11 महीने का रेंट एग्रीमेंट खत्म होने के बाद अगर किरायेदार मकान खाली करने से इनकार कर दे, तो ज्यादातर मकान मालिक परेशान हो जाते हैं। गुस्सा, डर और कानूनी उलझन तीनों साथ चलने लगते हैं। हालांकि कानून आमतौर पर प्रॉपर्टी ओनर के पक्ष में होता है, लेकिन एक भी गलत कदम मालिक की मुश्किलें बढ़ा सकता है। कानूनी तौर पर जैसे ही तय पीरियड वाला खत्म होता है, किरायेदार का मकान में रहने का अधिकार भी समाप्त हो जाता है। अगर नया एग्रीमेंट नहीं किया गया है, तो ऐसे व्यक्ति को अनधिकृत कब्जाधारी माना जा सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मकान मालिक खुद ही कार्रवाई करने लगे।
ये गलतियां बिल्कुल न करें
जबरदस्ती मकान खाली कराना।
ये सभी कदम गैरकानूनी हैं और इससे मकान मालिक पर आपराधिक केस तक हो सकता है।
रेंट एग्रीमेंट खत्म हो चुका है।
15 से 30 दिन के भीतर मकान खाली किया जाए।
अक्सर सिर्फ नोटिस मिलने पर ही किरायेदार मकान छोड़ देता है। इसमें ओवरस्टे करने पर मुआवजे या डैमेज की मांग भी की जा सकती है।
किराया लेते रहना बन सकता है मुसीबत
अगर एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी किराया लिया जा रहा है, तो मामला उलझ सकता है। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 106 के तहत इसे महीने-दर-महीने की किरायेदारी माना जा सकता है। ऐसे में मकान मालिक को पहले 15 दिन का लिखित नोटिस देकर किरायेदारी खत्म करनी होगी।
एग्रीमेंट खत्म होने के बाद किराया न लें।
अगर किराया आ जाए, तो तुरंत रिफंड करें।
लिखित रूप में बताएं कि एग्रीमेंट खत्म हो चुका है।
डिजिटल पेमेंट में और सावधानी जरूरी
आजकल UPI या बैंक ट्रांसफर से किराया आ जाता है। अगर एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी किराया स्वीकार किया गया, तो कोर्ट इसे किरायेदार की सहमति मान सकता है।
WhatsApp, ईमेल या नोटिस में साफ लिखें कि किराया स्वीकार नहीं है।
कोर्ट और पुलिस की भूमिका।
अगर किरायेदार नोटिस के बाद भी नहीं जाता, तो मकान मालिक सिविल कोर्ट में बेदखली का केस दाखिल कर सकता है। सही दस्तावेज हों, तो कई मामलों में कोर्ट पहली सुनवाई में ही मालिक के पक्ष में आदेश दे देता है।
पुलिस आमतौर पर ऐसे मामलों में दखल नहीं देती क्योंकि यह सिविल विवाद होता है।
तो IPC की धाराओं के तहत पुलिस में शिकायत की जा सकती है।
सबसे बड़ी गलती - चुप रहना
एग्रीमेंट खत्म होने के बाद।
बिना आपत्ति किराया लेते रहना।
ये सब मकान मालिक का केस कमजोर कर देते हैं।