होम लोन लेने से पहले कई बातों को समझना जरूरी है। होम लोन एक ऐसी जिम्मेदारी है, जो कई सालों तक आपके ऊपर रहेगी। होम लोन से खरीदा गया घर आपके वेल्थ क्रिएशन में हेल्पफुल हो सकता है। घर आपको वित्तीय सुरक्षा भी देता है। होम लोन आपको टैक्स-सेविंग्स में भी मदद करता है। अगर आप अपने लाइफ पार्टनर (पत्नी/पति) के साथ मिलकर यह लोन लेते हैं तो आप ज्यादा टैक्स-सेविंग्स कर सकेंगे। इससे ज्यादा लोन लेने का रास्ता भी खुल जाता है।
एक या एक से ज्यादा व्यक्ति मिलकर होम लोन ले सकते हैं। आम तौर पर पति और पत्नी मिलकर होम लोन लेते हैं। इसके कई फायदे हैं।
ज्यादा होम लोन अमाउंट: अपने लाइफ पार्टनर के साथ मिलकर ज्वाइंट होम लोन लेने से ज्यादा लोन लेने का रास्ता खुल जाता है। इसकी वजह यह है कि बैंक या एनबीएफसी पति और पत्नी दोनों की इनकम के आधार पर मैक्सिमम लोन अमाउंट तय करता है। ज्यादा होम लोन लेकर आप बड़ा घर खरीद सकते हैं।
दोनों पर फाइनेंशियल रिस्पॉन्सिबिलिटी: ज्वाइंट होम लोन में पति और पत्नी दोनों EMI में कंट्रिब्यूट करते हैं। इससे लोन चुकाने की जिम्मेदारी दोनों पर आती है। इससे वित्तीय अनुशासन भी बना रहता है।
ज्यादा टैक्स-सेविंग्स: पति और पत्नी दोनों होम लोन पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इससे टैक्स बेनेफिट्स डबल हो जाता है।
महिला बॉरोअर को अतिरिक्त बेनेफिट: कई बैंक महिला के प्राइमरी बॉरोअर होने पर इंटरेस्ट रेट में 0.05-0.10 फीसदी रियायत देते हैं। कुछ राज्यों में घर की रजिस्ट्री महिला के नाम पर होने पर स्टैंप ड्यूटी में भी छूट मिलती है। इससे प्रॉपर्टी की कुल खरीद कॉस्ट घट जाती है।
सेक्श 80सी और 24बी के तहत टैक्स-बेनेफिट्स
होम लोन अगर ज्वाइंट लिया गया है तो पति और पत्नी दोनों अलग-अलग टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।
-हर को-बॉरोअर प्रिंसिपल अमाउंट के पेमेंट पर 1.5 लाख रुपये का डिडक्शन क्लेम कर सकता है।
-यह डिडक्शन सेल्फ-ऑक्युपायड और रेंट पर दी गई प्रॉपर्टी, दोनों पर मिलता है।
- इंटरेस्ट अमाउंट पर डिडक्शन तभी मिलता है जब लोन किसी मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थान से ले लिया जाता है।
-अगर प्रॉपर्टी खुद के रहने के लिए इस्तेमाल की जा रही है तो दोनों को-बॉरोअर इंटरेस्ट पेमेंट पर 2 लाख रुपये तक का डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।
-घर किराया पर दिया गया है तो इंटरेस्ट पर डिडक्शन क्लेम करने के लिए अमाउंट की कोई लिमिट नहीं है। लेकिन, 'इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी' हेड के तहत होने वाले लॉस को दूसरी इनकम के साथ हर वित्त वर्ष में मैक्सिम 2 लाख तक सेट-ऑफ किया जा सकता है।
इस तरह पति और पत्नी दोनों के अलग-अलग डिडक्शन क्लेम करने पर एक वित्त वर्ष में 7 लाख रुपये (हर व्यक्ति 1.5 लाख रुपये प्लस 2 लाख रुपये) तक का कुल डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।