खतरे में बिटकॉइन और इथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी? Google की नई रिसर्च ने क्रिप्टो ट्रेडर्स की बढ़ाई चिंता
Google की नई स्टडी ने क्वांटम कंप्यूटिंग से Bitcoin और Ethereum के पासवर्ड सिक्योरिटी सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। इसके मुताबिक, इन पासवर्ड को 9 मिनट के भीतर क्रैक किया जा सकता है। जानिए इस पर क्रिप्टो इंडस्ट्री के जानकारों की क्या राय है और क्या क्रिप्टो ट्रेडर्स को डरना चाहिए।
अभी क्रिप्टो की सिक्योरिटी 256-bit elliptic curve cryptography पर टिकी है।
क्रिप्टो की दुनिया में इन दिनों एक नई बहस छिड़ गई है। Google की एक रिसर्च सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि क्वांटम कंप्यूटर अब पहले के मुकाबले कम संसाधनों और कम समय में Bitcoin और Ethereum जैसी ब्लॉकचेन की सुरक्षा तोड़ सकते हैं। इससे अब बहस छिड़ गई कि क्या बिटकॉइन जैसी सुरक्षित माने जाने वाली क्रिप्टोकरेंसी का वजूद खतरे में है।
रिसर्च में क्या नया सामने आया
अभी क्रिप्टो की सिक्योरिटी 256-bit elliptic curve cryptography पर टिकी है। इसे ऐसे समझिए कि जैसे कोई बहुत मजबूत डिजिटल ताला हो, जिसे खोलने में आज के कंप्यूटरों को हजारों-लाखों साल लग जाएं।
पहले एक्सपर्ट्स मानते थे कि इस ताले को तोड़ने के लिए बहुत बड़े और ताकतवर क्वांटम कंप्यूटर चाहिए होंगे। मतलब कि लाखों-करोड़ों क्यूबिट्स के साथ, जो अभी दूर की बात है।
लेकिन Google की नई स्टडी कहती है कि यह काम अब 5 लाख से भी कम 'physical qubits' वाले क्वांटम कंप्यूटर से हो सकता है। यानी जो काम पहले बहुत ज्यादा ताकत मांगता था, अब उससे करीब 20 गुना कम ताकत में भी संभव हो सकता है।
इतना ही नहीं, Google का मानना है कि क्वांटम कंप्यूटर के खतरे से बचने के लिए नए और ज्यादा सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी सिस्टम अपनाने की जरूरत पहले से जल्दी पड़ सकती है। यानी जो बदलाव भविष्य के लिए सोचा जा रहा था, उसे अब जल्दी लागू करना पड़ सकता है।
पहले पब्लिक-की और प्राइवेट-की समझिए
Bitcoin जैसे सिस्टम में पब्लिक-की और प्राइवेट-की दो अहम हिस्से होते हैं। पब्लिक-की वह होती है जिसे आप खुलकर शेयर कर सकते हैं, ताकि कोई भी आपको पैसा भेज सके। इसके उलट, प्राइवेट-की एक सीक्रेट पासवर्ड की तरह होती है, जो यह साबित करती है कि उस पैसे के असली मालिक आप ही हैं।
हर ट्रांजैक्शन को प्राइवेट-की से साइन किया जाता है। अगर यह किसी और के हाथ लग जाए, तो वह आपके फंड पर पूरा कंट्रोल ले सकता है। इसलिए प्राइवेट-की को हमेशा छुपाकर और सुरक्षित रखना सबसे जरूरी होता है।
उदाहरण के लिए, पब्लिक-की आपके बैंक अकाउंट नंबर या UPI ID की तरह है, जिसे आप किसी को भी दे सकते हैं ताकि वह आपको पैसे भेज सके। वहीं प्राइवेट-की आपके ATM PIN या पासवर्ड जैसी होती है, जो सिर्फ आपके पास रहनी चाहिए। कोई भी आपके अकाउंट नंबर से पैसा डाल सकता है, लेकिन निकाल वही सकता है जिसके पास सही PIN हो। बिटकॉइन में यही काम प्राइवेट-की करती है।
9 मिनट में प्राइवेट-की निकालने का दावा
Ethereum Foundation और Stanford University के साथ बने इस पेपर में एक काल्पनिक स्थिति समझाई गई है। इसके मुताबिक, अगर किसी के पास बेहद ताकतवर क्वांटम कंप्यूटर आ जाएं, तो वो करीब 9 मिनट में Bitcoin की प्राइवेट-की निकाल सकता है।
इसका मतलब है कि जब आप ट्रांजैक्शन करते हैं तो थोड़ी देर के लिए आपकी प्राइवेट-की नेटवर्क पर दिखती है। इसी दौरान हमलावर प्राइवेट-की निकालकर ट्रांजैक्शन कन्फर्म होने से पहले पैसा चुरा सकता है। इसे 'on-spend attack' कहा जाता है यानी ट्रांजैक्शन चलते वक्त हमला। चूंकि Bitcoin में ब्लॉक बनने में करीब 10 मिनट लगते हैं, यह हमला इसी समय के अंदर मुमकिन बताया गया है।
