Gold Return: क्या सिर्फ रिटर्न के लिए गोल्ड में निवेश करना समझदारी है? जानिए एक्सपर्ट्स की राय
इस साल जनवरी के अंत में गोल्ड ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। उसके बाद इसमें तेज गिरावट आई। तब से इसकी कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई हैं। गोल्ड ऐसा एसेट क्लास है जो हमसे 2000 साल पहले से था और हमसे 2000 साल बाद भी रहेगा
इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की एंट्री और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के आने से गोल्ड की ओनरशिप को लेकर पुरानी संस्कृति में बदलाव आ सकता है।
गोल्ड में शानदार तेजी के बाद गिरावट आई और अब स्थिरता दिख रही है। खास बात यह है कि मध्यपूर्व में बढ़ती लड़ाई का असर गोल्ड पर नहीं दिखा है। तो क्या अब गोल्ड निवेश का सबसे सुरक्षित विकल्प नहीं रह गया है? क्या गोल्ड में अब ज्यादा रिटर्न का दम नहीं है? ऐसे कई सवाल निवेशकों के मन में चल रहे हैं। मनीकंट्रोल के ग्लोबल वेल्थ समिट 2026 में गोल्ड के बारे में एक्सपर्ट्स ने खुलकर अपनी राय रखी। इस चर्चा से निवेशकों को अपने सवाल के जवाब मिल जाएंगे।
रिटर्न के लिए गोल्ड के पीछे भागना ठीक नहीं
एक्सपर्ट्स ने कहा कि पोर्टफोलियो में गोल्ड जरूर होना चाहिए। लेकिन, निवेशकों को ज्यादा रिटर्न के लिए गोल्ड के पीछे भागने की जरूरत नहीं है। उन्हें यह भी उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि गोल्ड हमेशा निवेश का सबसे सुरक्षित विकल्प रहेगा। इस साल जनवरी के अंत में गोल्ड ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। उसके बाद इसमें तेज गिरावट आई। तब से इसकी कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई हैं।
गोल्ड 2000 साल पहले से था और 2000 साल बाद तक रहेगा
डीएसपी म्यूचुअल फंड के एमडी और सीईओ कल्पेन पारेख ने कहा कि गोल्ड के लंबे इतिहास को जानने के बाद इनवेस्टर्स ऐसा मतलब निकालते हैं जो हमेशा सही साबित नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, "गोल्ड ऐसा एसेट क्लास है जो हमसे 2000 साल पहले से था और हमसे 2000 साल बाद भी रहेगा।"
शेयरों से हमेशा बेहतर रिटर्न देने की धारणा सही नहीं
उन्होंने कहा कि 20, 30 या 50 साल की लंबी अवधि के डेटा को देखने से पता चलता है कि गोल्ड ने कई टॉप शेयर मार्केट से ज्यादा बेहतर रिटर्न दिया है। लेकिन, जब आप 5 साल में रोलिंग रिटर्न को देखते हैं तो तस्वीर बदल जाती है। तब शेयरों से बेहतर रिटर्न देने की गोल्ड की क्षमता सही नहीं लगती। इंडिया में शेयरों के मुकाबले गोल्ड ने पांच साल के टाइम फ्रेम में सिर्फ 25 फीसदी ही शेयरों से ज्यादा रिटर्न दिया है। पूरी दुनिया के लिहाज से देखने पर यह 35 फीसदी है।
हमेशा इनफ्लेशन से सुरक्षा देने का दावा भी सही नहीं
उन्होंने कहा कि अगर इनफ्लेशन से हेजिंग के लिहाज से देखा जाए तो ज्यादा इनफ्लेशन वाले फेज में सिर्फ 40 फीसदी ही गोल्ड का प्रदर्शन बेहतर रहा है। फेज में 60 फीसदी इसका प्रदर्शन कमजोर रहा है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि गोल्ड ने हमेशा इनफ्लेशन से सुरक्षा दी है। यह तथ्य गोल्ड के बारे में आम धारणा से मेल नहीं खाता। कई लोग यह मानते हैं कि गोल्ड महंगाई से सुरक्षा प्रदान करता है।
शेयरों के निवेशकों की दिलचस्पी गोल्ड में बढ़ी है
मिरै एसेट इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सीईओ और वाइस चेयरमैन स्वरूप मोहंती ने कहा कि इंडिया में पारंपरिक रूप से लोगों के गोल्ड खरीदने में संस्कृति का बड़ा हाथ रहा है न कि इसकी कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का। उन्होंने कहा, "अगर आप अभी की स्थिति देखें तो ज्यादातर शेयरों के निवेशक गोल्ड में निवेश कर रहे हैं। इंडिया में पीढ़ियों से लोग कीमतों पर गौर किए बगैर खास मौकों पर गोल्ड खरीदते आए हैं।"
गोल्ड की ओनरशिप के ट्रेड में बदलाव दिख रहा
उन्होंने कहा कि इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की एंट्री और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के आने से गोल्ड की ओनरशिप को लेकर पुरानी संस्कृति में बदलाव आ सकता है। उन्होंने कहा, "मेरी सलाह यह है कि आपको शेयरों में उसी तरह से निवेश करना चाहिए जिस तरह पहले लोग सोना खरीदते थे और उस तरह से गोल्ड नहीं खरीदना चाहिए जिस तरह से आज लोग शेयर खरीदते हैं।" हाल में गोल्ड में आई तेजी की एक बड़ी वजह शेयरों से अच्छा रिटर्न कमाने के बाद निवेशकों की गोल्ड में दिलचस्पी रही है।
2025 की दूसरी छमाही में गोल्ड में बढ़ी दिलचस्पी
Dezerv के को-फाउंडर वैभव पोरवाल ने कहा कि 2025 की दूसरी छमाही में गोल्ड में क्लाइंट्स की दिलचस्पी बढ़ने लगी। इसकी शुरुआत पिछले साल सितंबर-अक्तूबर में हुई। फिर यह दिसंबर 2025 और 2026 की शुरुआत तक जारी रहा। तब कई इनवेस्टर्स शेयरों की जगह गोल्ड में पैसे लगाना चाहते थे। निवेशकों का यह व्यवहार चिंताजनक हैं, क्योंकि वे लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स की जगह सिर्फ कीमतों में हालिया उछाल की वजह से गोल्ड में निवेश करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि कीमतों में उछाल को देख पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा बढ़ाना ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि गोल्ड का इस्तेमाल पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन के लिए होना चाहिए न कि ग्रोथ इंजन के लिए। गोल्ड में 5-10 फीसदी का निवेश जियोपॉलिटिकल टेंशन या राजनीतिक अनिश्चितता से हेजिंग के लिए पर्याप्त है। गोल्ड के मामले में एसेट ऐलोकेशन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।