ITR Filing 2026: म्यूचुअल फंड, IPO और ट्रेडिंग से हुई ₹13 लाख की कमाई? जानिए कितना देना होगा टैक्स

ITR Filing 2026: वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) खत्म होने को है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग स्रोतों से हुई आय पर टैक्स कैसे लगेगा और क्या धारा 87A के तहत रिबेट मिल पाएगी। गैर-ऑडिट मामलों में रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 होगी

अपडेटेड Feb 13, 2026 पर 9:42 AM
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ITR Filing 2026: पुरानी टैक्स रिजीम में ₹5 लाख से अधिक आय होने पर रिबेट नहीं मिलता

ITR Filing 2026: वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) खत्म होने को है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग स्रोतों से हुई आय पर टैक्स कैसे लगेगा और क्या धारा 87A के तहत रिबेट मिल पाएगी। गैर-ऑडिट मामलों में रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 होगी।

नए टैक्स रिजीम में FY 2025-26 के लिए सामान्य आय ₹12 लाख तक टैक्स-फ्री है (धारा 87A के रिबेट के जरिए)। लेकिन जब आय में शेयर ट्रेडिंग, IPO, कैपिटल गेन, बैंक ब्याज और डिविडेंड शामिल हों, तो टैक्स गणना अलग-अलग हेड्स के तहत करनी पड़ती है।

मान लीजिए कुल आय 13 लाख रुपये है, जिसमें शामिल है:


- ₹3 लाख: बार-बार शेयर ट्रेडिंग (3–5% मुनाफे पर नियमित खरीद-बिक्री)

- ₹1 लाख: IPO में अलॉटमेंट के तुरंत बाद बिक्री

- ₹3 लाख: 2–8 महीने रखे शेयरों पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG)

- ₹3 लाख: 1 साल से अधिक होल्डिंग पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG)

- ₹2 लाख: बैंक ब्याज

- ₹1 लाख: डिविडेंड आय

किस हेड के तहत टैक्स लगेगा?

1) शेयर ट्रेडिंग (₹3 लाख)

बार-बार की जाने वाली खरीद-बिक्री से कमाया गया लाभ “Profits and Gains of Business or Profession” के तहत बिजनेस इनकम माना जाएगा और इस पर इनकम टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स होगा।

2) IPO अलॉटमेंट पर लाभ (₹1 लाख)

इसे बिजनेस इनकम नहीं, बल्कि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा, क्योंकि IPO में आवेदन और लिस्टिंग पर बिक्री को निवेश गतिविधि मानी जाती है। इस पर फ्लैट 20% टैक्स लगेगा।

3) STCG (₹3 लाख)

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (धारा 111A) के तहत 20% फ्लैट टैक्स।

4) LTCG (₹3 लाख)

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (धारा 112A) के तहत 12.5% फ्लैट टैक्स (मान लेते हैं कि 1 लाख की छूट की सीमा पार है)।

5) बैंक ब्याज (₹2 लाख)

“अन्य स्रोतों से आय” के तहत, स्लैब रेट से टैक्स।

6) डिविडेंड (₹1 लाख)

“अन्य स्रोतों से आय” के तहत, स्लैब रेट से टैक्स।

स्लैब रेट से टैक्स योग्य “नॉर्मल इनकम”

- शेयर ट्रेडिंग: ₹3 लाख

- बैंक ब्याज: ₹2 लाख

- डिविडेंड: ₹1 लाख

- कुल = ₹6 लाख

चूंकि नई टैक्स रिजीम में स्लैब रेट से टैक्स योग्य आय ₹12 लाख से कम है, इसलिए धारा 87A के तहत इस हिस्से का पूरा टैक्स रिबेट के जरिए शून्य हो जाएगा।

विशेष दर (Special Rate) से टैक्स योग्य आय

- IPO STCG: ₹1 लाख @ 20% = ₹20,000

- STCG (शेयर): ₹3 लाख @ 20% = ₹60,000

- LTCG: ₹3 लाख @ 12.5% = ₹37,500

- कुल टैक्स = ₹1,17,500

इस पर 4% स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर (Cess) = ₹4,700

कुल देय टैक्स = ₹1,22,200

क्या धारा 87A रिबेट मिलेगा?

पुरानी टैक्स रिजीम में ₹5 लाख से अधिक आय होने पर रिबेट नहीं मिलता। नई टैक्स रिजीम में ₹12 लाख तक की “स्लैब रेट” आय पर रिबेट मिलता है। लेकिन कैपिटल गेन पर लगने वाला टैक्स “स्पेशल रेट” से होता है, जिस पर रिबेट लागू नहीं होता। इसलिए इस केस में स्लैब रेट वाली आय पर टैक्स शून्य हो जाएगा, लेकिन कैपिटल गेन पर पूरा टैक्स देना होगा।

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