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Gold vs silver: फेड की ब्याज दर में बढ़ोतरी, डॉलर और जियोपॉलिटिकल रिस्क का कीमतों पर असर क्यों

Gold vs silver: ऊंची ब्याज दरों के दबाव के मुकाबले जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता एक अहम कारक बनी हुई है। ठाकुर ने कहा कि ग्रोथ, ट्रेड, फिस्कल पॉलिसी और जियोपॉलिटिकल तनाव को लेकर अनिश्चितता रिस्क वाले एसेट्स में भरोसा कम कर सकती है और सोने जैसे सुरक्षित एसेट्स की मांग बढ़ा सकती है

Edited By: Sujata Yadavअपडेटेड Sep 18, 2026 पर 9:21 AM
Gold vs silver: फेड की ब्याज दर में बढ़ोतरी, डॉलर और जियोपॉलिटिकल रिस्क का कीमतों पर असर क्यों
ऊंची ब्याज दरों के दबाव के मुकाबले जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता एक अहम कारक बनी हुई है।

Gold Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में शुक्रवार, 18 सितंबर को अलग-अलग रुझान देखने को मिला। बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी और भविष्य में ब्याज दरों की दिशा के बारे में दिए गए संकेतों के असर का आकलन करता नजर आया। यहीं कारण है कि 18 सितंबर की ताजा कीमतों के अनुसार, COMEX पर सोना 0.26% गिरकर $4,388.20 प्रति औंस पर था, जबकि COMEX चांदी 0.18% बढ़कर $66.215 प्रति औंस पर थी।

कीमतों में यह उतार-चढ़ाव फेड के बेंचमार्क रेट को 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाने के फैसले के बाद कीमती धातुओं के लिए अस्थिर सत्र के बाद आया है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और ट्रेजरी यील्ड आमतौर पर सोना और चांदी जैसी बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव डालती हैं, जबकि मजबूत अमेरिकी डॉलर विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत वाली कीमती धातुओं को महंगा बना सकता है।

आखिर क्यों फेड की पॉलिसी को लेकर संवेदनशील रहता है सोना?

VT मार्केट्स के मार्केट एनालिस्ट रुचिट ठाकुर ने कहा कि फेड की ओर से ब्याज दरों को 4% तक बढ़ाना और बढ़ती महंगाई व मजबूत आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना शॉर्ट टर्म में अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड को सपोर्ट करता है। इससे सोना और चांदी पर दबाव पड़ सकता है क्योंकि ऊंची यील्ड उन संपत्तियों को रखने की 'अपॉर्चुनिटी कॉस्ट' (वैकल्पिक लागत) बढ़ा देती है जिनसे कोई ब्याज नहीं मिलता।

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