अब हाईवे पर सफर करते समय वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर ब्रेक लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लंबी कतारें खत्म होंगी, रुकने और टोल देने में लगने वाला समय बचेगा और ट्रैफिक भी पहले से सुचारू रूप से चलेगा। गुजरात के सूरत जिले के कामरेज क्षेत्र में भारत का पहला मल्टी-लेन बैरियर-फ्री टोल प्लाजा तैयार किया गया है। इस अत्याधुनिक टोल सिस्टम के ट्रायल की शुरुआत नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) 2 फरवरी से कर रही है। इस नए टोल सिस्टम में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल होगा।
हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे और FASTag से जुड़ा टोल अमाउंट अपने आप कट जाएगा। इस तरह पूरी प्रक्रिया कॉन्टैक्टलेस होगी और वाहन चालक बिना रुके 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टोल से गुजर सकेंगे।
वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत
इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद वाहनों को टोल देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा। गाड़ियां बिना धीमे हुए टोल स्ट्रेच से गुजर सकेंगी। इससे समय की बचत होगी और नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक पहले से अधिक सुचारू तरीके से चलेगा।
नया सिस्टम ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक से काम करेगा। हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और FASTag से टोल राशि अपने आप कट जाएगी। पूरी प्रक्रिया कॉन्टैक्टलेस होगी, किसी भी मैनुअल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होगी। वाहन लगभग 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बिना रुके टोल से गुजर सकेंगे।
इस प्रोजेक्ट में ताइवान की FETC एजेंसी के 25 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हैं। अधिकारी बताते हैं कि इस सिस्टम से सालाना लगभग 1500 करोड़ रुपये ईंधन की बचत और 6000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है।
सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय की योजना है कि 2026 के अंत तक देशभर के 1050+ टोल प्लाजा AI आधारित मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम में बदल दिए जाएं। अगर गुजरात का पायलट सफल रहा, तो पूरे देश में हाईवे टोल प्लाजा का चेहरा पूरी तरह बदल सकता है।