HDFC Bank ने करोड़ों ग्राहकों को दी राहत! कम होगी होम लोन EMI, बैंक ने घटाई MCLR दरें

HDFC Bank: एचडीएफसी बैंक ने अपने करोड़ों ग्राहकों को तोहफा दिया है। बैंक ने होम लोन से जुड़ी दरों में कटौती की है। यानी, आगे आपकी होमलोन EMI कम हो सकती है। HDFC Bank ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में कुछ पीरियड के लिए कटौती की है

अपडेटेड Mar 09, 2026 पर 1:54 PM
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HDFC Bank: एचडीएफसी बैंक ने अपने करोड़ों ग्राहकों को तोहफा दिया है।

HDFC Bank: एचडीएफसी बैंक ने अपने करोड़ों ग्राहकों को तोहफा दिया है। बैंक ने होम लोन से जुड़ी दरों में कटौती की है। यानी, आगे आपकी होमलोन EMI कम हो सकती है। HDFC Bank ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में कुछ पीरियड के लिए कटौती की है। बैंक ने चुनिंदा टेन्योर पर ब्याज दर में 10 बेसिस प्वाइंट यानी 0.10% तक की कमी की है। नई दरें 7 मार्च 2026 से लागू हो गई हैं। इस बदलाव के बाद बैंक की MCLR दरें अब 8.15% से 8.55% के बीच हो गई हैं, जबकि पहले यह 8.25% से 8.60% के बीच थीं।

नई MCLR दरें

एचडीएफसी बैंक की वेबसाइट के अनुसार अब ओवरनाइट और 1 महीने की पीरियड के लिए MCLR 8.15% है। वहीं 3 महीने के पीरियड के लिए यह 8.25% कर दी गई है। 6 महीने और 1 साल के पीरियड के लिए MCLR 8.35% है। इसके अलावा 2 साल के लिए 8.45% और 3 साल के लिए 8.55% की दर लागू होगी।


कर्ज लेने वालों पर क्या होगा असर?

इस कटौती का फायदा उन ग्राहकों को मिल सकता है जिनका होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन MCLR से जुड़ा हुआ है। दर कम होने से ऐसे कर्ज की EMI थोड़ी कम हो सकती है। हालांकि इसका फायदा तुरंत नहीं मिलता। यह बदलाव तब लागू होता है जब लोन की इंटरेस्ट रीसेट डेट आती है।

किन ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर

जिन लोगों का लोन बाहरी बेंचमार्क (External Benchmark) जैसे RBI की रेपो रेट से जुड़ा हुआ है, उन पर इस बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा। उनकी EMI रेपो रेट में बदलाव के आधार पर तय होती है।

क्या होता है MCLR

MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर है जिस पर बैंक अपने ज्यादातर कर्ज देते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसे 2016 में लागू किया था ताकि नीतिगत दरों में बदलाव का फायदा ग्राहकों तक जल्दी पहुंच सके। हालांकि अब कई नए लोन रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं, लेकिन अभी भी कई पुराने होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन MCLR के आधार पर ही तय किए जाते हैं। इसलिए MCLR में बदलाव का असर ऐसे पुराने कर्ज लेने वालों पर पड़ सकता है।

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