घने कोहरे में बढ़ जाते हैं सड़क हादसे, एक्सीडेंट के बाद कैसे मिलेगा इंश्योरेंस क्लेम, जानें जरूरी बातें

सर्दियों में उत्तर भारत के कई इलाकों में घना कोहरा पड़ता है। इससे सड़कों पर विजिबिलिटी काफी कम हो जाती है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। खासकर हाईवे पर कई बार एक साथ कई गाड़ियों की टक्कर हो जाती है। ऐसे मामलों में नुकसान भी ज्यादा होता है

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 4:38 PM
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इंश्योरेंस कंपनियों के मुताबिक कोहरे की वजह से हुए हादसों में भी क्लेम का प्रोसेस लगभग सामान्य एक्सीडेंट जैसी ही होती है।

सर्दियों में उत्तर भारत के कई इलाकों में घना कोहरा पड़ता है। इससे सड़कों पर विजिबिलिटी काफी कम हो जाती है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। खासकर हाईवे पर कई बार एक साथ कई गाड़ियों की टक्कर हो जाती है। ऐसे मामलों में नुकसान भी ज्यादा होता है। हालांकि इंश्योरेंस कंपनियों के मुताबिक कोहरे की वजह से हुए हादसों में भी क्लेम का प्रोसेस लगभग सामान्य एक्सीडेंट जैसी ही होती है।

कोहरे में हादसों में क्यों बढ़ जाती है मुश्किल

इंश्योरेंस एक्सपर्ट का कहना है कि कोहरे में होने वाले हादसों में अक्सर कई गाडियां शामिल होती हैं। ऐसे मामलों में नुकसान का आकलन करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। हाल ही में दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे पर भी कम विजिबिलिटी के कारण कई गाड़ियों की टक्कर हुई थी। कुछ मामलों में टक्कर इतनी तेज थी कि गाड़ियों में आग तक लग गई और कई गाडियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। जब एक ही हादसे में कई लोग क्लेम करते हैं, तो बीमा कंपनियां एक्स्ट्रा जांच करती हैं। इससे क्लेम सेटलमेंट में थोड़ा समय लग सकता है।


क्यों जरूरी है सही इंश्योरेंस कवर

एक्सपर्ट का कहना है कि गाडियां मालिकों को केवल थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। बेहतर सुरक्षा के लिए कम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस लेना जरूरी है। इससे हादसे की स्थिति में अपने गाडियां के नुकसान की भरपाई भी हो सकती है।

इसके साथ ही पॉलिसी लेते समय इंश्योर्ड डिक्लेयर वैल्यू (IDV) सही रखना भी जरूरी है। IDV गाडियां की अनुमानित बाजार कीमत होती है। अगर IDV कम रखी गई है, तो गाडियां के पूरी तरह खराब होने की स्थिति में मिलने वाला मुआवजा भी कम हो सकता है।

एड-ऑन कवर से मिल सकती है सेफ्टी

बीमा कंपनियां कई तरह के एड-ऑन कवर भी देती हैं। जैसे जीरो डिप्रिसिएशन कवर, रिटर्न-टू-इनवॉइस कवर और रोडसाइड असिस्टेंस। ये विकल्प लेने से दुर्घटना के बाद अधिक वित्तीय सुरक्षा मिल सकती है और कुछ मामलों में ज्यादा क्लेम भी मिल सकता है।

ड्राइवर की लापरवाही पड़ सकती है भारी

इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम करते समय ड्राइवर के व्यवहार की भी जांच करती हैं। अगर जांच में पता चलता है कि चालक ने जरूरी सावधानियां नहीं बरतीं, तो क्लेम खारिज भी किया जा सकता है।

कोहरे में गाड़ी चलाते समय धीमी रफ्तार, फॉग लाइट का इस्तेमाल और आगे चल रहे गाडियां से दूरी बनाए रखना जरूरी होता है। अगर चालक ने इन नियमों को नजरअंदाज किया हो या क्लेम करते समय गलत जानकारी दी हो, तो बीमा कंपनी भुगतान से इनकार कर सकती है।

क्लेम करते समय रखें इन बातों का ध्यान

दुर्घटना होने पर तुरंत पुलिस और बीमा कंपनी को जानकारी देनी चाहिए। साथ ही घटना से जुड़ी सही और पूरी जानकारी देना जरूरी है। गलत या अधूरी जानकारी देने पर क्लेम रद्द हो सकता है।

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