Income Tax: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन शुरू हो चुका है। कई लोग सोचते हैं कि ITR भरना सिर्फ टैक्स रिफंड पाने या औपचारिकता पूरी करने के लिए होता है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। इनकम टैक्स विभाग के पास बैंक, नियोक्ता, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और अन्य संस्थानों से मिलने वाला डेटा होता है। ऐसे में रिटर्न भरते समय छोटी सी गलती भी नोटिस, टैक्स डिमांड या रिफंड में देरी का कारण बन सकती है। इसलिए ITR फाइल करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच करना बेहद जरूरी है।
रिटर्न भरने का पहला कदम सही ITR फॉर्म का चयन है। आपकी इनकम, नौकरी, व्यवसाय, विदेशी इनकम और अन्य वित्तीय जानकारी के आधार पर अलग-अलग फॉर्म होते हैं। गलत फॉर्म भरने पर आपका रिटर्न अमान्य हो सकता है और बाद में दोबारा फाइल करना पड़ सकता है।
AIS और Form 26AS का मिलान करें
ITR भरने से पहले AIS, Form 26AS, Form 16 और प्री-फिल्ड डेटा को अच्छी तरह जांच लें। अगर किसी इनकम, TDS या निवेश की जानकारी में अंतर दिखे तो उसे पहले ठीक कर लें। इससे भविष्य में इनकम टैक्स विभाग की पूछताछ से बचा जा सकता है।
कई बार लोग सिर्फ सैलरी की जानकारी भरते हैं और बैंक ब्याज, किराया, फ्रीलांस इनकम या अन्य कमाई की जानकारी देना भूल जाते हैं। सभी प्रकार की इनकम को सही हेड के तहत दिखाना जरूरी है। इनकम छिपाने पर बाद में नोटिस आ सकता है।
अगर आपको ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, कम्यूटेड पेंशन या अन्य टैक्स-फ्री अमाउंट मिली है, तो उसे भी रिटर्न में दिखाना चाहिए। भले ही उस पर टैक्स न लगता हो, लेकिन उसे रिपोर्ट करना जरूरी है ताकि आपकी इनकम और निवेश में कोई असंगति न दिखे।
केवल सही छूट और डिडक्शन का दावा करें
80C, 80D या अन्य टैक्स छूट का दावा तभी करें जब आप उसके पात्र हों। गलत डिडक्शन या छूट का दावा करने पर अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और जुर्माना लग सकता है।
बैंक खाते की जानकारी जांचें
यदि आपको टैक्स रिफंड मिलना है, तो सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता इनकम टैक्स पोर्टल पर वैलिडेटेड और सक्रिय हो। गलत बैंक जानकारी के कारण रिफंड अटक सकता है।
रिटर्न जमा करने से पहले एक बार जरूर जांचें
रिटर्न फाइल करने से पहले नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल, इनकम, TDS, टैक्स भुगतान और बैंक खाते की जानकारी एक बार फिर जांच लें। कई बार छोटी गलतियां बाद में बड़ी परेशानी बन जाती हैं।
अंतिम तारीख का इंतजार न करें। समय पर रिटर्न दाखिल करने से लेट फीस और ब्याज से बचा जा सकता है। साथ ही पुराने टैक्स रिजीम का विकल्प चुनने जैसे कुछ लाभ भी समय पर फाइलिंग पर निर्भर करते हैं।
सिर्फ रिटर्न फाइल करना ही काफी नहीं है। फाइलिंग के बाद उसे 30 दिनों के भीतर वेरिफाई भी करना जरूरी है। यदि वेरिफिकेशन नहीं किया गया, तो इनकम टैक्स विभाग रिटर्न को अमान्य मान सकता है।