Gold Prices: 2025 में 65% चढ़ा सोना, 2026 में भी क्यों है तेजी की उम्मीद? फंड मैनेजर्स ने बताई वजह

Gold Prices: 2025 में 65 प्रतिशत की रिकॉर्ड तेजी के बाद भी फंड मैनेजर्स सोने को लेकर बुलिश हैं। उनका कहना है कि कई ऐसे बड़े फैक्टर हैं, जो 2026 में भी सोने को सपोर्ट दे सकते हैं। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Jan 11, 2026 पर 5:05 PM
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2025 में सोना करीब 65 प्रतिशत चढ़ा, जो लगभग आधी सदी में इसका सबसे मजबूत प्रदर्शन रहा।

Gold Prices: सोने की कीमतों में 2025 के दौरान ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। ऐसे में काफी कम निवेशक ये उम्मीद कर रहे हैं कि 2026 में सोना वैसी ही दोबारा छलांग लगाएगा। इसके बावजूद दुनिया के कई बड़े मनी मैनेजर्स अब भी सोने को लेकर पॉजिटिव हैं। उनका मानना है कि जिन फैक्टर्स ने सोने को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाया, वे अब भी बने हुए हैं और आगे भी सपोर्ट देते रहेंगे।

2025 में सोने ने क्यों बनाया इतिहास

2025 में सोना करीब 65 प्रतिशत चढ़ा, जो लगभग आधी सदी में इसका सबसे मजबूत प्रदर्शन रहा। खुदरा और संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी ने इस तेजी को हवा दी।


गिरती ब्याज दरें, भू-राजनीतिक तनाव और फिस्कल अनिश्चितताओं जैसे तमाम पॉजिटिव फैक्टर्स एक साथ आए। नतीजा यह रहा कि सोना 1980 से चला आ रहा इंफ्लेशन-एडजस्टेड रिकॉर्ड भी पार कर गया।

 1. गोल्ड लोन क्या है? गोल्ड लोन में आपको अपना सोना गिरवी रखकर बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से पैसा मिलता है। आमतौर पर 75-80% तक लोन गोल्ड के वैल्यू पर दिया जाता है। लोन पूरा चुकाने के बाद सोना वापस मिल जाता है। यह सिक्योर्ड लोन है।

बड़े फंड मैनेजर्स का भरोसा क्यों बरकरार

Bloomberg ने दर्जनों मनी मैनेजर्स से बात की, जिनकी फर्में मिलकर ट्रिलियंस डॉलर की एसेट संभालती हैं। ज्यादातर ने कहा कि उन्होंने सोने में मुनाफा काटने की बजाय अपनी होल्डिंग बनाए रखी है।

Fidelity International के पोर्टफोलियो मैनेजर इयान सैमसन (Ian Samson) का कहना है कि 2026 में भी सोने में तेजी की उम्मीद है। उन्होंने अक्टूबर की तेज रैली के दौरान कुछ हिस्सेदारी घटाई थी, लेकिन बाद में फिर से पोजीशन बढ़ा ली। उनके मुताबिक सेंट्रल बैंक की खरीद, गिरती ब्याज दरें और ऊंचे फिस्कल डेफिसिट अब भी मजबूत सपोर्ट हैं।

फिएट करेंसी पर भरोसा कमजोर, सोना मजबूत

निवेशकों का कहना है कि विकसित देशों की करेंसी पर भरोसा कमजोर होना सोने के पक्ष में एक बड़ा कारण है। सेंट्रल बैंकों की स्वतंत्रता पर सवाल, बढ़ता सरकारी कर्ज और राजनीतिक खींचतान ने इस सोच को और मजबूत किया है।

Morgan Stanley में चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर माइक विल्सन (Mike Wilson) के मुताबिक, सोना अब 'एंटी-फिएट करेंसी प्ले' बन चुका है। 2025 के आखिरी महीनों में यह सोच और मुख्यधारा में आ गई।

