धनतेरस से पहले सोने ने लगातार नई ऊंचाइयां छुईं। देश के अंदर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और सराफा बाजार दोनों जगह सोना हर रोज नए रिकॉर्ड बना रहा था। लेकिन 18 अक्टूबर को धनतेरस के दिन से इसमें जो गिरावट आनी शुरू हुई, वह अभी भी जारी है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, MCX पर सोने के वायदा भाव का ऑल टाइम हाई 1,32,294 रुपये प्रति 10 ग्राम है। यह दिसंबर में डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स ने 17 अक्टूबर 2025 को क्रिएट किया था।
अब सोना काफी नीचे आ चुका है। 28 अक्टूबर को MCX पर दिसंबर में डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स का वायदा भाव 117628 रुपये प्रति 10 ग्राम के लो तक चला गया। यह लेवल रिकॉर्ड हाई से 14666 रुपये कम है। सोने की कीमतें केवल भारत के अंदर ही नहीं बल्कि ग्लोबल मार्केट्स में भी टूटी हैं। इसका असर देश के अंदर कीमतों पर पड़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक, ग्लोबल मार्केट में सोने का हाजिर भाव 2% टूटकर 3,899.94 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। दिसंबर डिलीवरी वाला यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 2.6% की गिरावट के साथ 3,915.30 डॉलर प्रति औंस तक चला गया। वैश्विक बाजार में सोना 4381.52 डॉलर प्रति औंस का नया पीक देख चुका है।
किन अहम वजहों से लुढ़क रहा सोना
सोने में आई गिरावट के पीछे अहम वजह हैं- अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक रिश्तों में सुधार की उम्मीदें, प्रॉफिट बुकिंग, डॉलर की मजबूती और ब्याज दर को लेकर फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर। रविवार को, अमेरिका और चीन के शीर्ष आर्थिक अधिकारियों ने एक संभावित व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई। इस समझौते पर इस सप्ताह के अंत में दक्षिण कोरिया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग के बीच मीटिंग के दौरान चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों नेता टैरिफ और ट्रेड पर तनाव को कम करने की दिशा में बात करेंगे। अगर कोई पॉजिटिव नतीजा निकला तो सोने की कीमतों को और झटका लग सकता है।
अगर ब्याज दरें घटीं तो चढ़ सकता है सोना
निवेशक इस वक्त अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मीटिंग के 29 अक्टूबर को आ रहे फैसलों का इंतजार कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व संकेत दे चुका है कि वह अक्टूबर की मीटिंग में बेंचमार्क ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है। साथ ही साल खत्म होने से पहले एक और रेट कट कर सकता है। अगर प्रमुख ब्याज दरों में कटौती हुई तो बॉन्ड पर यील्ड घट जाएगी और ये कम आकर्षक हो जाएंगे। लेकिन यह सेफ एसेट माने जाने वाले सोने के लिए बूस्ट होगा और कीमतें एक बार फिर बढ़ सकती हैं।
2025 में अब तक 50 प्रतिशत उछल चुका है सोना
गिरावट के बावजूद सोने की कीमतें साल 2025 में अभी तक 50 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूती देख चुकी हैं। इसके पीछे भूराजनीतिक तनाव, ट्रेड पर टेंशन, अमेरिकी सरकार का शटडाउन, आर्थिक मोर्चे पर अनिश्चतता, केंद्रीय बैंकों की ओर से अच्छी खरीद, गोल्ड पर बेस्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में निवेश बढ़ना, करेंसी रिस्क जैसे कारण रहे।
क्या सोने पर पॉजिटिविटी है बरकरार?
एनालिस्ट्स को अभी भी लॉन्ग टर्म के लिए सोने का आउटलुक पॉजिटिव दिख रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, मंगलवार को क्योटो में लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन की सालाना मीटिंग में प्रतिनिधियों ने भविष्यवाणी की कि अगले 12 महीनों में सोने की कीमत 4,980 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंचने की उम्मीद है। अमेरिकी सरकार के शटडाउन को 20 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। इसकी वजह से उपजी अनिश्चितता सोने की कीमतों को सपोर्ट कर सकती है।
हालांकि सिटी के एनालिस्ट्स ने सोमवार को सोने की कीमतों के लिए अपने शून्य से तीन महीने के फोरकास्ट को 4,000 डॉलर प्रति औंस से घटाकर 3,800 डॉलर प्रति औंस कर दिया। कैपिटल इकोनॉमिक्स ने 2026 के अंत तक अपने फोरकास्ट को घटाकर 3,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया।