Gold-Silver में गिरावट से इनवेस्टर्स को लगी 5 लाख करोड़ डॉलर की चपत

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड और सिल्वर में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फेड के नए चयेरमैन की नियुक्ति करना है। केविन वार्श का बहुत सख्त माना जाता है। इसका मतलब है कि अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी अब पहले से ज्यादा सख्त होगी। इससे डॉलर में मजबूती आ रही है

अपडेटेड Feb 01, 2026 पर 10:58 AM
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30 जनवरी और 1 फरवरी को आई गिरावट से निवेशकों को 5 लाख करोड़ डॉलर यानी 450 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है

दुनियाभर में गोल्ड और सिल्वर में बड़ी गिरावट से निवेशकों को बड़ी चपत लगी है। 30 जनवरी से पहले निवेशकों को मालामाल करने वाले गोल्ड और सिल्वर की हवा निकल गई है। एक अनुमान के मुताबिक, 30 जनवरी और 1 फरवरी को आई गिरावट से निवेशकों को 5 लाख करोड़ डॉलर यानी 450 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड और सिल्वर में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फेड के नए चयेरमैन की नियुक्ति करना है। केविन वार्श का बहुत सख्त माना जाता है। इसका मतलब है कि अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी अब पहले से ज्यादा सख्त होगी। इससे डॉलर में मजबूती आ रही है। इसका असर सोने और चाांदी की कीमतों पर पड़ रहा है।

दो सत्रों में 18 फीसदी से ज्यादा गिरा सोना

30 जनवरी और 1 फरवरी की गिरावट ने सोने को बड़ी चोट पहुंचाई है। दो दिन में यह करीब 19 फीसदी गिर चुका है। इसका असर गोल्ड ईटीएफ पर भी पड़ा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। गोल्ड का आउटलुक पॉजिटिव है।


चॉइस वेल्थ के सीईओ निकुंज सर्राफ का मानना है कि सोने में गिरावट कोई रहस्य नहीं है। उन्होंने कहा कि 29 जनवरी को एमसीएक्स में कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाने के बाद प्रॉफिट बुकिंग की उम्मीद की जा रही थी। उन्होंने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन के नाम का ऐलान कर दिया है। यह माना जा रहा है कि अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी सख्त हो सकती है। इससे अमेरिकी डॉलर में मजबूती आ रही है। इसका असर मेटल्स की कीमतों पर पड़ रहा है।" उन्होंने निवेशकों को घबराहट में बिकवाली नहीं करने की सलाह दी।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को अपने एसेट ऐलोकेशन का ध्यान रखना चाहिए। जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी 5-10 फीसदी से कम है, वे गोल्ड में गिरावट के मौके का इस्तेमाल खरीदारी के लिए कर सकते हैं। इनवेस्टर के पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी 5-10 फीसदी तक होनी चाहिए। इससे पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन में मदद मिलती है।

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