Income Tax Budget 2026: क्या इनकम टैक्स की नई और पुरानी रीजीम को लेकर आप भी कनफ्यूज्ड हैं?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सही टैक्स प्लानिंग के लिए टैक्सपेयर्स को नई रीजीम और पुरानी रीजीम के बीच के फर्क के बारे में जानना जरूरी है। सरकार ने यूनियन बजट 2020 में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 115बीएसी के तहत नई रीजीम का ऐलान किया था। यह वित्त वर्ष 2020-21 से लागू हो गई। इसमें ज्यादातर डिडक्शन और एग्जेम्प्शन के फायदे नहीं मिलते हैं

अपडेटेड Jan 14, 2026 पर 8:00 PM
Story continues below Advertisement
इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के पास हर साल नई रीजीम और पुरानी रीजीम में स्विच करने का विकल्प है।

टैक्सपेयर्स की नजरें हर साल यूनियन बजट में होने वाले ऐलान पर टिकी होती हैं। वित्तमंत्री 1 फरवरी को यूनियन बजट 2026 पेश करेंगी। वह लगातार 9वीं बार बजट पेश करेंगी। उन्होंने पिछले सालों में इनकम टैक्स में बड़े रिफॉर्म्स किए हैं। पहले टैक्सपेयर्स के सामने नई और पुरानी रीजीम का विकल्प नहीं होता था। सीतारमण ने 2020 में नई रीजीम की शुरुआत की। अब इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को काफी सहूलियत हो गई है। कई टैक्सपेयर्स नई और पुरानी रीजीम को लेकर कनफ्यूज्ड रहते हैं।

नई रीजीम की खास बातें

सरकार ने यूनियन बजट 2020 में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 115बीएसी के तहत नई रीजीम का ऐलान किया था। यह वित्त वर्ष 2020-21 से लागू हो गई। इसमें ज्यादातर डिडक्शन और एग्जेम्प्शन के फायदे नहीं मिलते हैं। लेकिन टैक्स के रेट्स कम हैं। यूनियन बजट 2023 में सरकार ने इसे डिफॉल्ट रीजीम बनाने का ऐलान किया। तब नई रीजीम में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को भी 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई। सेक्शन 87ए के तहत फुल टैक्स रिबेट क्लेम करने के लिए इनकम की लिमिट बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दी गई। इसके अलावा नई रीजीम में सैलरीड इंडिविजुअल्स और पेंशनर्स के लिए 50,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन का ऐलान किया गया।


पिछले बजट में बड़े ऐलान

यूनियन बजट 2025 में सरकार ने नई रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया। साथ ही बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट भी बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी। नई रीजीम में सरकार ने सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी। नौकरी करने वाले लोगों को तो अब 12.75 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है। इसे टैक्सपेयर्स को बड़े तोहफे के रूप में देखा गया। नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने की कोशिश का फायदा दिखा है। ज्यादा इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स अब नई रीजीम का इस्तेमाल कर रहे हैं।

new regime

ओल्ड रीजीम की खास बातें

ओल्ड रीजीम को सरकार ने बंद नहीं किया है। खासकर इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के पास हर साल नई रीजीम और पुरानी रीजीम में स्विच करने का विकल्प है। पुरानी रीजीम में टैक्सपेयर्स को 70 से ज्यादा डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस क्लेम करने की इजाजत है। लेकिन, इसमें टैक्स के रेट्स ज्यादा हैं। पुरानी रीजीम में 60 साल की उम्र तक वाले इंडिविजुअल के लिए टैक्स के रेट्स अलग हैं। सीनियर सिटीजंस (60-80 साल) के लिए टैक्स के रेट्स अलग हैं। सुपर सीनियर सिटीजंस (80 साल से ज्यादा) के लिए टैक्स के रेट्स अलग हैं। इसमें सेक्शन 80सी, 80डी और सेक्शन 24बी के तहत मिलने वाले डिडक्शंस सबसे लोकप्रिय हैं।

old regime

नई और पुरानी रीजीम में सरचार्ज के नियम

सरकार उन इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स पर अतिरिक्त सरचार्ज लगाती है, जिनकी सालाना इनकम 50 लाख रुपये से ज्यादा होती है। नई रीजीम में 5 करोड़ रुपये से ज्यादा इनकम वाले लोगों पर मैक्सिमम सरचार्ज 25 फीसदी है। ओल्ड रीजीम में यह 37 फीसदी तक है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सही टैक्स प्लानिंग के लिए टैक्सपेयर्स को नई रीजीम और पुरानी रीजीम के बीच के फर्क के बारे में जानना जरूरी है।

surcharge

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।