आज के समय में जब हर व्यक्ति अपने सपनों को पूरा करने के लिए लोन पर निर्भर होता है चाहे वह घर खरीदना हो, गाड़ी लेना हो या बिजनेस शुरू करना तो सबसे बड़ी बाधा बनता है क्रेडिट स्कोर। रिपोर्ट्स बताती है कि अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है, तो न सिर्फ लोन जल्दी अप्रूव होता है बल्कि ब्याज दरें भी कम मिलती हैं।
क्रेडिट स्कोर को आसान भाषा में समझें तो यह आपकी वित्तीय आदतों का रिपोर्ट कार्ड है। अगर आप समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल चुकाते हैं, तो यह स्कोर ऊपर जाता है। वहीं, देरी करने पर यह गिरता है और बैंक या NBFC आपको जोखिमभरा ग्राहक मानते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 750 से ऊपर का स्कोर सबसे सुरक्षित माना जाता है। ऐसे ग्राहकों को बैंक तुरंत लोन देने के लिए तैयार रहते हैं। वहीं जिनका स्कोर 650 से नीचे है, उन्हें लोन अप्रूवल में मुश्किलें आती हैं और ब्याज दरें भी ज्यादा चुकानी पड़ती हैं।
क्रेडिट स्कोर सुधारने के लिए कुछ आसान कदम बताए गए हैं:
- समय पर भुगतान करें: चाहे EMI हो या क्रेडिट कार्ड बिल, देरी न करें।
- क्रेडिट कार्ड लिमिट का सही इस्तेमाल करें: लिमिट का 30-40% से ज्यादा खर्च करना स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है।
- पुराने लोन अकाउंट्स बंद न करें: लंबे समय तक चलने वाले अकाउंट्स आपकी विश्वसनीयता दिखाते हैं।
- नए लोन बार-बार न लें: लगातार नए लोन लेने से बैंक को लगता है कि आप वित्तीय दबाव में हैं।
रिपोर्ट में एक उदाहरण भी दिया गया है। राहुल, जो दिल्ली में रहते हैं, ने शुरुआत में क्रेडिट कार्ड बिलों को हल्के में लिया और कई बार लेट पेमेंट किया। नतीजा यह हुआ कि उनका स्कोर गिरकर 640 पर आ गया। जब उन्होंने होम लोन के लिए अप्लाई किया तो बैंक ने या तो मना कर दिया या बहुत ऊंची ब्याज दर ऑफर की। बाद में राहुल ने अपनी आदतें सुधारीं समय पर भुगतान किया और खर्चों को नियंत्रित किया। धीरे-धीरे उनका स्कोर 760 तक पहुंच गया और उन्हें बेहतर शर्तों पर लोन मिल गया।