Advance Tax: मार्च 15 तक जमा करना है एडवांस टैक्स, नहीं जमा करने पर लगेगा जुर्माना

Advance Tax: फाइनेंशियल ईयर खत्म होने में काफी कम समय बचा है। टैक्सपेयर्स के लिए एडवांस टैक्स जमा करने की चौथी और आखिरी किश्त जमा करने की डेडलाइन पास आ गई है। टैक्सपेयर्स को 15 मार्च 2026 तक एडवांस टैक्स जमा करना होता है

अपडेटेड Mar 10, 2026 पर 4:13 PM
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Advance Tax: फाइनेंशियल ईयर खत्म होने में काफी कम समय बचा है।

Advance Tax: फाइनेंशियल ईयर खत्म होने में काफी कम समय बचा है। टैक्सपेयर्स के लिए एडवांस टैक्स जमा करने की चौथी और आखिरी किश्त जमा करने की डेडलाइन पास आ गई है। टैक्सपेयर्स को 15 मार्च 2026 तक एडवांस टैक्स जमा करना होता है। टाइमलाइन तक जमा नहीं करने पर ब्याज और पेनाल्टी लग सकती है।

क्या होता है एडवांस टैक्स

एडवांस टैक्स वह टैक्स है जो व्यक्ति या बिजनेस अपनी अनुमानित सालाना आय के आधार पर पहले ही किस्तों में जमा करते हैं। इसका मकसद यह है कि साल के आखिर में एक साथ बड़ा टैक्स न देना पड़े। एडवांस टैक्स पूरे फाइनेंशियल ईयर में अलग-अलग किस्तों में जमा किया जाता है।


किसे देना पड़ता है एडवांस टैक्स

अगर किसी व्यक्ति की कुल टैक्स देनदारी 10,000 रुपये या उससे ज्यादा है और यह अमाउंट टीडीएस के बाद बचती है, तो उसे एडवांस टैक्स देना जरूरी होता है। इसमें सैलरी पाने वाले ऐसे लोग भी शामिल हो सकते हैं जिनकी किराया, ब्याज, शेयर बाजार या फ्रीलांस काम से अतिरिक्त आय होती है। इसके अलावा प्रोफेशनल्स, फ्रीलांसर और कारोबार करने वाले लोगों को भी एडवांस टैक्स भरना पड़ सकता है।

कब तक जमा करना होगा

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए एडवांस टैक्स की चौथी और आखिरी किस्त 15 मार्च 2026 तक जमा करनी होगी। इस तारीख के बाद पेमेंट करने पर इनकम टैक्स विभाग ब्याज लगा सकता है।

एडवांस टैक्स कैसे जमा करें

एडवांस टैक्स ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीके से जमा किया जा सकता है। इसके लिए चालान नंबर ITNS 280 का इस्तेमाल किया जाता है। ऑनलाइन पेमेंट के लिए इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर e-pay tax विकल्प चुनना होता है। इसके बाद पैन नंबर, मोबाइल नंबर और ओटीपी की मदद से लॉगिन करके टैक्स की अमाउंट जमा की जा सकती है।

देर होने पर कितना लगेगा जुर्माना

अगर टैक्सपेयर्स समय पर एडवांस टैक्स जमा नहीं करते हैं या कम अमाउंट जमा करते हैं, तो इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 234B और 234C के तहत ब्याज देना पड़ सकता है। टैक्स एक्सपर्ट के मुताबिक ऐसी स्थिति में हर महीने या महीने के हिस्से पर 1% ब्याज लगाया जाता है। अगर साल के अंत तक कुल टैक्स का 90% से कम पेमेंट किया गया है, तो भी एक्स्ट्रा ब्याज देना पड़ सकता है।

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