Gold Price Crash: एक दिन में 5000 रुपये फिसला सोना, इन 3 वजहों से दुनियाभर में सोना धड़ाम

एमसीएक्स में शाम के सत्र में रात 10 बजे के करीब सोना 5,000 रुपये से ज्यादा यानी 3.59 फीसदी गिरकर 1,34850 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि देश और विदेश में सोने में पिछले कुछ हफ्तों में तेजी दिखी थी, उससे मुनाफावसूली की उम्मीद की जा रही थी

अपडेटेड Dec 29, 2025 पर 10:23 PM
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स्पॉट गोल्ड 3.6 फीसदी गिरकर 4,367.97 डॉलर पर आ गया। 26 दिसंबर को सोना 4,549.71 डॉलर प्रति औंस की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था।

सोने की कीमतें 29 दिसंबर को क्रैश कर गई। देश से लेकर विदेश में सोने में गिरावट आई। स्पॉट गोल्ड 3.6 फीसदी गिरकर 4,367.97 डॉलर पर आ गया। 26 दिसंबर को सोना 4,549.71 डॉलर प्रति औंस की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स भी 3.6 फीसदी गिरकर 4,387.40 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। खास बात यह रही की सोने के अलावा चांदी, प्लैटिनम और कॉपर में भी गिरावट आई।

साल के अंत में दुनियाभर में मुनाफावसूली

इंडिया में गोल्ड फ्यूचर्स में भी बड़ी गिरावट दिखी। एमसीएक्स में शाम के सत्र में रात 10 बजे के करीब सोना 5,000 रुपये से ज्यादा यानी 3.59 फीसदी गिरकर 1,34850 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि देश और विदेश में सोने में पिछले कुछ हफ्तों में तेजी दिखी थी, उससे मुनाफावसूली की उम्मीद की जा रही थी। साल के अंत में ऊंची कीमतों पर निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों में बड़ी गिरावट आई।


जियोपॉलिटिकल टेंशन घटने का असर

जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी आने की उम्मीद से भी सोने पर दबाव बढ़ा है। खबर है कि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच फ्लोरिडा में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की बातचीत में रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने को लेकर सहमति बन गई है। सोने को निवेश का सबसे सुरक्षित जरिया माना जाता है। दुनिया में उथल-पुथल बढ़ने पर सोने की चमक बढ़ जाती है। इसके उलट उथल-पुथल कम होने पर इसकी चमक घट जाती है।

गोल्ड की कीमतें ओवरबॉट जोन में पहुंच गई थीं

कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड की कीमतें अपने फंडामेंटल्स से आगे निकल गई थीं। गोल्ड की कीमतें 4,600 डॉलर प्रति औंस की तरफ बढ़ रही थी। इसका मतलब है कि गोल्ड ओवरबॉट टेरीटरी में पहुंच गया था। इस लेवल पर इसकी कीमतों का टिके रहना मुमकिन नहीं था। हालांकि, कुछ समय तक कंसॉलिडेशन के बाद इसकी कीमतों में फिर से मजबूती दिख सकती है। लेकिन, फिलहाल कीमतों में कंसॉलिडेशन जारी रहने की उम्मीद है।

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आपको क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनवेस्टर्स को गोल्ड में आई गिरावट से परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपने एसेट ऐलोकेशन पर फोकस बनाए रखना चाहिए। पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी 10 फीसदी तक रखी जा सकती है। अगर कीमतों में आई तेजी की वजह से पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी 10 फीसदी से ज्यादा हो गई है तो वह पोर्टफोलियो को बैलेंस करने के लिए गोल्ड में थोड़ी बिकवाली कर सकता है।

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