नए लेबर कोड्स के साथ पीएफ के पुराने नियम लागू रहने से बढ़ी उलझन

कोड ऑन वेजेज, 2019 लागू होने से एंप्लॉयीज का सैलरी स्ट्रक्चर बदल जाएगा। इसमें कहा गया है कि एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी उसके कॉस्ट-टू-कंपनी (सीटीसी) का कम से कम 50 फीसदी होना चाहिए। पहले कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखती थीं। इससे एंप्लॉयीज की टेक होम सैलरी ज्यादा रहती थी

अपडेटेड Dec 08, 2025 पर 8:24 PM
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पीएफ के पुराने नियम बने रहने से एंप्लॉयर्स को नए लेबर कोड्स के हिसाब से सैलरी के स्ट्रक्चर में बदलाव करने में दिक्कत आ सकती है।

सरकार ने लेबर लॉज में बड़े रिफॉर्म्स के तहत नए लेबर कोड्स लागू कर दिए। लंबे समय से नए लेबर कोड्स जारी होने का इंतजार था। संसद ने इन्हें काफी पहले ही पारित कर दिया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 21 नवंबर से लागू चार नए लेबर कोड्स को आज की जरूरत के हिसाब से कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इससे सोशल सिक्योरिटी के नियमों में ऐसे बदलाव हुए हैं, जिससे एंप्लॉयीज को काफी फायदा होगा। खासकर गिग वर्कर्स को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है।

ग्रेच्युटी के नियम में बड़ा बदलाव

कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के लागू होने से ग्रेच्युटी एक्ट, एंप्लॉयीज स्टेट इंश्योरेंस एक्ट जैसे कई पुराने नियमों का वजूद खत्म हो गया है। फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयीज को ग्रेच्युटी के नए नियमों से काफी फायदा होगा। पहले नौकरी कम से कम 5 साल पूरे होने पर ग्रेच्युटी का फायदा मिलता था। अब फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयीज को नौकरी एक साल पूरे होने पर ही ग्रेच्युटी का फायदा मिल जाएगा। फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयीज का मतलब ऐसे एंप्लॉयीज से है, जिनकी नियुक्ति कंपनी फिक्स्ड टर्म यानी निश्चित समय के लिए करती है। यह समय 2 साल, 3 साल या ज्यादा हो सकता है।


बेसिक सैलरी CTC का कम से कम 50%

कोड ऑन वेजेज, 2019 लागू होने से एंप्लॉयीज का सैलरी स्ट्रक्चर बदल जाएगा। इसमें कहा गया है कि एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी उसके कॉस्ट-टू-कंपनी (सीटीसी) का कम से कम 50 फीसदी होना चाहिए। पहले कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखती थीं। इससे एंप्लॉयीज की टेक होम सैलरी ज्यादा रहती थी। इसकी वजह यह है कि पीएफ का डिडक्शन बेसिक सैलरी के आधार पर होता है। एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी हर महीने उसके पीएफ अकाउंट में जमा होता है।

ईपीएफ एक्ट, 1952 का वजूद बना रहेगा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए लेबर कोड्स लागू होने सले वर्कर्स की सैलरी, सोशल सिक्योरिटी सहित ज्यादातर नियम बदल गए हैं। लेकिन, पीएफ के नियमों में बदलाव नहीं हुआ है। पहले यह माना गया था कि नए लेबर कोड्स लागू होने के साथ ईपीएफ एक्ट, 1952 का भी वजूद खत्म हो जाएगा। पीएफ के नियम भी सोशल सिक्योरिटी कोड में शामिल होने की उम्मीद थी। लेकिन, सरकार ने इस बारे में नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। इससे नए लेबर कोड्स के साथ पीएफ के पुराने नियम बने रहेंगे।

सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव में आ सकती है दिक्कत

पीएफ के पुराने नियम बने रहने से एंप्लॉयर्स को नए लेबर कोड्स के हिसाब से सैलरी के स्ट्रक्चर में बदलाव करने में दिक्कत आ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार आगे पीएफ के नए नियम लागू कर सकती है। इससे एंप्लॉयर्स को सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करने में आसानी होगी। नए नियम के हिसाब से सीटूसी का कम से कम 50 फीसदी बेसिक सैलरी होनी चाहिए। इसका मतलब है कि एचआरए, एलटीए जैसे कंपोनेंट अब बाकी 50 फीसदी में एंप्लॉयर्स को एडजस्ट करना पड़ेगा। इसका असर एचआरए और एलटीए के अमाउंट पर पड़ेगा। एंप्लॉयीज के एलटीए का अमाउंट कम हो सकता है।

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