होम लोन एप्रूव होने से पहले ग्राहक टेंशन में रहता है। अगर बैंक ने होम लोन एप्रूव नहीं किया तो क्या होगा? अगर बैंक ने कम होम लोन एप्रूव किया तो क्या होगा? दिक्कत तब ज्यादा बढ़ जाती है तो जब व्यक्ति घर की कीमत का ज्यादा हिस्सा होम लोन लेकर चुकाना चाहता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि होम लोन का अमाउंट ग्राहक को खूब सोचसमझकर तय करना चाहिए। इसे बैंक के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए।
होम लोन लंबी अवधि की लायबिलिटी
दरअसल होम लोन एक लंबी अवधि की लायबिलिटी है। आम तौर पर 15 से 20 साल के लिए लोग होम लोन लेते हैं। इसकी EMI हर महीने आपकी इनकम से कटेगी। इसलिए यह तय करना जरूरी है कि आप कितनी EMI का पेमेंट आराम से कर सकते हैं। अगर बैंक आपको ज्यादा लोन अमाउंट ऑफर करता है और आपको उसे चुकाने में दिक्कत आ सकती है तो आपको ऑफर को ना कर देना चाहिए।
कई जरूरी खर्चों में नहीं कर सकते समझौता
हर महीने परिवार में कई ऐसे खर्च होते हैं, जिनके साथ समझौता नहीं किया जा सकता। इसमें बच्चों की स्कूल की फीस, इंश्योरेंस प्रीमियम, कार की किस्त, ऑफिस आने-जाने का पेट्रोल का खर्च, सेविंग्स और इनवेस्टमेंट्स और मेडिकल बिल्स शामिल हैं। होम लोन की EMI कटने के बाद आपके पैसा हर महीने इतने पैसे बचने चाहिए, जिससे परिवार के जरूरी खर्च ठीक तरह से पूरे हो जाएं।
EMI सैलरी के 30 फीसदी से ज्यादा नहीं
फाइनेंशियल प्लैनर्स का मानना है कि होम लोन की EMI आपकी कुल सैलरी का 30 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इससे आपको परिवार के दूसरे जरूरी खर्चों के साथ समझौता करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खासकर बच्चों के हायर एजुकेशन को लेकर कोई समस्या नहीं आएगी। कई लोग ज्यादा अमाउंट का होम लोन लेते हैं। फिर उनकी EMI ज्यादा आती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई को लेकर उन्हें समझौता करने को मजबूर होना पड़ता है।
घर खरीदने से ज्यादा जरूरी बच्चों का एजुकेशन
आज के समय में सबसे बड़ा और जरूरी निवेश बच्चों के हायर एजुकेशन पर होना चाहिए। जिस तरह से पढ़ाई का खर्च तेजी से बढ़ रहा है, उससे बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन दिलाना आसान नहीं है। कई माता-पिता तो बच्चों के हायर एजुकेशन को टॉप प्रायरिटी में रखते हैं। इसकी वजह यह है कि आप बड़ा घर बाद में भी खरीद सकते हैं। लेकिन, अगर सही समय पर आपने बच्चों के एचुकेशन पर फोकस नहीं किया तो यह मौका दोबारा नहीं आएगा।