Gold- Silver Price Today: सोना ₹1.63 लाख के नीचे, चांदी ₹2600 हुई सस्ती, क्या यह है खरीदारी का सही समय

Gold- Silver Price Today: डॉलर इंडेक्स लगातार तीन सेशन से बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जिससे सोने की चमक फीकी पड़ रही है। महंगाई और बढ़ते अमेरिकी कर्ज की चिंताओं के कारण लंबी अवधि के बॉन्ड में बिकवाली हुई, जिससे अमेरिकी 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई।

अपडेटेड Aug 25, 2026 पर 5:15 PM
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Gold-Silver Rate Today In India: फ्यूचर्स ट्रेड में चांदी की कीमतें 903 रुपये गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं, क्योंकि ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन कम कर दीं।

Gold- Silver Price Today: भारत में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। मंगलवार को स्पॉट मार्केट में मांग घटने की वजह से फ्यूचर्स ट्रेड में सोने की कीमतें 500 रुपये गिरकर 1,62,933 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। 595 लॉट का कारोबार हुआ। जानकारों का मानना ​​है कि सोने-चांदी की कीमतों में यह गिरावट स्पॉट मार्केट में कमजोर मांग के कारण आई है।

वहीं फ्यूचर्स ट्रेड में चांदी की कीमतें 903 रुपये गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं, क्योंकि ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन कम कर दीं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स 903 रुपये या 0.37 प्रतिशत गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए, जिसमें 1,702 लॉट का कारोबार हुआ।

ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में सोने के फ्यूचर्स 0.23 प्रतिशत गिरकर 4,641.42 डॉलर प्रति औंस हो गए।न्यूयॉर्क में चांदी 1.04 प्रतिशत गिरकर 68.22 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।


गिरावट की क्या है वजह 

डॉलर इंडेक्स लगातार तीन सेशन से बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जिससे सोने की चमक फीकी पड़ रही है। महंगाई और बढ़ते अमेरिकी कर्ज की चिंताओं के कारण लंबी अवधि के बॉन्ड में बिकवाली हुई, जिससे अमेरिकी 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई।

बाजार की नजरें बुधवार को आने वाले US पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पर हैं, जो US फेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना है। साथ ही, शुक्रवार को जैक्सन होल सिम्पोजियम में चेयरमैन केविन वॉर्श के पहले भाषण पर भी नजरें टिकी हैं, जिससे ब्याज दरों की चाल के बारे में संकेत मिल सकते हैं।

क्या है निवेश का सही समय

VT मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशन्स लीड रॉस मैक्सवेल ने कहा कि अगस्त में चांदी की कीमतों में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है। इसकी वजहें हैं - ब्याज दरों को लेकर कम होती उम्मीदें, कमज़ोर USD, कीमती धातुओं की फिर से बढ़ती मांग और सरकारी कर्ज़ व महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताएं। चांदी को मज़बूत इंडस्ट्रियल डिमांड (खासकर रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे टेक्नोलॉजी सेक्टर से) का भी फ़ायदा मिल रहा है, और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें भी इसे और सहारा दे रही हैं।

हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है।

जिन निवेशकों के पास पहले से चांदी है, उनके लिए इसे बनाए रखना एक अच्छा फ़ैसला हो सकता है, खासकर अगर यह उनके डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो का हिस्सा है। लेकिन नए निवेशकों के लिए, महीने भर में हुई लगभग 20% की तेज़ी के पीछे भागना जोखिम भरा हो सकता है। इतनी ज़बरदस्त तेज़ी के बाद एक ही बार में खरीदने के बजाय, डॉलर कॉस्ट एवरेजिंग स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करते हुए धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर हो सकता है।

निवेशकों को तभी बेचने के बारे में सोचना चाहिए जब उनके निवेश का आधार (investment thesis) बदल गया हो या पोर्टफोलियो में चांदी का हिस्सा ज़रूरत से ज़्यादा हो गया हो।

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