विल्सन पोर्टफोलियो में 20 प्रतिशत रियल एसेट्स रखने की सलाह देते हैं, जिसमें सोना भी शामिल है। उनका मानना है कि दुनिया में कहीं भी फिस्कल अनुशासन नजर नहीं आ रहा और यही सोने के लिए सबसे बड़ा सपोर्ट है।

 3. गोल्ड लोन की खासियत गोल्ड लोन का फायदा यह है कि इसमें पैसों के इस्तेमाल पर कोई रोक-टोक नहीं होती। बैंक और NBFC इसे जल्दी अप्रूव कर देते हैं। आपका क्रेडिट स्कोर कमजोर हो तो भी गोल्ड लोन आसानी से मिल जाता है।

2026 में क्या रणनीति अपना रहे फंड हाउस

DWS Group के कमोडिटीज हेड डारवेई कुंग (Darwei Kung) का कहना है कि उनकी फर्म ने सोने में सामान्य से थोड़ी ज्यादा हिस्सेदारी रखी है और 2026 तक इसे बनाए रखने का इरादा है। उन्हें साल के अंत तक सीमित लेकिन स्थिर बढ़त की उम्मीद है।

UBS Asset Management के मास्सिमिलियानो कास्टेली (Massimiliano Castelli) के मुताबिक, पेंशन और इंश्योरेंस फंड्स ने 2025 में सोने में दिलचस्पी बढ़ाई। कुछ फंड्स ने पहली बार अपने पोर्टफोलियो का करीब 5 प्रतिशत सोने में लगाया।

इतिहास क्या चेतावनी देता है

इतिहास यह भी बताता है कि बड़ी रैलियों के बाद सोने में लंबे समय तक सुस्ती आ सकती है। 2011 में सोना 1,921 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड पर पहुंचा था, लेकिन वहां लौटने में नौ साल लगे। 1979 की तेज उछाल के बाद भी लंबा बेयर फेज देखा गया था।

इसके बावजूद अमेरिका में सोना अब भी कम पोर्टफोलियो में है। Goldman Sachs के मुताबिक, गोल्ड ETF अमेरिकी निजी वित्तीय पोर्टफोलियो का सिर्फ 0.17 प्रतिशत हिस्सा हैं। बैंक का अनुमान है कि पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा हर 0.01 प्रतिशत बढ़ने पर कीमतों में करीब 1.4 प्रतिशत का उछाल आ सकता है।

 7. ब्याज दरों की तुलना गोल्ड लोन पर ब्याज दरें आमतौर पर 7.7% सालाना से शुरू होती हैं। पर्सनल लोन पर यह दर 8.5% से 13.6% तक हो सकती है। यानी ब्याज के मामले में गोल्ड लोन अपेक्षाकृत सस्ता पड़ सकता है।

सेंट्रल बैंक क्यों बने सबसे बड़े सपोर्ट

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि 2026 में सेंट्रल बैंक हर महीने करीब 80 टन सोना खरीद सकते हैं। 2022 के बाद यह खरीदारी तेज हुई, जब रूस के विदेशी मुद्रा भंडार फ्रीज होने से सोने की अहमियत और बढ़ गई।

Trium Capital के पोर्टफोलियो मैनेजर थॉमस रोडेरिक (Thomas Roderick) का कहना है कि सोना अमेरिकी प्रभाव से बाहर 'लिक्विड वेल्थ' बनाने का जरिया है। उनके मुताबिक चीन की सोना खरीद इस तेजी की सबसे अहम वजहों में से एक है।

2026 में सोने की चाल कैसी रह सकती है

Pictet Asset Management के शैनियल रामजी (Shaniel Ramjee) मानते हैं कि जैसे-जैसे सट्टेबाजी बढ़ती है, सोने का अन्य रिस्क एसेट्स से जुड़ाव भी बढ़ता है। इसके बावजूद वे अपने पोर्टफोलियो का करीब 8 प्रतिशत सोने में रखते हैं।

उनका कहना है कि सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी की वजह से सोने में ऊंचा वेट रखना सुरक्षित लगता है। 2026 में सोना ऊपर की ओर जाएगा, लेकिन रफ्तार 2025 के मुकाबले ज्यादा संतुलित और धीरे होने की संभावना है।

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