अगर आप अपना EPF पासबुक चेक करते हैं और उसमें NCP Days लिखा दिखता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। EPFO के अनुसार NCP यानी नॉन कॉन्ट्रीब्यूटरी पीरियड वह दिन होते हैं जब आपके PF में कोई पैसा जमा नहीं होता। ऐसा आमतौर पर तब होता है जब आप बिना सैलरी की छुट्टी पर होते हैं, नौकरी बदलने के बीच गैप होता है या किसी महीने सैलरी नहीं मिलती। इन दिनों को रिकॉर्ड में नॉन कॉन्ट्रीब्यूटरी पीरियड के रूप में दिखाया जाता है।
क्या इससे PF पर असर पड़ता है?
अच्छी बात यह है कि NCP Days होने से आपका PF अकाउंट बंद नहीं होता और न ही आपकी सर्विस खत्म मानी जाती है। अगर आप हर नौकरी बदलने पर अपना PF ट्रांसफर करते रहते हैं, तो 5 साल की सर्विस पूरी होने पर आप PF पैसा टैक्स-फ्री निकाल सकते हैं।
PF निकालने पर टैक्स नहीं देना हो, इसके लिए जरूरी है कि आप कुल मिलाकर 5 साल यानी 60 महीने नौकरी करें। यह जरूरी नहीं कि आप एक ही कंपनी में काम करें। बस PF ट्रांसफर करते रहें।
पेंशन पर क्या असर पड़ेगा?
यहां NCP Days थोड़ा फर्क डालते हैं। पेंशन (EPS) पाने के लिए 10 साल की योगदान वाली नौकरी जरूरी होती है। यानी जिन दिनों में PF जमा नहीं हुआ (NCP Days), वो इस गिनती में नहीं आते। अगर आपके कुल योगदान वाले साल 10 से कम रह जाते हैं, तो आपको पेंशन नहीं मिलेगी। उस स्थिति में आप सिर्फ जमा पैसा निकाल पाएंगे।
पेंशन की रकम भी कम हो सकती है?
अगर आपके रिकॉर्ड में NCP Days ज्यादा हैं, तो आपकी औसत सैलरी कम मानी जा सकती है, जिससे पेंशन का अमाउंट भी घट सकता है। EPF से जुड़ी इंश्योरेंस स्कीम (EDLI) में 60 दिन तक का गैप माफ किया जा सकता है, लेकिन यह सिर्फ इंश्योरेंस के लिए है, पेंशन के लिए नहीं।