पिछले कुछ सालों में गोल्ड लोन में लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। पहले गोल्ड लोन में एनबीएफसी का दबदबा था। लेकिन, अब बैंक गोल्ड लोन बिजनेस में एनबीएफसी को कड़ी टक्कर दे रहे है। इसका फायदा ग्राहकों को मिला है। उनके लिए गोल्ड लोन के विकल्प बढ़े हैं। मुथूट फाइनेंस और मण्णपुरम फाइनेंस जैसी गोल्ड लोन कंपनियों को यूनियन बजट 2026 से काफी उम्मीदें हैं। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट का ऐलान करेंगी।
एनबीएफसी को चाहिए पीएसएल बेनेफिट्स
गोल्ड लोन देने वाली एनबीएफसी का कहना है कि गोल्ड लोन ज्यादातर कम इनकम वाले लोग लेते हैं। ज्यादातर गोल्ड लोन 50,000 रुपये से कम के होते हैं। आम तौर पर इस पैसे का इस्तेमाल इलाज, एजुकेशन, खेती-बाड़ी से संबंधित जरूरतें और छोटे बिजनेसेज के लिए वर्किंग कैपिटल के रूप में किया जाता है। बैंकों को ऐसे लोन पर प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) का बेनेफिट मिलता है। लेकिन, गोल्ड लोन एनबीएफसी को यह बेनेफिट नहीं मिलता है। इस वजह से एनबीएफसी को ज्यादा इंटरेस्ट रेट्स पर फंड जुटाने को मजबूर होना पड़ता है।
पीएसएल बेनेफिट्स से ग्राहकों को सस्ता लोन मिलेगा
गोल्ड एनबीएफसी का कहना है कि अगर प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग का दर्जा उन्हें मिलता है तो इससे उनकी कॉस्ट ऑफ फंड कम हो जाएगी। इससे वे ग्राहकों को कम इंटरेस्ट रेट पर गोल्ड लोन ऑफर कर सकेंगे। इससे छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को सस्ता लोन मिल सकेगा। बड़े शहरों के लोगों के लिए कर्ज के कई विकल्प उपलब्ध हैं। लेकिन, दूर-दराज के इलाकों में लोगों के लिए कर्ज के ज्यादा विकल्प नहीं हैं।
यूपीआई के जरिए गोल्ड क्रेडिट लाइन की फैसिलिटी
गोल्ड लोन इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार बजट में लोगों को यूपीआई के जरिए गोल्ड क्रेडिट लाइन की सुविधा दे सकती है। देश की आबादी का बड़ा हिस्सा यूपीआई का इस्तेमाल करता है। अगर एनबीएफसी की मदद से यूपीआई के जरिए गोल्ड-लिंक्ड क्रेडिट लाइन शुरू की जाती है तो इससे लोगों को काफी फायदा होगा। लोग यूपीआई की रिवॉल्विंग क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल कर यूपीआई अप्लिकेशंस के जरिए गोल्ड ज्वेलरी गिरवी रख सकते हैं। इससे जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत कर्ज मिल जाएगा। इससे लोगों को ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर लोन लेने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
सिंगल-काउंटरपार्टी एक्सपोजर लिमिट में भी राहत की मांग
अभी गोल्ड लोन एनबीएफसी के लिए दूसरे एनबीएफसी के मुकाबले सिंगल- काउंटरपार्टी एक्सपोजर लिमिट से जुड़े नियम काफी सख्त हैं, जबकि गोल्ड लोन पूरी तरह से सेक्योर्ड होते हैं। गोल्ड लोन का रीपमेंट रिकॉर्ड भी अच्छा है। अगर उनकी एक्सपोजर लिमिट टियर-1 कैपिटल का स्टैंडर्ड 20 फीसदी तक कर दी जाए तो पर्याप्त पूंजी वाली एनबीएफसी अपनी पूंजी का सही इस्तेमाल कर सकेंगी। इससे गोल्ड लोन इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा।