अकाउंट होल्डर की डेथ के बाद भी नॉमिनी को नहीं मिला पैसा! यहां करें शिकायत

देश के बड़े प्राइवेट बैंकों में शामिल HDFC Bank में नॉमिनी सेटलमेंट में देरी को लेकर एक शिकायत ने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। पति की मृत्यु के एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद बैंक ने उनके अकाउंट की रकम उनकी बेटी को ट्रांसफर नहीं की, जबकि बेटी उस अकाउंट की रजिस्टर्ड नॉमिनी है।

अपडेटेड Jan 02, 2026 पर 11:40 AM
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देश के बड़े प्राइवेट बैंकों में शामिल HDFC Bank में नॉमिनी सेटलमेंट में देरी को लेकर एक शिकायत ने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है।

देश के बड़े प्राइवेट बैंकों में शामिल HDFC Bank में नॉमिनी सेटलमेंट में देरी को लेकर एक शिकायत ने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। यह मामला तब सामने आया, जब फाइनेंशियल जर्नलिस्ट वीणा वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने अनुभव को शेयर किया। उन्होंने बताया कि उनके पति की मृत्यु के एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद बैंक ने उनके अकाउंट की रकम उनकी बेटी को ट्रांसफर नहीं की, जबकि बेटी उस अकाउंट की रजिस्टर्ड नॉमिनी है।

वीणा वेणुगोपाल के अनुसार, पति की मृत्यु के तुरंत बाद उन्होंने बैंक को सभी जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे डेथ सर्टिफिकेट आदि सब जमा कर दिए थे। बाद में बैंक ने परिवार को बताया कि स्टाफ के बैंक छोड़ने के कारण डॉक्यूमेंट ट्रेस नहीं हो पा रहे हैं। इसके बाद बैंक ने दोबारा सभी कागजात, स्टांप पेपर पर नोटराइज्ड डॉक्यूमेंट और मृत्यु के बाद हुए ऑटो-डेबिट से जुड़ी जानकारी मांगी। इतना ही नहीं, बैंक ने उन ऑटो-डेबिट के लिए बीमा कंपनी से अनुमति लेने को भी कहा।

उन्होंने यह भी बताया कि उनकी 20 साल की बेटी जो नॉमिनी है, बार-बार बैंक जाना पड़ा और हर बार नए अधिकारियों को अपने पिता की मृत्यु से जुड़ी पूरी बात समझानी पड़ी। वेणुगोपाल का कहना है कि इस अकाउंट को लेकर कोई विवाद नहीं है और न ही कोई अन्य दावेदार है। तुलना करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पति का एक दूसरा अकाउंट IndusInd Bank में था, जिसे एक ही विजिट में दो हफ्ते के अंदर सेटल कर दिया गया।


हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका परिवार आर्थिक रूप से इस रकम पर निर्भर नहीं है, लेकिन ऐसे कई परिवार होते हैं, जिनके लिए ब्रेडविनर की मौत के बाद यही पैसा जीवन की बड़ी जरूरत बन जाता है। ऐसे में इस तरह की देरी गंभीर परेशानी पैदा कर सकती है। मामला सामने आने के बाद HDFC Bank ने 1 जनवरी को सोशल मीडिया पर जवाब देते हुए खेद जताया और मामले की जांच के लिए अकाउंट डिटेल्स मांगीं। बैंक ने भरोसा दिलाया कि शिकायत को प्राथमिकता से सुलझाया जाएगा।

बैंकिंग नियमों के मुताबिक अगर नॉमिनी क्लेम में देरी होती है, तो ग्राहक बैंक के ग्रिवेंस रेड्रेसल डिपार्टमेंट में लिखित शिकायत दर्ज कर सकता है। अगर वहां से भी संतोषजनक जवाब न मिले, तो मामला RBI Banking Ombudsman के पास ले जाया जा सकता है। नियम यह भी कहते हैं कि पूरे डॉक्यूमेंट मिलने के बाद बैंक को 15 दिनों में क्लेम सेटल करना होता है, और देरी की स्थिति में ब्याज भी देना पड़ सकता है

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