तीन तरह के क्वांटम खतरे
रिसर्च में इन खतरों को तीन हिस्सों में समझाया गया है कि स्कैमर किस तरह निशाना बना सकते हैं क्वांटम कंप्यूटर की मदद से।
पहला है on-spend attack। इसमें जब आप पैसा भेज रहे होते हैं, उसी दौरान आपकी डिटेल के जरिए फंड चुराने की कोशिश की जाती है।
दूसरा है at-rest attack, जिसमें पुराने या लंबे समय से पड़े वॉलेट्स को निशाना बनाया जाता है, खासकर वे जिनकी सिक्योरिटी पहले ही कमजोर पड़ चुकी है।
तीसरा है on-setup attack, जिसमें सिस्टम या प्रोटोकॉल की डिजाइन में मौजूद खामियों का फायदा उठाया जाता है।
इन तीनों तरह के हमलों के लिए अलग-अलग स्तर की तकनीकी क्षमता चाहिए। लेकिन जैसे-जैसे क्वांटम टेक्नोलॉजी मजबूत होती जाएगी, ये खतरे धीरे-धीरे थ्योरी से निकलकर हकीकत बन सकते हैं।
क्यों खतरे में है पूरा क्रिप्टो सिस्टम
Bitcoin और Ethereum जैसे नेटवर्क Elliptic Curve Discrete Logarithm Problem पर टिके हैं। पब्लिक-की तो सबको दिखती है, लेकिन उससे प्राइवेट-की निकालना आज की टेक्नोलॉजी के लिए लगभग नामुमकिन माना जाता है। यही इनकी सुरक्षा की असली दीवार है।
लेकिन अगर क्वांटम कंप्यूटर Shor’s Algorithm का इस्तेमाल करने लगें, तो यह दीवार टूट सकती है। जैसे ही प्राइवेट-की निकल गई, वॉलेट का पूरा कंट्रोल हमलावर के पास चला जाएगा। और क्योंकि ब्लॉकचेन में ट्रांजैक्शन वापस नहीं होते, एक बार पैसा गया तो उसे वापस लाने का कोई रास्ता नहीं होता।
डॉर्मेंट वॉलेट्स सबसे बड़ी परेशानी
सबसे बड़ा खतरा उन पुराने वॉलेट्स से है जो सालों से पड़े हैं और जिनकी private keys खो चुकी हैं। अभी ये कॉइन्स सुरक्षित लगते हैं, लेकिन अगर भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर ताकतवर हो गए, तो इन्हें सीधे निशाना बनाया जा सकता है।
ऐसे वॉलेट्स में अरबों डॉलर के Bitcoin फंसे हुए हैं, जिनका असली मालिक अब keys के साथ मौजूद नहीं है। और सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन्हें नए quantum-safe सिस्टम में अपग्रेड भी नहीं किया जा सकता।
इस समस्या से बचने का उपाय
लंबे समय का समाधान post-quantum cryptography (PQC) की तरफ जाना है, जो ऐसे नए सिक्योरिटी एल्गोरिद्म हैं। इन्हें खास तौर पर क्वांटम कंप्यूटर के हमलों से बचाने के लिए बनाया जा रहा है।
इनका मकसद यह है कि चाहे क्वांटम मशीन कितनी भी ताकतवर क्यों न हो जाए, वह private key तक न पहुंच सके। लेकिन जब तक यह पूरी तरह लागू नहीं होता, तब तक कुछ तुरंत कदम जरूरी हैं:
public key को कम से कम एक्सपोज करना
एक ही key का बार-बार इस्तेमाल न करना
ट्रांजैक्शन के स्तर पर अतिरिक्त सुरक्षा जोड़ना
वॉलेट सिक्योरिटी को मजबूत करना
रिसर्च यह भी कहती है कि सिर्फ टेक्नोलॉजी से काम नहीं चलेगा, इसके लिए रेगुलेटरी और पॉलिसी लेवल पर भी तैयारी करनी होगी।
इंडस्ट्री के बड़े नाम क्या कह रहे हैं
क्रिप्टो एक्सचेंज Binance के पूर्व सीईओ Changpeng Zhao (CZ) का कहना है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक संकेत है कि क्रिप्टो इंडस्ट्री को अब ऐसे एल्गोरिद्म की तरफ बढ़ना होगा, जो क्वांटम से जुड़ी चिंताओं का सामना कर सके।
अमेरिकी अरबपति और क्रिप्टोकरेंसी के समर्थक एलॉन मस्क इसे बड़े हल्के अंदाज में ले रहे हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, 'इसकी अच्छी बात यह है कि अगर आप अपना वॉलेट पासवर्ड भूल गए हैं, तो भविष्य में उसे एक्सेस किया जा सकेगा।' मस्क का इशारा उस ओर था कि अभी पासवर्ड भूलने का मतलब है कि अपनी क्रिप्टोकरेंसी को हमेशा के लिए खो देना।