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Gold Rate Today: क्या गोल्ड में तेजी का दौर खत्म हो चुका है?

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व कमोडिटी मार्केट्स में गोल्ड का बड़ा खरीदार रहा है। अब अलग-अलग देशों से अमेरिका के ट्रेड डील करने से डर का माहौल कम हो रहा है। अमेरिका और चीन के बीच का ट्रेड वॉर खत्म होने की तरफ है। इससे चिंता घटी है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 13, 2025 पर 1:41 PM
Gold Rate Today: क्या गोल्ड में तेजी का दौर खत्म हो चुका है?
एमसीएक्स में गोल्ड ने 99,704 रुपये प्रति 10 ग्राम का हाई बनाया था। यह अप्रैल 2025 में बना था।

मैं बुलियन (सोना और चांदी) में निवेश का बड़ा समर्थक रहा हूं। यह इनफ्लेशन के असर से बचाने में मदद करता है। मैंने पहले भी इस बारे में लिखा है। मैंने यहां तक कहा है कि आपको अपने कुल इनवेस्टमेंट का 20 फीसदी तक बुलियन में लगाना चाहिए। पिछली कुछ तिमाहियों में सोने में निवेश से निवेशकों ने बड़ा रिटर्न कमाया है। हालाांकि, पिछले कुछ हफ्तों से सोने पर दबाव दिखा है। इस आर्टिकल में इससे जुड़ी चिंता के बारे में बात की गई है।

यह तथ्य कि सोने और चांदी की जितनी यील्ड रही है, उसकी तुलना मिडकैप स्टॉक्स से की जाती है। मैथ्स के डेटा के वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती है। कई ऐसी बातें हैं, जिन्हें सच मान लिया गया है। उदाहरण के लिए सूरज दिन में निकलता है और चांद रात में निकलता है। सोने में करेक्शन जरूरी हो गया था। सोने में तेजी की कई वजहें रही हैं। इनमें सबसे बड़ी वजह डर है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते ट्रेड वॉर और दूसरे देशों पर ज्यादा टैरिफ ने डर का माहौल बना दिया था।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व कमोडिटी मार्केट्स में गोल्ड का बड़ा खरीदार रहा है। अब अलग-अलग देशों से अमेरिका के ट्रेड डील करने से डर का माहौल कम हो रहा है। अमेरिका और चीन के बीच का ट्रेड वॉर खत्म होने की तरफ है। इससे चिंता घटी है और सोने में जो बड़ा निवेश हो रहा था उसमी कमी आई है। इससे सोने की कीमतों में नरमी आई है। इसका मतलब यह नहीं है कि बुलियन में तेजी का दौर खत्म हो गया है।

अमेरिका में सरकार पर कर्ज का बोझ हर तिमाही 1 लाख करोड़ डॉलर की रफ्तार से बढ़ रहा है। ट्रंप सरकार का फोकस सिर्फ टैरिफ जैसे छोटे मसलों पर रहा है। जैसे-जैसे अमेरिका पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है, उस पर इंटरेस्ट बढ़ता जा रहा है। इससे अमेरिका की बैलेंसशीट पर दबाव बन रहा है। इसका असर करेंसी मार्केट पर भी दिख रहा है। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी देखने को मिली है। डॉलर में कमजोरी का असर पड़ेगा, क्योंकि अब भी दुनिया में ज्यादातर व्यापार का पेमेंट डॉलर में होता है।

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