हेल्थ पॉलिसी के बावजूद हॉस्पिटल का 3 लाख बिल जेब से भरना है, FD तोड़े या किसी से उधार लें?

हॉस्पिटल का बिल 5 लाख आने पर हेल्थ पॉलिसी के बावजूद 3 लाख जेब से चुकाना हो तो बड़ी समस्या हो जाती है। खासकर तब जब परिवार को दवाइयां भी खरीदनी हो और आगे भी डॉक्टर से दिखाना हो। ऐसे में परिवार को हॉस्पिटल के बिल को ध्यान से देखना जरूरी है

अपडेटेड Oct 16, 2026 पर 5:42 PM
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इंश्योरेंस कंपनी के सेटलमेंट स्टेटमेंट को भी चेक कर लेना जरूरी है।

हेल्थ पॉलिसी होने के बावजूद कई बार हॉस्पिटल के बिल का कुछ हिस्सा जेब से भरना पड़ता है। अगर हॉस्पिटल के बिल में से 3 लाख रुपये जेब से भरना हो तो फिर क्या करना चाहिए? क्या सेविंग्स के पैसा का इस्तेमाल करना चाहिए, बैंक एफडी को तोड़ देना चाहिए या पीएफ से पैसे निकालने चाहिए? मनीकंट्रोल ने यह सवाल एक्सपर्ट से पूछा।

बीमारी को ध्यान में रखकर लेने होंगे फैसले

आरोग्य फाइनेंस के को-फाउंडर और सीईओ जोस पीटर ने कहा कि इस सवाल का जवाब कई बातों पर निर्भर है। इसमें बीमारी कौन सी है, बीमारी के इलाज में कितना समय लगेगा और कितने पैसे खर्च होंगे शामिल हैं। कई बार बीमारी का इलाज एक सर्जरी से हो जाता है, जबकि कुछ बीमारी में बार-बार हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है।


हॉस्पिटल बिल और इंश्योरेंस सेटलमेंट स्टेंटमेंट को चेक करें

उन्होंने कहा कि अगर हॉस्पिटल का बिल 5 लाख आने पर हेल्थ पॉलिसी के बावजूद 3 लाख जेब से चुकाना हो तो बड़ी समस्या हो जाती है। खासकर तब जब परिवार को दवाइयां भी खरीदनी हो और आगे भी डॉक्टर से दिखाना हो। ऐसे में परिवार को हॉस्पिटल के बिल को ध्यान से देखना जरूरी है। इंश्योरेंस कंपनी के सेटलमेंट स्टेटमेंट को भी देखना होगा। इससे पता चलेगा कि कौन-कौन से चार्ज इंश्योरेंस में कवर नहीं हुआ है।

कई हॉस्पिटल इंटरेस्ट-फ्री मेडिकल EMI ऑफर करते हैं

सबसे पहले हॉस्पिटल से यह पूछा जा सकता है कि क्या वह इंटरेस्ट-फ्री मेडिकल EMI ऑफर करता है। इसमें इंटरेस्ट का बोझ हॉस्पिटल उठाता है। अगर हॉस्पिटल यह सुविधा ऑफर करता है तो परिवार के लिए इसका इस्तेमाल करना सबसे अच्छा रहेगा। परिवार मंथली किस्त चुकाने के लिए अपने गैरजरूरी खर्चों में कटौती कर सकता है। अगर यह सुविधा हॉस्पिटल ऑफर नहीं करता है तो ही बैंक एफडी तोड़ने या दूसरे विकल्प का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ेगी।

बैंक एफडी तोड़ने से पहले इन बातों को ध्यान में रखें 

अगर बैंक एफडी तोड़ना जरूरी हो तो पहले यह देखना होगा कि इंटरेस्ट के मामले में कितना लॉस होगा और तय समय से पहले एफडी तोड़ने पर कितनी पेनाल्टी चुकानी होगी। एफडी पर लोन लेना अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन, अगर एफडी अगर लंबी अवधि का है तो उसे तोड़ना सस्ता पड़ेगा। परिवार दोनों विकल्पों पर विचार करने के बाद फैसला ले सकता है।

ईपीएफ में जमा पैसा निकालने का भी विकल्प

तीसरा विकल्प ईपीएफ से पैसे निकालना है। लेकिन, यह ध्यान में रखना जरूरी है कि ईपीएफ से पैसे निकालने का असर आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स पर पड़ता है। इस प्रोसेस में समय भी लगता है। यह विकल्प तब काम नहीं करेगा, जब पेशेंट हॉस्पिटल में है और उसे हॉस्पिटल से घर लाने से पहले बिल चुकाना जरूरी हो। ऐसी स्थिति में ईपीएफ से पैसे निकलने का इंतजार नहीं किया जा सकता।

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जरूरत के हिसाब से कुछ विकल्पों का किया जा सकता है इस्तेमाल

उपर्युक्त विकल्पों पर विचार करने के बाद सबसे अच्छा यह होगा कि हॉस्पिटल का बिल चुकाने के लिए सेविंग्स के कुछ पैसे का इस्तेमाल किया जाए और बाकी पैसा का इंतजाम दूसरे स्रोतों से किया जाए। इससे अचानक हाथ खाली नहीं होगा और हॉस्पिटल से पेशेंट के डिस्चार्ज के बाद भी उसकी देखभाल के लिए पैसे बचे रहेंगे।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

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