कई टैक्सपेयर्स का रिफंड अब तक नहीं आया है। आम तौर पर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के 3-4 हफ्ते में रिफंड का पैसा टैक्सपेयर्स के बैंक अकाउंट में आ जाता है। कम अमाउंट के रिफंड से जुड़े रिटर्न की प्रोसेसिंग जल्द होती है। ज्यादा अमाउंट का रिफंड आने में थोड़ा समय लगता है। हालांकि, कुछ खास वजहों से भी रिफंड अटक जाता है। आइए इन वजहों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
1. गलत बैंक अकाउंट या बैंक अकाउंट का वैलिडेट नहीं होना
Income Tax Refund के लिए बैंक अकाउंट का प्री-वैलिडेट होना जरूरी है। आपको इनम टैक्स डिपार्टमेंट के ई-पोर्टल पर जाकर यह चेक करने की जरूरत है कि आपका बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेटेड है या नहीं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट प्री-वैलिडेटेड बैंक अकाउंट में ही रिफंड भेजता है।
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद उसे वेरिफाय करना जरूरी है। इसे ऑनलाइन ई-वेरिफाय किया जा सकता है। इसे ऑफलाइन वेरिफाय करने की भी सुविधा है। इसके लिए ITR-V पर हस्ताक्षर कर इसे बेंगलुरु में सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग यूनिट (CPC) को स्पीडपोस्ट से भेजना पड़ता है। फाइल करने की तारीख से 30 दिन के अंदर रिटर्न को वेरिफाय करना जरूरी है। वेरिफाय नहीं किए गए रिटर्न को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट प्रोसेस नहीं करता है।
3. डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस के जवाब में देरी
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट रिटर्न में किसी तरह का डिफेक्ट होने पर टैक्सपेयर को नोटिस इश्यू करता है। इसमें टैक्सपेयर को 15 दिन के अंदर डिफेक्ट्स दूर करने के लिए कहा जाता है। अगर टैक्सपेयर इसके लिए ज्यादा समय चाहता है तो वह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से अनुरोध कर सकता है। टैक्सपेयर के समय पर नोटिस का जवाब नहीं देने पर उसके रिटर्न की प्रोसेसिंग नहीं हो पाती है, जिससे उसका रिफंड अटक जाता है।
4. डिडक्शंस या एग्जेम्प्शंस के लिए गलत क्लेम
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट डिडक्शंस और एग्जेम्प्शन के क्लेम की बारीकी से जांच करता है। अगर डिपार्टमेंट को ऐसा लगता है कि टैक्सपेयर की तरफ से डिडक्शंस या एग्जेमप्शंस के लिए किया गया क्लेम गलत है तो वह रिटर्न की प्रोसेसिंग नहीं करता है, जिससे रिफंड अटक जाता है। अगर टैक्सपेयर को ऐसा लगता है कि उसने कोई गलत डिडक्शन क्लेम किया है तो वह रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकता है।