Income Tax Budget 2026: निर्मला सीतारमण टैक्सपेयर्स के लिए कर सकती हैं ये 10 बड़े ऐलान

सरकार पिछले कुछ सालों से यूनियन बजट में टैक्सपेयर्स के लिए बड़े ऐलान करती आ रही है। टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि वित्तमंत्री इस साल भी यूनियन बजट मे टैक्सपेयर्स पर अपना फोकस बनाए रखेंगी

अपडेटेड Jan 15, 2026 पर 5:22 PM
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निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में नई रीजीम में सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी थी।

पिछले कुछ सालों से यूनियन बजट में सरकार का टैक्सपेयर्स पर ज्यादा फोकस रहा है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020 में इनकम टैक्स की नई रीजीम का ऐलान किया था। उसके बाद इसे अट्रैक्टिव बनाने के लिए उन्होंने हर साल कुछ बड़े ऐलान किए। पिछले बजट में उन्होंने नई रीजीम में सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी थी। इससे नई रीजीम में टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ी है। सवाल है कि इस बार यूनियन बजट में टैक्सपेयर्स के लिए वित्तमंत्री क्या-क्या ऐलान कर सकती हैं?

टैक्स स्लैब में बदलाव

वित्तमंत्री ने पिछले बजट में नई रीजीम के टैक्स स्लैब में बदलाव किया था। लेकिन, उन्होंने पुरानी रीजीम के टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार का फोकस इकोनॉमी में कंजम्प्शन बढ़ाने पर है। इसके लिए 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी गई है। सरकार ने जीएसटी के रेट्स में भी कमी की है। इस बार बजट वह खासकर ओल्ड रीजीम के टैक्स स्लैब में थोड़ा बदलाव कर सकती है।

टीडीएस रेट्स की संख्या


अभी टीडीएस के कई रेट्स लागू हैं। अलग-अलग तरह के ट्रांजेक्शंस पर टीडीएस के रेट्स भी अलग-अलग हैं। इससे टैक्सपेयर्स को काफी कनफ्यूजन होता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को टीडीएस रेट्स की संख्या में कमी करनी चाहिए। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण टीडीएस के रेट्स घटाकर सिर्फ 2-3 कर सकती हैं।

होम लोन पर ज्यादा डिडक्शन

रियल एस्टेट इंडस्ट्री होम लोन पर टैक्स बेनेफिट्स बढ़ाने की मांग पिछले कई सालों से कर रही है। अभी सेक्शन 24बी के तहत होम लोन के इंटरेस्ट पर सालाना 2 लाख रुपये तक का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इसे बढ़ाकर 4 लाख रुपये तक कर सकती हैं। यह डिडक्शन सिर्फ ओल्ड रीजीम में मिलता है।

पति-पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन

आईसीएआई ने सरकार को पति और पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन की शुरुआत करने की सलाह दी है। अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों में यह सिस्टम पहले से है। इससे परिवार पर टैक्स लायबिलिटी कम हो जाती है। इंडिया में अगर पति और पत्नी दोनों की इनकम है तो उन्हें अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है।

एलटीसीजी की टैक्स-फ्री लिमिट

सरकार यूनियन बजट में म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम और लिस्टेड कंपनियों के शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस की टैक्स-फ्री लिमिट बढ़ा सकती है। अभी एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है। सरकार इस लिमिट को बढ़ाकर कम से कम 1.5 लाख रुपये कर सकती है।

नई रीजीम में इंश्योरेंस पर डिडक्शन

इस बार यूनियन बजट में नई रीजीम में टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर डिडक्शन का ऐलान हो सकता है। अभी सिर्फ इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में सेक्शन 80सी के तहत टर्म इंश्योरेंस और सेक्शन 80डी के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर डिडक्शन मिलता है।

एफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा

सरकार एफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा में बदलाव कर सकती है। इससे घर खरीदने वाले लोगों को काफी फायदा होगा। अभी 45 लाख रुपये तक की कीमत वाले घर को एफोर्डेबल माना जाता है। सरकार इस लिमिट को बढ़ाकर 75 लाख रुपये तक कर सकती है।

ईवी को कम इंटरेस्ट रेट पर लोन

सरकार देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का इस्तेमाल बढ़ाना चाहती है। इसके लिए वह ईवी के लिए कम इंटरेस्ट रेट पर लोन के उपाय कर सकती है। इससे ईवी खरीदने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। इससे खासकर दिल्ली जैसे ब़ड़े शहरों में प्रदूषण की समस्या में कमी आएगी।

डेट फंड के टैक्स के नियम में बदलाव

सरकार ने यूनियन बजट 2023 में डेट फंड के टैक्स के नियमों में बदलाव किया था। अब 1 अप्रैल को या इसके बाद डेट फंड्स में निवेश पर टैक्स के नए नियम लागू होते हैं। अब डेट फंड्स से होने वाले गेंस सिर्फ शॉर्ट टर्म गेंस माने जाते हैं। इस पर इनवेस्टर्स के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इससे निवेशकों की दिलचस्पी डेट फंड्स में घटी है।

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पुरानी रीजीम में ज्यादा स्टैंडर्ड डिडक्शन

सरकार ने नई रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया है। लेकिन ओल्ड रीजीम में यह अभी भी 50,000 रुपये है। इस बीच महंगाई काफी बढ़ी है। ऐसे में सरकार ओल्ड रीजीम में भी स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने का ऐलान बजट में कर सकती है।

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