Gold Price: 2025 में करीब 65% की जोरदार तेजी दिखाने वाला सोना 2026 में अब तक ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया है। साल की शुरुआत के मुकाबले कीमतें लगभग उसी स्तर के आसपास हैं। हालांकि बीच-बीच में उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिला है।
Gold Price: 2025 में करीब 65% की जोरदार तेजी दिखाने वाला सोना 2026 में अब तक ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया है। साल की शुरुआत के मुकाबले कीमतें लगभग उसी स्तर के आसपास हैं। हालांकि बीच-बीच में उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिला है।
इसके बावजूद दिग्गज इनवेस्टमेंट बैंक JP Morgan सोने को लेकर काफी पॉजिटिव है। बैंक का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही तक सोना औसतन 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। वहीं 2027 के अंत तक इसकी कीमत 6,300 डॉलर प्रति औंस के आसपास जा सकती है। मौजूदा स्तर से देखें तो यह करीब 40% की संभावित तेजी है।
2026 में सोने की रफ्तार क्यों थम गई?
इस साल सोने के लिए सबसे बड़ी चुनौती ईरान से जुड़ा तनाव और उसके बाद के घटनाक्रम रहे। फरवरी के आखिर से सोने की कीमतों में करीब 20% की गिरावट आ चुकी है।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव से कच्चे तेल की कीमतें उछल गई थीं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की चिंता भी बढ़ी। इसके बाद बाजार को लगने लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है।
सोना ब्याज नहीं देता। ऐसे में जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशकों का रुझान बॉन्ड और दूसरी ब्याज देने वाली एसेट्स की तरफ बढ़ जाता है। यही वजह है कि सोने पर दबाव बना रहा। इसके अलावा फेड की नीतियां, डॉलर की मजबूती, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीद जैसे कई फैक्टर्स भी सोने को सीमित दायरे में बांधे हुए हैं।
टेक्निकल तस्वीर क्या कहती है?
JP Morgan के मुताबिक सोना फिलहाल दो अहम स्तरों के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ 200-डे मूविंग एवरेज का मजबूत सपोर्ट है। दूसरी तरफ 50-डे मूविंग एवरेज के आसपास रेजिस्टेंस बना हुआ है।
यही वजह है कि फिलहाल कई निवेशक 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपनाए हुए हैं। बाजार यह देखना चाहता है कि सोना इन स्तरों से किस दिशा में निकलता है।
फिर इतनी तेजी की उम्मीद क्यों?
बैंक का मानना है कि लंबी अवधि में कई ऐसे फैक्टर्स हैं, जो सोने को सहारा दे सकते हैं। महंगाई लंबे समय तक ऊंची रह सकती है। डॉलर की खरीद क्षमता कमजोर पड़ सकती है। अमेरिका की वित्तीय चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव और ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। अमेरिकी नीतियों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
इन सभी वजहों से सोने को सहारा मिल सकता है। इसके अलावा दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। यह भी सोने की कीमतों के लिए बड़ा सपोर्ट माना जा रहा है।
ईरान शांति समझौता बन सकता है बड़ा ट्रिगर
कम समय में सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता हो सकता है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है तो तेल और डॉलर दोनों पर दबाव आ सकता है। आमतौर पर कमजोर डॉलर को सोने के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि इससे दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना सस्ता हो जाता है।
हालांकि अगर समझौता सफल नहीं होता या तनाव फिर बढ़ता है, तो बाजार की दिशा तेजी से बदल सकती है।
भारतीय बाजार में सोना कहां तक जा सकता है?
भारतीय निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर JP Morgan का अनुमान सही साबित होता है तो घरेलू बाजार में सोना कितना महंगा हो सकता है।
फिलहाल MCX पर सोना करीब 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। JP Morgan का 6,000 डॉलर प्रति औंस का टारेगच मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों से करीब 40% ऊपर है। अगर सोने में इतनी ही तेजी आती है, तो भारतीय बाजार में इसकी कीमत करीब 2.13 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है।
आगे निवेशकों को क्या करना चाहिए?
JP Morgan का मानना है कि सोने में बड़ी तेजी की संभावना 2026 की दूसरी छमाही में बन सकती है। हालांकि कई एक्सपर्ट्स निवेशकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि पहले तकनीकी संकेतों का इंतजार करना बेहतर रहेगा।
अगर केंद्रीय बैंक सोने की खरीद जारी रखते हैं, तो कीमतों को सहारा मिल सकता है। ऐसे में निवेशक भी तेजी से गोल्ड का रुख कर सकते हैं।
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