 25 फीसदी तक घट गई है। उनके मुताबिक इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिससे मांग पर और दबाव पड़ सकता है।

रिसाइक्लिंग गोल्ड पर कितनी बचत?


सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी है। यानी अब विदेश से आने वाला नया सोना पहले के मुकाबले काफी महंगा पड़ेगा। इसका सीधा असर ज्वेलरी की कीमतों पर भी दिख सकता है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि सिर्फ ड्यूटी बढ़ने की वजह से 10 ग्राम सोना करीब 13,000 से 14,000 रुपये तक महंगा हो सकता है।

अब मान लीजिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से 10 ग्राम सोने की बेस कीमत 1.40 लाख रुपये है। पहले 6 फीसदी ड्यूटी लगने पर इसमें करीब 8,400 रुपये जुड़ते थे। लेकिन अब 15 फीसदी ड्यूटी लगने पर करीब 21,000 रुपये जुड़ेंगे। यानी सिर्फ टैक्स बढ़ने की वजह से करीब 12,000 से 13,000 रुपये का अतिरिक्त असर पड़ सकता है। इसके ऊपर GST और मेकिंग चार्ज अलग से लगते हैं।

अब अगर कोई ग्राहक पुराना सोना एक्सचेंज करके नई ज्वेलरी लेता है, तो उसे पूरे नए आयातित गोल्ड का खर्च नहीं उठाना पड़ता। उदाहरण के तौर पर अगर आपके पास 50 ग्राम पुरानी ज्वेलरी है, तो ज्वेलर उसी गोल्ड को पिघलाकर नई डिजाइन बना सकता है। ऐसे में ग्राहक को सिर्फ मेकिंग चार्ज, थोड़ा बहुत वेस्टेज और अगर वजन बढ़ा है तो उतने अतिरिक्त गोल्ड का पैसा देना पड़ता है।

यही वजह है कि रिसाइकल या एक्सचेंज गोल्ड मॉडल में ग्राहक हजारों रुपये बचा सकता है। खासकर मौजूदा समय में, जब गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी 15 फीसदी हो चुकी है, तब पुराना सोना एक्सचेंज करना नए सोने की सीधी खरीदारी से काफी किफायती विकल्प बन सकता है।

पुराने सोने का एक्सचेंज बढ़ सकता है

Dhirsons Jewellers के डायरेक्टर राघव धीर ने कहा कि यह बड़ा नीतिगत बदलाव है, जिससे सप्लाई चेन की लागत बढ़ेगी। लेकिन इससे ग्राहकों को यह सोचने का मौका भी मिलेगा कि वे गोल्ड को किस तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अब ग्राहकों के लिए घर में पड़ा पुराना सोना एक्सचेंज कर नई ज्वेलरी लेना ज्यादा समझदारी वाला विकल्प बन सकता है।

पुणे की PNG Sons के डायरेक्टर और CEO अमित मोडक का कहना है कि नई ड्यूटी ज्वेलर्स के पास मौजूद पुराने स्टॉक और ग्राहकों के पुराने सोने की वैल्यू भी बढ़ जाएगी। ऐसे माहौल में पुराने गोल्ड के एक्सचेंज और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा मिल सकता है।

सोना 13,500 रुपये तक महंगा हो सकता है

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया ने कहा कि नई ड्यूटी के बाद सोना करीब 9 फीसदी महंगा हो सकता है।

उन्होंने अनुमान जताया कि इससे प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत में करीब 13,500 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके चलते अप्रैल-जून तिमाही में गोल्ड इंपोर्ट और ज्वेलरी डिमांड दोनों में तेज गिरावट आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अब ज्यादा ग्राहक पुराने सोने को बेचकर या एक्सचेंज करके नई ज्वेलरी खरीदने की तरफ बढ़ सकते हैं।

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