Gold-Silver Investment: इक्विटी फंड से पहली बार आगे गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ, सोने-चांदी में निवेश का कौन तरीका बेहतर

Gold-Silver Investment: पहली बार ऐसा हुआ कि सोने-चांदी के ईटीएफ में निवेश ने इक्विटी फंड्स को पीछे छोड़ दिया। इससे निवेशकों के बदलते रुझान का संकेत मिलता है। अब सवाल उठता है कि इसके लिए गोल्ड की किस रूप में खरीदारी की जाए- फिजिकल, डिजिटल या गोल्ड या सोवरेन गोल्ड बॉन्ड्स। यहां इन सबके बारे में बताया जा रहा है

अपडेटेड Feb 12, 2026 पर 2:15 PM
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Gold-Silver Investment: सोवरेन गोल्ड बॉन्ड्स इस वजह से बेहतर माने जाते हैं क्योंकि इस पर सरकार की गारंटी रहती है और गोल्ड की कीमत बढ़ने के अलावा ब्याज के रूप में अतिरिक्त मुनाफा मिलता है। (File Photo- Pexels)

Gold-Silver Investment: पिछले महीने जनवरी में सोना और चांदी ने इक्विटी को पीछे छोड़ दिया। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक पहली बार गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में इक्विटी फंड से अधिक निवेश हुआ, जो निवेशकों की बदलती रुझान का संकेत है। पिछले महीने इक्विटी योजनाओं में ₹24,029 करोड़ का निवेश आया, वहीं गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में कुल मिलाकर ₹33,500 करोड़ का निवेश हुआ। इससे यह संकेत मिल रहा है कि अनिश्चिचताओं के बीच निवेशक अपने पोर्टफोलियो की सेफ्टी पर ध्यान दे रहे हैं। अब सवाल उठता है कि इसके लिए गोल्ड की किस रूप में खरीदारी की जाए- फिजिकल, डिजिटल या गोल्ड या सोवरेन गोल्ड बॉन्ड्स। यहां इन सबके बारे में बताया जा रहा है

किस रूप में गोल्ड-सिल्वर में निवेश अधिक बेहतर?

Gold ETF और Silver ETF

ईटीएफ के जरिए सोने और चांदी में निवेश डीमैट खाते के जरिए रेगुलेटेड और मार्केट से जुड़ा एक्सपोजर मिलता है। ये घरेलू मार्केट में सोने-चांदी की कीमतें ट्रैक करती हैं तो साथ ही स्टोरेज और प्योरिटी से जुड़ी चिंताए खत्म भी करती हैं। विघ्नहर्ता गोल्ड के फाउंडर और चेयरमैन महेंद्र लुनिया के मुताबिक ईटीएफ उन निवेशकों के लिए बेहतर है, जो मार्केट के जानकार हैं और अपने पोर्टफोलियो में सोना और चांदी को शामिल करना चाहते हैं। हालांकि एक्सपेंस रेशियो और ट्रैकिंग एरर लॉन्ग-टर्म में रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि उनका कहना है कि लिक्विडिटी मार्केट वॉल्यूम पर निर्भर करता है और इसे फिजिकल फॉर्म में बदला नहीं जा सकता है। इसमें निवेश पर होल्डिंग अवधि के आधार पर शॉर्ट और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है।


डिजिटल गोल्ड और सिल्वर

एक और तरीका है जिसमें बिना फिजिकल तरीके से होल्ड किए सोने-चांदी में निवेश कर सकते हैं, वह है डिजिटल गोल्ड और सिल्वर। महेंद्र के मुताबिक इसमें निवेशकों का पैसा 999-प्योरिटी वाले गोल्ड और सिल्वर में लगाया जाता है जिसे इंश्योर्ड वॉल्ट में रखा जाता है। इसमें कम पैसों से भी निवेश शुरू किया जा सकता है। इसमें सबसे अधिक फायदा लिक्विडिटी का है। स्टोरेज और सेफ्टी को प्लेटफॉर्म मैनेज करते हैं। मेकिंग चार्ज नहीं होने और कम स्प्रेड के चलते नेट रिटर्न बेहतर हो सकता है तो यह शॉर्ट से मीडियम टर्म के लिए बेहतर हो सकता है। हालांकि ये रेगुलेटेड नहीं होते हैं तो इसमें रिस्क अधिक होता है।

सोवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (एसजीबी)

सोवरेन गोल्ड बॉन्ड्स इस वजह से बेहतर माने जाते हैं क्योंकि इस पर सरकार की गारंटी रहती है और गोल्ड की कीमत बढ़ने के अलावा ब्याज के रूप में अतिरिक्त मुनाफा मिलता है। महेंद्र का कहना है कि मेच्योरिटी तक रखने पर सोवरेन गोल्ड बॉन्ड से रिटर्न टैक्स-फ्री भी रहता है जिसके चलते गोल्ड में निवेश का सबसे बेहतरीन तरीका बन जाता है। इसमें सबसे बड़ी कमी लिक्विडिटी की है और अब चूंकि नई एसजीबी आ नहीं रही है तो लिक्विडिटी और कमजोर हो सकती है। ये एक्सचेंज पर ट्रेड तो होते हैं लेकिन वॉल्यूम कम रहता है। यह ऐसे निवेशकों के लिए बेहतर है जिन्हें तुरंत पैसे की जरूरत नहीं हैं।

फिजिकल गोल्ड और सिल्वर

लंबे समय से सोने-चांदी में फिजिकल तौर पर निवेश का विकल्प बना हुआ है। इसमें ज्वैलरी, सिक्के और बार के जरिए सीधे मालिकाना हक मिलता है लेकिन कई कमियां भी हैं। मेकिंग चार्ज, जीएसटी, स्टोरेज से जुड़े खर्चें और फिर से बेचने पर कटौती से वास्तविक रिटर्न कम हो जाता है। इसके अलावा चोरी का रिस्क भी बना रहता है और सुरक्षा के लिए लॉकर में रखा है तो इसका भी खर्च बढ़ता है। महेंद्र के मुताबिक निवेश के लिए सबसे कम आकर्षक विकल्प है तो यह उपभोग के लिए बेहतर है, वित्तीय तौर पर अधिक रिटर्न के लिए नहीं।

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