यह प्रस्ताव लागू हुआ तो हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम बहुत बढ़ जाएगा, जानिए क्या है पूरा मामला

अभी क्लेम करने या नहीं करने पर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम एक जैसा रहता है। नए प्रस्ताव में कहा गया है कि उन ग्राहकों का प्रीमियम बढ़ जाएगा, जिन्होंने क्लेम किया है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों की हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम बहुत बढ़ जाएगा

अपडेटेड Feb 23, 2024 पर 11:07 AM
क्लेम बेस्ड लोडिंग सिस्टम को बीमा नियामक IRDAI ने 2013 में खत्म कर दिया था।

हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) के प्रीमियम को लेकर एक नया प्रस्ताव आया है। इसके पक्ष और विपक्ष में दलीलें दी जा रही हैं। लेकिन, यह तय है कि इस प्रस्ताव के लागू होने पर कुछ लोगों की हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम बहुत बढ़ जाएगा। कोरोना की महामारी के बाद से हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम पहले ही काफी बढ़ चुका है। कई लोगों को अपनी हेल्थ पॉलिसी का बढ़ा हुआ प्रीमियम चुकाने में दिक्कत आ रही है। प्रीमियम तय करने का यह नया फॉर्मूला क्या है, इस प्रस्ताव को किसने पेश किया है, इसका क्यो विरोध हो रहा है, इसका आपकी हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर क्या असर पड़ेगा? आइए इन सभी सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

क्या है नया प्रस्ताव?

कुछ इंश्योरेंस कपनियों खासकर स्टैंडएलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने प्रीमियम निर्धारण के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इसे 'Cohort-based pricing' कहा गया है। ऐसी कंपनी जो सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स ऑफर करती है, उसे स्टैंडएलोन इंश्योरेंस कंपनी कहा जाता है। क्लेम की कॉस्ट घटाने और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को सस्ता करने के लिए यह प्रस्ताव पेश किया गया है। यह दलील स्टैंडएलोन इंश्योरेंस कंपनियों का है।


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क्यों हो रहा है विरोध?

ज्यादातर जनरल इंश्योरेंस कंपनियां इस प्रस्ताव का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव ग्राहकों के हित में नहीं है। इससे कुछ लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम काफी बढ़ जाएगा। उनकी यह भी दलील है कि यह 'क्लेम-बेस्ड लोडिंग' दुबारा लागू करने की कोशिश है। क्लेम बेस्ड लोडिंग सिस्टम को बीमा नियामक IRDAI ने 2013 में खत्म कर दिया था।

क्लेम-बेस्ड लोडिंग कैसे काम करता है?

क्लेम-बेस्ड लोडिंग में हेल्थ पॉलिसी पर क्लेम फाइल करने पर प्रीमियम अमाउंट बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि उन लोगों को अपनी हेल्थ पॉलिसी को रिन्यू कराने पर प्रीमियम के रूप में ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं, जिन्होंने क्लेम लिया है। चूंकि, व्यक्ति की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है, उसे हेल्थकेयर की ज्यादा जरूरत पड़ती है। इसलिए क्लेम-बेस्ड लोडिंग में बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों की हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान?

हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स ऑफर करने वाली जनरल इंश्योरेंस कंपनियां 'Cohort-based pricing'का विरोध कर रही हैं। GoDigit Group के चेयरमैन कामेश गोयल ने कहा, "यह भयानक है। अभी 55 साल या इससे ज्यादा उम्र के व्यक्ति का सालाना प्रीमियम 40,000-60,000 रुपये है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो क्लेम लेने के बाद उनका प्रीमियम तीन साल में बढ़कर करीब 2 लाख रुपये हो जाएगा। यह प्रस्ताव पूरी तरह से गलत और अनैतिक है।"

बीमा नियामक को भेजा गया प्रस्ताव

अभी स्टैंडएलोन कंपनियों ने यह प्रस्ताव बीमा नियामक को भेजा है। उससे इस पर विचार करने को कहा गया है। दलील दी गई है कि इससे उन लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम महंगा नहीं होगा, जो क्लेम नहीं करते हैं। लेकिन, सवाल है कि जब क्लेम करने पर पॉलिसी महंगी होने का खतरा है तो फिर पॉलिसी लेने का फायदा ही क्या है? कोई व्यक्ति हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी इसलिए खरीदता है कि अचानक बीमार पड़ने पर उस पर ज्यादा वित्तीय बोझ नहीं आएगा। अगर हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट बुनियादी जरूरत पूरी नहीं करता है तो फिर हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम चुकाने का क्या फायदा?

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