सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने इनकम टैक्स की नई रीजीम को लेकर नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें कहा गया है कि अगर कोई एंप्लॉयी ओल्ड टैक्स रीजीम को सेलेक्ट करना भूल जाता है तो न्यू टैक्स रीजीम उसकी डिफॉल्ट रीजीम मान ली जाएगी। फिर, इस रीजीम के हिसाब से TDS काटा जाएगा। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करते वक्त कहा था कि FY24 से टैक्स की नई रीजीम डिफॉल्ट रीजीम होगी। इससे पहले इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम डिफॉल्ट रीजीम होती थी।
सीबीडीटी के सर्कुलर में कहा गया है कि अगर एंप्लॉयी की तरफ से कंपनी के फाइनेंस डिपार्टमेंट को टैक्स रीजीम के बारे में नहीं बताया जाता है तो यह मान लिया जाएगा कि एंप्लॉयी डिफॉल्ट रीजीम का इस्तेमाल करना चाहता है। ऐसी स्थिति में एंपलॉयर सेक्शन 192 के तहत सोर्स पर टैक्स कटौती कर सकता है। एंप्लॉयी से टैक्स रीजीम की जानकारी हासिल करना एंप्लॉयर की जिम्मेदारी है।
नई रीजीम में भी ये सुविधाएं
इनकम टैक्स की नई रीजीम में बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया गया है। सेक्शन 87ए के तहत मिलने वाले रिबेट को बढ़ाकर सालाना 7 लाख रुपये की इनकम तक पर कर दिया गया है। नई टैक्स रीजीम का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को 50,000 रुपये से स्टैंडर्ड डिडक्शन का भी फायदा मिलेगा। इनकम टैक्स की नई रीजीम में टैक्स के छह स्लैब हैं।
80सी के तहत डिडक्शन का लाभ पुरानी रीजीम में
अगर कोई व्यक्ति इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे सेक्शन 80सी के तहत टैक्स डिडक्शन की इजाजत मिलेगी। इससे उसकी टैक्सेबल इनकम 1.5 लाख रुपये तक घट जाएगी। टैक्स स्लैब और बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। ओल्ड टैक्स रीजीम में होम लोन और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर डिडक्शन की इजाजत है। जो एंप्लॉयी ओल्ड टैक्स रीजीम का इस्तेमाल करना चाहते हैं उन्हें हर साल इसकी जानकारी अपने एंप्लॉयर को देनी होगी।
एक बार सेलेक्ट करने के बाद बदल नहीं सकेंगे
टैक्सपेयर को यह याद रखना होगा कि अगर उसने एक बार टैक्स रीजीम को सेलेक्ट कर लिया है तो उसे फाइनेंशियल ईयर के दौरान बदल नहीं सकेगा। इसीलिए टैक्सपेयर्स को खूब सोचसमझकर इनकम टैक्स की सही रीजीम का चुनाव अपने लिए करना चाहिए।