Gold-Silver ETFs Sharp Fall: सोना और चांदी के ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) आज तेज गिरावट देखने को मिली। देशी-विदेशी बाजारों में सोने-चांदी की चमक फीकी पड़ी तो इसकी आंच में इनके ईटीएफ भी झुलस पड़े। सिल्वर ईटीएफ करीब 4% तक टूट गए तो गोल्ड ETF में करीब 2% की गिरावट आई। सोने-चांदी में यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब कच्चे तेल के अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के पहले के लेवल के आने का शेयर मार्केट में जश्न मन रहा है। ब्रेंट क्रूड प्रति बैरल फिसलकर फिर $73 के नीचे आया तो घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) आधे फीसदी से अधिक उछल पड़े।
क्या हाल है Gold-Silver ETFs का
पहले गोल्ड ईटीएफ की बात करें तो फिलहाल 10:45 AM पर ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ 1.94% गिरकर ₹119.23, SBI गोल्ड ईटीएफ 1.92% टूटकर ₹118.91, निप्पॉन इंडिया गोल्ड बीईएसएस 1.86% गिरकर ₹115.37 और टाटा गोल्ड ईटीएफ 1.81% फिसलकर ₹13.57 पर आ गया।
अब सिल्वर ईटीएफ की बात करें तो निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ 3.81% गिरकर ₹205.23, एसबीआई सिल्वर ईटीएफ 3.76% टूटकर ₹210.25, ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ईटीएफ 3.78% गिरकर ₹214.05 और टाटा सिल्वर ईटीएफ 3.74% फिसलकर ₹20.85 पर आ गया।
MCX पर बात करें तो अगस्त की डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स 0.16% गिरकर ₹1,41,220 प्रति 10 ग्राम और सिल्वर फ्यूचर्स भी 0.96% फिसलकर ₹2,11,710 प्रति किग्रा पर आ गया। चांदी में कुछ ज्यादा ही उठा-पटक देखने को मिली। चांदी का जुलाई फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती कारोबार में आज लगभग ₹3,000 गिरकर ₹2.10 लाख प्रति किग्रा तक आ गया जोकि जनवरी महीने में ₹4.20 लाख के रिकॉर्ड हाई लेवल से आधा है, लेकिन बाद में इसमें कुछ रिकवरी हुई। इसके बावजूद इस हफ्ते के पहले चार कारोबारी दिनों में चांदी करीब ₹17,000 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। सोने में भी आज शुरुआती कारोबार में कमजोरी दिखी। अगस्त कॉन्ट्रैक्ट ₹1,40,543 प्रति 10 ग्राम तक गिर गया था, लेकिन बाद में इसमें सुधार हुआ। फिर भी यह शुक्रवार के क्लोजिंग प्राइस से लगभग प्रति 10 ग्राम ₹5,200 नीचे बना हुआ है।
वैश्विक बाजार में लगातार कमजोरी के कारण घरेलू बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आई। पिछले सेशन में सात महीनों में पहली बार एक औंस (28.3495 ग्राम) गोल्ड के $4,000 के अहम स्तर से नीचे जाने के बाद स्पॉट गोल्ड में और गिरावट आई। अमेरिकी डॉलर के मजबूत बने रहने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की महंगाई से निपटने के लिए इस साल ब्याज दरें बढ़ाने के आसार ने गोल्ड पर दबाव बढ़ाया। इससे सोने जैसी ब्याज नहीं देने वाली एसेट्स का आकर्षण कम हुआ और इसके भाव नीचे आए।
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