अभी नहीं घटेगी EMI, फिर भी होम लोन वालों को हो रहा 7 से 14 लाख तक का फायदा; जानिए कैसे

RBI ने रेपो रेट भले नहीं घटाया, लेकिन फिर भी होम लोन लेने वाले फायदे में हैं। जानिए होम लोन में कैसे हो रहा 7 से 14 लाख रुपये तक का फायदा। साथ ही, RBI के फैसले का FD निवेशकों पर क्या असर होगा।

अपडेटेड Apr 08, 2026 पर 4:55 PM
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अगर आपने 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है, तो EMI में करीब 3,050 रुपये महीना बचत हो रही है। इ

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखा। यह फैसला बाजार की उम्मीद के मुताबिक रहा। साथ ही, RBI ने अपना 'न्यूट्रल' रुख भी बरकरार रखा है। इससे संकेत मिलता है कि 2025 में शुरू हुआ रेट कट साइकल फिलहाल रुक गया है।

RBI ने रेट कट क्यों नहीं किया?

रेट कट न करने फैसला ऐसे समय में आया है जब महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। ग्लोबल अनिश्चितता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और जियोपॉलिटिकल तनाव कीमतों पर दबाव बना रहे हैं। ऐसे में RBI ने दरों में बदलाव करने के बजाय स्थिरता को प्राथमिकता दी है, ताकि पहले किए गए कट का असर पूरी तरह दिख सके।


EMI में पहले की कटौती का फायदा

RBI के रेट कट न करने से होम लोन की EMI में तुरंत कोई बदलाव नहीं होगा। लेकिन 2025 में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती के कारण उधार लेने वालों को पहले ही बड़ा फायदा मिल चुका है।

अगर आपने 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है, तो EMI में करीब 3,050 रुपये महीना बचत हो रही है। इससे आप कुल ब्याज में लगभग 7.34 लाख रुपये बचा लेंगे। वहीं ,75 लाख रुपये के लोन पर हर महीने करीब 5,800 रुपये की बचत होगी। इसमें कुल मिलाकर करीब 13.94 लाख रुपये तक का फायदा मिल सकता है।

MCLR वालों को नहीं मिल रहा पूरा फायदा

जो लोग पुराने सिस्टम यानी MCLR वाले होम लोन पर हैं, उन्हें RBI के रेपो रेट घटने का फायदा तुरंत नहीं मिलता। उनके ब्याज दर धीरे-धीरे बदलते हैं या कई बार बैंक खुद से जल्दी पास नहीं करते। इसलिए ऐसे ग्राहकों को रेपो-लिंक्ड लोन (RLLR) में शिफ्ट हो जाना चाहिए। क्योंकि इसमें RBI के फैसले का असर जल्दी दिखता है और EMI कम होने का फायदा सीधे मिलता है।

साथ ही, अगर आप अभी भी बाजार से 0.50% या उससे ज्यादा महंगा लोन चुका रहे हैं, तो बेहतर है कि आप रीफाइनेंस करने पर विचार करें, ताकि आपकी EMI और कुल ब्याज दोनों कम हो सकें। इसमें आप उस बैंक में अपना होम लोन ट्रांसफर करा सकते हैं, जिसकी ब्याज दर कम है।

होमबायर्स के लिए राहत की बात

ब्याज दरों में स्थिरता से होमबायर्स को एक तरह की स्पष्टता मिलती है। EMI फिलहाल स्थिर रहेगी और पहले के रेट कट का फायदा जारी रहेगा। पिछले कुछ समय में 8% से नीचे की दरों ने घर खरीदने वालों को अच्छा मौका दिया है, जिससे लंबी अवधि में अच्छी बचत हुई है।

RBI ने साफ संकेत दिया है कि वह जल्दबाजी में आगे दरें कम नहीं करेगा। जब तक महंगाई में लगातार गिरावट नहीं दिखती, तब तक 'वेट एंड वॉच' का रुख बना रह सकता है। MPC का मानना है कि महंगाई का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। ग्लोबल कमोडिटी कीमतें और बाहरी हालात अभी भी जोखिम पैदा कर रहे हैं। साथ ही, पहले किए गए रेट कट का पूरा असर सिस्टम में दिखना भी जरूरी है।

FD निवेशकों के लिए दबाव जारी

रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि FD की ब्याज दरों में भी फिलहाल ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। पहले ही FD रेट में गिरावट देखी जा चुकी है। इस समय कुछ प्राइवेट बैंक 7.4% तक ब्याज दे रहे हैं। ज्यादातर बैंक 7% से 7.2% के बीच रेट ऑफर कर रहे हैं। सीनियर सिटीजन्स को इसमें 0.25% से 0.50% तक अतिरिक्त फायदा मिल सकता है।

अगर FD रेट 7.25% से घटकर 6% हो जाता है, तो 1 लाख रुपये पर सालाना रिटर्न 7,250 रुपये से घटकर 6,000 रुपये रह जाता है। यानी हर लाख पर करीब 1,250 रुपये का नुकसान होता है।

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