Gold Import Falls: इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा तो एक तिहाई रह गया गोल्ड का आयात, बैंक नहीं मंगा सकते बाहर से सोना!

Gold News: सरकार ने कुछ समय पहले गोल्ड का आयात महंगा कर दिया था। अब सामने आ रहा है कि मासिक आधार पर इसका आयात तेजी से नीचे गिरा है। एक और अहम बात सामने आया है कि बैंकों को नहीं बल्कि सिर्फ तीन एजेंसियों को ही इसे आयात करने की मंजूरी मिली है। डिटेल्स में पढ़ें

अपडेटेड Jun 18, 2026 पर 2:09 PM
Gold Import Falls: पहले जहां देश में हर महीने 75-100 टन गोल्ड का आयात किया जाता था, वहीं अब यह घटकर 25-30 टन प्रति माह रह गया है।

Gold News: गोल्ड का आयात महंगा होने का असर दिखने लगा है और इसका आयात तेजी से नीचे गिरा है। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों से मिली है। जानकारी के मुताबिक एक सीनियर गवर्नमेंट ऑफिशियल ने बताया कि सोने पर आयात शुल्क यानी इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद भारत का मासिक सोना आयात काफी घट गया है। पहले जहां देश में हर महीने 75-100 टन गोल्ड का आयात किया जाता था, वहीं अब यह घटकर 25-30 टन प्रति माह रह गया है। सूत्र ने यह भी बताया कि 1 अप्रैल 2026 से कस्टम विभाग ने बैंकों को गोल्ड के डेजिनेटेड इंपोर्टर्स के रूप में नोटिफाई नहीं किया है। इसके अलावा अब देश में एमएमटीसी समेत सिर्फ तीन एजेंसियों को ही देश में सोना आयात करने की मंजूरी है।

कितना बढ़ाई गई है Gold पर इंपोर्ट ड्यूटी

हाल ही में सरकार ने गोल्ड पर प्रभावी आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। इसमें बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को 5% से बढ़ाकर 10% किया गया है तो एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को 1% से बढ़ाकर 5% किया गया और इस प्रक्रार गोल्ड पर कुल प्रभावी आयात शुल्क 6% से बढ़कर 15% हो गया। यह फैसला अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे जंग के बीच वैश्विक स्तर पर मचे उथल-पुथल के बीच सोने के आयात को कम करने, फोरेक्स रिजर्व पर दबाव कम करने, रुपये को सपोर्ट देने और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया।


आयात घटने से क्या हो सकता है असर?

गोल्ड के आयात पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने का असर दिखने लगा है। इसका मासिक आयात तेजी से नीचे आया है। ऐसे में अब घरेलू मार्केट में इसकी उपलब्धता पर असर दिख सकता है। हालांकि ऐसा भी हो सकता है, अगर घरेलू मार्केट में मांग मजबूत होती है और आयात कम रहती है तो इसके भाव इंटरनेशनल मार्केट की तुलना में अधिक हो सकते हैं। हालांकि गोल्ड का आयात कम होने से ट्रेड डेफेसिट के मोर्चे पर सरकार को राहत मिल सकती है क्योंकि इसका आयात देश के आयात बिल का एक बड़ा हिस्सा है।

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