नई टैक्स रिजीम में ₹13.5 लाख तक की इनकम होगी पूरी तरह 'Tax-Free'! बस अपनाएं ये सीक्रेट NPS ट्रिक
NPS Tax Benefit New Tax Regime: एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक खास सरकारी स्कीम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और स्मार्ट सैलरी रिस्ट्रक्चरिंग के जरिए आप अपनी इफेक्टिव टैक्स-फ्री इनकम लिमिट को ₹12 लाख से बढ़ाकर ₹13.5 लाख कर सकते हैं। जानिए इसका पूरा गणित और आप इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं
NPS और स्मार्ट सैलरी रिस्ट्रक्चरिंग के जरिए आप अपनी इफेक्टिव टैक्स-फ्री इनकम लिमिट को ₹12 लाख से बढ़ाकर ₹13.5 लाख कर सकते हैं
Tax Free Income to 13.5 Lakh: देश के अधिकांश नौकरीपेशा लोग टैक्स बचाने के लिए नई टैक्स व्यवस्था(NPS) को अपना रहे हैं। लेकिन नई टैक्स रिजीम में आम तौर पर माना जाता है कि केवल ₹12 लाख तक की सालाना सैलरी ही टैक्स फ्री हो पाती है। ऐसे में सैलरीड क्लास के लिए टैक्स बचाने के रास्ते बहुत सीमित रह गए हैं।
लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक खास सरकारी स्कीम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और स्मार्ट सैलरी रिस्ट्रक्चरिंग के जरिए आप अपनी इफेक्टिव टैक्स-फ्री इनकम लिमिट को ₹12 लाख से बढ़ाकर ₹13.5 लाख कर सकते हैं। आइए समझते हैं कि यह पूरा गणित कैसे काम करता है और आप इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं।
क्या है धारा 80CCD(2) का ये 'टैक्स फ्री' सीक्रेट?
एक रिपोर्ट में KFintech में NPS के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट राजेश खंडागले ने बताया कि, नई टैक्स व्यवस्था में पुराने रिजीम के लगभग सभी डिडक्शन खत्म कर दिए गए हैं। लेकिन, नियोक्ता यानी कंपनी की तरफ से एनपीएस में किया जाने वाला योगदान आज भी इसका एक बड़ा अपवाद है।
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80CCD(2) के तहत कंपनी द्वारा कर्मचारी के एनपीएस खाते में जमा की गई रकम पर टैक्स छूट मिलती है। सबसे खास बात यह है कि नई टैक्स व्यवस्था में भी यह डिडक्शन पूरी तरह लागू रहता है।
समझिए ₹13.5 लाख की टैक्स-फ्री लिमिट का गणित
नियमों के मुताबिक, कोई भी कंपनी अपने कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का अधिकतम 14% तक हिस्सा उसके एनपीएस अकाउंट में कंट्रीब्यूट कर सकती है। यह पूरी रकम कर्मचारी की कुल टैक्सेबल इनकम से घटा दी जाती है।
मान लीजिए आपकी सालाना बेसिक सैलरी और DA मिलाकर ₹10 लाख है। इस स्थिति में आपकी कंपनी आपके एनपीएस खाते में ₹1.4 लाख का योगदान दे सकती है। यह ₹1.4 लाख आपकी टैक्सेबल इनकम से कम हो जाएंगे, जिससे आपकी टैक्स-फ्री सैलरी की प्रभावी सीमा ₹12 लाख से बढ़कर सीधे ₹13.5 लाख के करीब पहुंच जाएगी।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, धारा 80CCD(2) के तहत मिलने वाले इस डिडक्शन की कोई अधिकतम लिमिट तय नहीं है, यह पूरी तरह आपकी बेसिक सैलरी पर निर्भर करता है।
बड़ी सैलरी वालों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
चूंकि एनपीएस में कंपनी का यह योगदान आपकी बेसिक सैलरी और डीए से लिंक होता है, इसलिए जिन कर्मचारियों का सैलरी ब्रैकेट जितना बड़ा होगा, उनकी टैक्स सेविंग भी उतनी ही ज्यादा होगी।
इस टेबल से समझें पूरा कैलकुलेशन:
बेसिक सैलरी + DA (सालाना)
कंपनी का अधिकतम योगदान (14%)
₹8 लाख
₹1.12 लाख
₹10 लाख
₹1.40 लाख
₹12 लाख
₹1.68 लाख
₹15 लाख
₹2.10 लाख
₹20 लाख
₹2.80 लाख
इस तरह आप न सिर्फ हर साल अपना मोटा टैक्स बचा पाएंगे, बल्कि रिटायरमेंट के लिए भी एक बहुत बड़ा फंड आसानी से तैयार कर लेंगे।
फायदेमंद होने के बावजूद लोग क्यों चूक रहे हैं मौका?
राजेश खंडागले बताते हैं कि कॉरपोरेट एनपीएस के इतने सारे फायदे होने के बावजूद अभी भी बहुत कम लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनियों और कर्मचारियों के बीच जागरूकता की कमी है। कई कॉर्पोरेट्स को अभी भी इसके टैक्स बेनिफिट्स की पूरी जानकारी नहीं है।
अगर आपकी कंपनी में यह सुविधा नहीं है, तो कंपनियां पीओपी (POPs) या सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों (CRAs) से संपर्क करके इस सिस्टम को आसानी से लागू कर सकती हैं।
सिस्टम में बदलाव करना बेहद आसान
कई कंपनियों को लगता है कि सैलरी स्ट्रक्चरबदलकर एनपीएस लागू करना काफी पेचीदा काम है, लेकिन ऐसा नहीं है। आजकल ज्यादातर कंपनियों के एचआरएमएस (HRMS) और पेरोल सॉफ्टवेयर पहले से ही एनपीएस योगदान को सपोर्ट करते हैं। यह ठीक वैसे ही काम करता है जैसे आपकी सैलरी से पीएफ (PF) का पैसा कटता है।
कर्मचारियों के लिए भी अब यह प्रोसेस पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। केफिनटेक जैसी एजेंसियों ने ऐसे सिस्टम तैयार किए हैं जहां कर्मचारी महज कुछ सेकंड्स में इस डिजिटल ऑनबोर्डिंग का हिस्सा बन सकते हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।