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Escrow Account: रिस्की डील है? जानिए खरीदने और बेचने वाले को कैसे भरोसा देता है एस्क्रो अकाउंट

Escrow Account: क्या आपका पैसा डील से पहले सुरक्षित है? एस्क्रो अकाउंट कैसे खरीददार और विक्रेता दोनों को सुरक्षा देता है, कहां होता है इस्तेमाल, और इसके फायदे-नुकसान क्या हैं? जानिए पूरी डिटेल।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Jul 21, 2025 पर 6:24 PM
Escrow Account: रिस्की डील है? जानिए खरीदने और बेचने वाले को कैसे भरोसा देता है एस्क्रो अकाउंट
एस्क्रो अकाउंट एक ऐसा बैंक खाता होता है, जिसमें लेनदेन की प्रक्रिया पूरी होने तक पैसा सुरक्षित रूप से रखा जाता है।

Escrow Account: अगर आपने कभी किसी कंपनी में निवेश किया है, रियल एस्टेट खरीदी है या कोई हाई-वैल्यू लेनदेन किया है, तो आपने 'एस्क्रो अकाउंट' (Escrow Account) शब्द जरूर सुना होगा। एस्क्रो एक ऐसा फाइनेंशियल अरेंजमेंट होता है, जिसमें खरीदार और विक्रेता के बीच एक तीसरी पार्टी- एस्क्रो एजेंसी या अधिकारी को जोड़ा जाता है। यह एजेंसी उस रकम या किसी भी तरह की संपत्ति को तब तक अपने पास रखती है, जब तक डील की शर्तें पूरी नहीं हो जातीं।

एस्क्रो का मकसद जोखिम कम करना और दोनों पक्षों में भरोसा बढ़ाना होता है। बेचने वाले को तभी भुगतान किया जाता है, जब वह एस्क्रो समझौते की सभी शर्तें पूरी कर देता है। वहीं, खरीदने वाले के पैसे भी तभी जाते हैं, जब समझौता पूरा हो जाता है।

एस्क्रो अकाउंट क्या होता है?

एस्क्रो अकाउंट एक ऐसा बैंक खाता होता है, जिसमें लेनदेन की प्रक्रिया पूरी होने तक पैसा सुरक्षित रूप से रखा जाता है। इसका मतलब है कि एक भरोसेमंद तीसरी पार्टी (जैसे Escrow.com) उस पैसे को तब तक सुरक्षित रखती है। अगर विक्रेता ने तय शर्तें पूरी कर लीं, तो उसे भुगतान मिल जाता है। अगर वह ऐसा नहीं करता, तो खरीदार को उसका पैसा वापस मिल जाता है।

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