Gold Price Forecast: अगले साल सोना सस्ता होगा या महंगा? इस रिपोर्ट से मिल गया जवाब
Gold Price Forecast: सोना अगले साल कितना महंगा हो सकता है? ICICI Bank की नई रिपोर्ट में 2027 के लिए बड़ा अनुमान दिया गया है। हालांकि ऊंची कीमतों के बीच मांग कमजोर पड़ रही है। जानिए किन वजहों से सोने में तेजी जारी रह सकती है या गिरावट आ सकती है।
घरेलू बाजार में सोना इस साल अब तक करीब 20% महंगा हो चुका है।
Gold Price Forecast: घरेलू बाजार में सोने की कीमतें आने वाले समय में ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। ICICI Bank Global Markets की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2026 के बाकी महीनों में सोना 1.50 लाख रुपये से 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर सकता है। वहीं 2027 में इसकी कीमत 1.60 लाख रुपये से 1.90 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में जारी तेजी और रुपये की लगातार कमजोरी घरेलू बाजार में सोने को सहारा दे सकती है।
इस साल अब तक 20% चढ़ चुका है सोना
रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू बाजार में सोना इस साल अब तक करीब 20% महंगा हो चुका है। इसके पीछे कई वजहें हैं। रुपये में अब तक लगभग 7% की कमजोरी आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें बढ़ी हैं। इसके अलावा हाल में बढ़ाई गई कस्टम ड्यूटी का असर भी सीधे घरेलू कीमतों पर पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार 13 मई 2026 से सोने पर कस्टम ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी गई है। इसका पूरा असर अभी बाजार में नहीं दिखा है। इसलिए निकट भविष्य में सोने में 2-3% की अतिरिक्त तेजी और देखने को मिल सकती है।
किस आधार पर लगाया गया है अनुमान?
ICICI Bank Global Markets ने अपने अनुमान में 2026 के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये का औसत एक्सचेंज रेट 96 रुपये और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की औसत कीमत 4,700 डॉलर प्रति औंस मानी है।
वहीं 2027 के लिए डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट का औसत 96.50 रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। इसी आधार पर घरेलू बाजार में सोने के संभावित दाम का आकलन किया गया है।
किन वजहों से कमजोर पड़ सकती है तेजी?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सोने की कीमतों का यह अनुमान पूरी तरह तय नहीं है। अगर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को और सख्त करने का फैसला करता है और वैश्विक बाजार में सोने की तेजी उम्मीद से कम रहती है, तो 2027 तक कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
यानी आगे सोने का रुख काफी हद तक अमेरिकी ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगा।
ऊंचे दाम से घट रही है खरीदारी
भारत में अप्रैल 2026 के दौरान सोने के आयात मूल्य में सालाना आधार पर 81% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि इसका मुख्य कारण कीमतों में आई तेजी थी।
वास्तविक मांग में नरमी दिखाई दी है। मार्च और अप्रैल के दौरान भारत ने औसतन करीब 30 टन सोना आयात किया, जबकि 2025 में मासिक औसत आयात लगभग 50 टन था। इससे संकेत मिलता है कि ऊंचे दामों की वजह से ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं या कम मात्रा में खरीद रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या हो रहा है?
रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 65% की जोरदार तेजी के बाद 2026 में अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगभग 5% की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि 28 फरवरी 2026 को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद सोने की कीमतों में करीब 15% की गिरावट भी दर्ज की गई। इसकी बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती रही।
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका कच्चे तेल का शुद्ध निर्यातक देश है। इसलिए पश्चिम एशिया संकट का असर उसकी अर्थव्यवस्था पर अपेक्षाकृत कम पड़ता है। ऐसे समय में निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में डॉलर की ओर रुख करते हैं, जिससे सोने जैसी दूसरी परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ जाता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी दे रही सहारा
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में आभूषणों की मांग 23% घटी और निवेश मांग में 5% की कमी आई। गोल्ड ETF में कम निवेश भी इसकी एक वजह रहा।
इसके बावजूद केंद्रीय बैंकों की सोना खरीद 2% बढ़ी। इसी कारण कुल सोना मांग में 2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट का मानना है कि यह संकेत देता है कि सोने को समर्थन देने वाले दीर्घकालिक कारक अभी भी मजबूत बने हुए हैं।
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