अभी महंगे नहीं होंगे होम लोन और कार लोन, RBI गवर्नर ने इंटरेस्ट रेट में वृद्धि से किया इनकार

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 24 जून को उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि इंटरेस्ट रेट बढ़ने जा रहा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति में अभी सख्ती की बात करना बहुत जल्दबाजी होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इनफ्लेशन और ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है

अपडेटेड Jun 24, 2026 पर 4:23 PM
संजय मल्होत्रा ने कहा कि अगर केंद्रीय बैंक को यह लगेगा कि निकट भविष्य में इंटरेस्ट रेट बढ़ाना जरूरी है तो वह अपने रुख में बदलाव करेगा।

अभी कार लोन और होम लोन महंगे होने नहीं जा रहे हैं। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने खुद इस बारे में बताया है। उन्होंने 24 जून को उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि इंटरेस्ट रेट बढ़ने जा रहा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति में अभी सख्ती की बात करना बहुत जल्दबाजी होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इनफ्लेशन और ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

इकोनॉमी से जुड़े डेटा के आधार पर फैसला लेगा आरबीआई

ईटी नाउ और ईटी नाउ स्वदेश से बातचीत में मल्होत्रा ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने जून की अपनी पॉलिसी में अपना रुख न्यूट्रल बनाए रखने का फैसला किया था। इसकी वजह यह है कि अभी इकोनॉमी की तस्वीर साफ नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन और इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए रिस्क के आकलन के लिए आने वाले डेटा पर निर्भर करेगा।


इंटरेस्ट रेट बढ़ाने से पहले रुख में बदलाव करेगा केंद्रीय बैंक

उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर केंद्रीय बैंक को यह लगेगा कि निकट भविष्य में इंटरेस्ट रेट बढ़ाना जरूरी है तो वह अपने रुख में बदलाव करेगा। इसे न्यूट्रल से बदलकर रिस्ट्रक्टिव करेगा। इस महीने की शुरुआत में छह सदस्यीय एमपीसी ने रेपो रेट अपरिवर्तित रखने का फैसला किया था। कमेटी का कहना था कि जियोपॉलिटिकल टेंशन, सप्लाई चेने की बाधा और मौसम से जुड़े रिस्क को देखते हुए रेपो रेट को 5.25 फीसदी बनाए रखने का फैसला लिया गया।

अप्रैल और मई में रिटेल इनफ्लेशन में तेज उछाल

इंटरेस्ट रेट बढ़ने की चर्चा रिटेल इनफ्लेशन में उछाल के बाद शुरू हुई। अप्रैल और मई के रिटेल इनफ्लेशन के डेटा से यह साफ हो गया है कि जरूरी चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इसे क्रूड की कीमतों में उछाल का नतीजा माना जा रहा है। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर होना पड़ा।

फ्यूल महंगा होने से महंगाई का खतरा बढ़ जाता है

पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। यही वजह है कि RBI ने इस महीने की शुरुआत में पेश अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रिटेल इनफ्लेशन का अनुमान बढ़ा दिया। उसने इस वित्त वर्ष के ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया। माना जा रहा है कि महंगाई बढ़ने की वजह से इकोनॉमी की ग्रोथ सुस्त पड़ सकती है।

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इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ने पर बढ़ सकात है रेपो रेट

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही आरबीआई गवर्नर ने यह साफ कर दिया है कि अभी केंद्रीय बैंक का रेपो रेट बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है, लेकिन अगर महंगाई हाई लेवल पर बनी रहती है तो आगे रेपो रेट बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। रेपो रेट बढ़ने पर होम लोन, कार लोन और दूसरे लोन महंगे हो जाएंगे।

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