सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने 20 मार्च को 'प्रारंभ' (PRARAMBH) लॉन्च किया। यह टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए सीबीडीटी की पहल है। इससे इनकम टैक्स के नए नियमों को लागू करने में आसानी होगी। इस साल 1 अप्रैल से इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होने जा रहा है।
अग्रवाल ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और सीनियर अफसरों की मौजूदगी में इस मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इसमें उन्होंने PRARAMBH का मतलब बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल-Policy Reform and Responsible Action for Mission Viksit Bharat (PRARAMBH) के लिए है। उन्होंने कहा कि यह देश में टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन के सफर में एक बड़ा कदम है।
क्या नए टैक्स रूल्स और प्रोसेस तैयार किए गए हैं?
उन्होंने नई इनकम टैक्स एक्ट के बारे में बताते हुए कहा कि यह बदलाव सिर्फ नए कानून से नहीं जुड़ा है। इसका मकसद नोटिफाय किए गए रूल्स, फॉर्म्स और नए सिरे से तैयार किए गए प्रोसेस के जरिए टैक्सपेयर्स का भरोसा हासिल करना है। नए नियम आसान और स्पष्ट हैं। सरकार ने इनकम टैक्स के कई पुराने नियमों को खत्म कर दिया है। इससे कुल नियमों की संख्या काफी घट गई है।
छह करोड़ ट्रांजेक्शंस के लिए कंप्लायंस की जरूरत नहीं
टैक्स रिफॉर्म्स के महत्व के बारे में बताते हुए सीबीडीटी चेयरमैन ने कहा कि टैक्स के नियमों की संख्या 510 से घटाकर 333 कर दी गई है। फॉर्म्स की संख्या 399 से घटाकर 190 कर दी गई है। यह करीब 52 फीसदी की कमी है। उन्होंने कहा कि टैक्स सिस्टम को आसान बनाने से छह करोड़ से ज्यादा ट्रांजेक्शंस के लिए कंप्लायंस की जरूरत खत्म हो जाएगी।
टैक्सपेयर्स के लिए 2,200 एफएक्यू तैयार किए गए हैं
उन्होंने कहा कि टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए 2,200 एफएक्यू और 186 फॉर्म्स से ज्यादा गाइडेंस नोट तैयार किए गए हैं। सीबीडीटी चेयरमैन ने कहा कि प्रारंभ के तहत मल्टीमीडिया कंपेन, एजुकेशनल मैटेरियल और डिजिटल टूल्स शामिल होंगे। इससे नए एक्ट को लेकर समझ बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने 'कार साथी' के लॉन्च का भी ऐलान किया। यह एक AI-इनेबल्ड चैटबॉट है। यह 24 घंटे टैक्सपेयर्स की सहायता करेगा। इसके लिए यह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट का इस्तेमाल करेगा।
नई वेबसाइट और गाइडेंस टूल्स फेजेज में लॉन्च होंगे
अग्रवाल ने कहा कि नई वेबसाइट और गाइडेंस टूल्स सहित डिजिटल सर्विसेज को चरणबद्ध तरीके से लॉन्च किया जाएगा। इससे टैक्सपेयर्स को टैक्नोलॉजी आधारित एक्सपीरियंस मिलेगा। इसके साथ ही 'आयकर सेवा केंद्र' के जरिए भी मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इससे टैक्सपेयर्स को बगैर किसी दिक्कत के डिजिटल एक्सेस मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि इस पहल के पीछ 'नागरिक देवो भव' की भावना है।