Gold Silver price: MCX पर सोना ₹1.41 लाख के नीचे, चांदी ₹1.84 पर पहुंची, अब क्या हो निवेश रणनीति
Gold Silver price: सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव दिख रहा है। आज यानी शुक्रवार, 30 अक्टूबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दिसंबर का गोल्ड फ्यूचर 0.58% गिरकर 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे थे
सोने की हाजिर कीमत (स्पॉट गोल्ड) 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे फिसल गई, जबकि चांदी में भी गिरावट जारी रही।
Gold Silver price: सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव दिख रहा है। आज यानी शुक्रवार, 30 अक्टूबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दिसंबर का गोल्ड फ्यूचर 0.58% गिरकर 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे थे, जबकि चांदी के वायदा 2.40% गिरकर 1.84 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में, सोने की हाजिर कीमत (स्पॉट गोल्ड) 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे फिसल गई, जबकि चांदी में भी गिरावट जारी रही। इस चिंता ने कीमती धातुओं की मांग पर असर डाला है कि अमेरिका में ऊंची महंगाई के कारण ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। बता दें कि इन कीमती धातुओं से कोई ब्याज आय नहीं मिलती है।
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में कमोडिटीज और करेंसी मामलों की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नारवेकर ने बताया कि शुक्रवार (30 अक्टूबर) को सोने की कीमत 1% गिरकर 3,983 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। यह 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे है और जुलाई के मध्य के बाद अपने सबसे निचले स्तर के करीब है। चांदी की कीमत 2.5% गिरकर 50.86 डॉलर प्रति औंस रह गई।
उन्होंने इस दबाव के लिए कुछ हद तक अमेरिका के महंगाई आंकड़ों को जिम्मेदार ठहराया। अमेरिका का 'पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर' (PCE) प्राइस इंडेक्स सितंबर में 0.5% बढ़ा, जो मार्च के बाद से सबसे बड़ी मासिक वृद्धि है। इससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और इस बात की संभावना भी बढ़ गई है कि फेडरल रिजर्व अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को और सख्त कर सकता है।
PL कैपिटल में कमोडिटीज के प्रमुख आशीष राजोदिया ने कहा कि फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख के कारण सोने और चांदी पर दबाव है। उन्होंने अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों और दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को भी उन कारकों के रूप में बताया, जिनकी वजह से कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।
कीमतों में गिरावट क्यों?
ऊंची ब्याज दरें सोने और चांदी पर दबाव डाल सकती हैं, क्योंकि इससे ऐसी संपत्तियों को अपने पास रखने की 'अपॉर्चुनिटी कॉस्ट' (अवसर लागत) बढ़ जाती है, जिनसे कोई ब्याज नहीं मिलता। अमेरिका में सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की उम्मीदें डॉलर और बॉन्ड यील्ड को भी मजबूती दे सकती हैं, जिससे निवेशकों के लिए कीमती धातुओं का आकर्षण कम हो जाता है।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी महंगाई से जुड़ी चिंताओं को बढ़ा रही हैं। PL कैपिटल के चीफ बिजनेस ऑफिसर (एडवाइजरी और डीलिंग) विक्रम कसाट ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड का 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहना भारत के आयात बिल, महंगाई और करेंसी की स्थिरता के लिए चिंता का विषय है।
कैप्राइज इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के स्मॉलकेस मैनेजर पीयूष मेहता ने कहा कि अमेरिका, इजराइल और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। हालांकि, ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे मौद्रिक नीति में ढील मिलने में देरी हो सकती है और सोने की कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि लिक्विडिटी (नकदी) की कमी के समय सोने पर बिकवाली का दबाव आ सकता है। ऐसे समय में निवेशक कैश जुटाने या मार्जिन की जरूरतें पूरी करने के लिए अपनी संपत्तियां बेचते हैं, भले ही सोने को पारंपरिक रूप से एक सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट) माना जाता हो।
लेमन के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि सोने की कीमत का 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आना, अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों और दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि चांदी पर बिकवाली का दबाव ज्यादा है, जो कीमती धातुओं में कमजोरी और औद्योगिक मांग को लेकर चिंताओं को दिखाता है।
आगे क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति
नारवेकर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड के लिए तत्काल सपोर्ट लेवल 3,950 डॉलर प्रति औंस है। अगर कीमत इस स्तर से नीचे जाती है, तो यह 3,900 डॉलर प्रति औंस की ओर जा सकती है। वहीं, 4,070 डॉलर प्रति औंस पर रेजिस्टेंस (बाधा) है।
MCX गोल्ड के लिए, उन्होंने 10 ग्राम के लिए 1.40 लाख रुपये से 1.44 लाख रुपये की ट्रेडिंग रेंज बताई है।
मेहता ने कहा कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जिसमें 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर है, जिस पर नजर रखनी चाहिए। पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने पर सोने की 'सेफ-हेवन' (सुरक्षित निवेश) के रूप में मांग बढ़ सकती है, जबकि डॉलर के मजबूत होने और फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त मौद्रिक नीति (हॉकिश रुख) अपनाने की उम्मीदों से सोने की कीमतों में तेजी सीमित हो सकती है।
उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी, भू-राजनीतिक विभाजन और पोर्टफोलियो में विविधता लाने की कोशिशें, लंबे समय के लिए सोने को एक आकर्षक निवेश बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।
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