Income Tax Refund: इस वित्त वर्ष में इनकम टैक्स रिफंड घटा है। सीबीडीटी के डेटा के मुताबिक, 11 जनवरी तक कुल रिफंड 3.11 लाख करोड़ रुपये था। यह एक साल पहले की समान अवधि में 3.75 लाख करोड़ रुपये के रिफंड से 16.92 फीसदी कम है। सीनियर टैक्स अधिकारियों का कहना है कि रिफंड्स में कमी की वजह यह नहीं है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्सपेयर्स का रिफंड रोक रखा है। इसकी वजह टैक्स डिडक्शंस पैटर्न में आया बदलाव, नई इनकम टैक्स रीजीम में ज्यादा दिलचस्पी, रिटर्न की जांच में एनालिटिक्स का इस्तेमाल और पिछले साल के हाई रिफंड का बेस इफेक्ट हैं।
कुछ रिटर्न में जांच में मिसमैच पाया गया
सीनियर टैक्स अधिकारियों का कहना है कि ऑटोमेटेड डेटा चेक में कुछ रिटर्न में मिसमैच पाया गया। इसके बाद रिफंड इश्यू करने से पहले रिटर्न की करीबी जांच की गई। इसका असर भी कुल रिफंड पर पड़ा है। कुछ रिटर्न में गड़बड़ियां मिलने पर टैक्सपेयर्स को रिटर्न रिवाइज करने को लिए कहा गया। अधिकारियों ने बताया कि टैक्सपेयर्स को रिटर्न में गड़बड़ी ठीक करने के लिए कैंपेन चलाया गया। पिछले दो सालों में इस कैंपने से करीब 9,640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त टैक्स आया है।
95 फीसदी रिटर्न के मामलों की प्रोसेसिंग हो चुकी है
अतिरिक्त 9,640 करोड़ रुपये के टैक्स में नॉन-फॉरेन-एसेट कंप्लायंस इंटरवेंशंस से करीब 8,800 करोड़ रुपये आया। 840 करोड़ रुपये का टैक्स फॉरेन इनकम से जुड़ा था। टैक्स अधिकारियों ने कहा कि रिफंड के डेटा की तुलना पिछले साल के रिटर्न से नहीं की जा सकती। FY26 में रिफंड के 95 फीसदी से ज्यादा मामलों की प्रोसेसिंग हो चुकी है। सिर्फ कुछ मामलों को रोका गया है, जिनमें आगे की जांच जरूरी है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि रिफंड के प्रोसेस में किसी तरह की बाधा नहीं आई।
इन वजहों से रिफंड एक साल पहले के मुकाबले कम
अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस वित्त वर्ष में कम रिफंड की एक वजह टीडीएस के प्रावधानों में बदलाव है। सरकार के टीडीएस के प्रावधानों को लगातार तर्कसंगत बना रही है। इससे ज्यादा टीडीएस कटने के मामलों में कमी आई है। ज्यादा टीडीएस नहीं कटने से टैक्सपेयर्स को रिफंड को पोस्ट-फाइलिंग की जरूरत नहीं रह गई है। इसके अलावा बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स के इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल करने से भी रिफंड में कमी आई है।
बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स नई रीजीम में दिखा रहे दिलचस्पी
आईटीआर-1 से आईटीआर-4 फॉर्म्स का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स में सैलरीड इंडिविजुअल्स, इनवेस्टर्स, प्रोफेशनल्स और स्मॉल बिजनेसेज की हिस्सेदारी ज्यादा है। इनमें से करीब 88 फीसदी ने इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल किया। नई रीजीम में डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस की इजाजत नहीं है। ओल्ड रीजीम में डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस की वजह से रिफंड बढ़ जाता है। नई रीजीम इस्तेमाल में काफी आसान है। इसमें टैक्स के रेट्स भी कम हैं।